आईसीआईएमओडी ने एक बयान में कहा कि प्रभावित क्षेत्रों से प्राप्त वीडियो फुटेज और जानकारी के आधार पर किए गए प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि शायद बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानी मलबा भोटे कोशी नदी की सहायक नदी लेंदे खोला में गिरा होगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे अचानक पानी का तेज बहाव पैदा हुआ होगा, जो अपने साथ मलबा और बड़े पत्थर नीचे की ओर ले गया। आईसीआईएमओडी ने कहा कि जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों से बाढ़ की लहर की असाधारण गति और तीव्रता का पता चलता है। त्रिशूली नदी में गलछी के पास जलस्तर कथित तौर पर 30 मिनट में नौ मीटर तक बढ़ गया, जबकि मालेखु में इसी अवधि में जलस्तर सात मीटर बढ़ा।
उसने कहा कि त्रिशूली नदी के किनारे जल निगरानी के कई केंद्र इस घटना के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए या बह गए, हालांकि गलछी निगरानी केंद्र अब भी काम कर रहा है।
विशेषज्ञ यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या मलबे ने नदी के किसी संकरे हिस्से को अस्थायी रूप से रोक दिया था। आईसीआईएमओडी के अनुसार, इस तरह की रुकावट से बांध में जमा पानी अचानक निकलने पर दूसरी आपदाओं का खतरा पैदा हो सकता है।




