कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया है. मस्क को यूक्रेन का प्रतिष्ठित ‘ऑर्डर ऑफ फ्रीडम’ अवॉर्ड दिया गया है. यह फैसला पूरी दुनिया के लिए काफी चौंकाने वाला है. ऐसा इसलिए है क्योंकि मस्क कई बार जेलेंस्की और उनकी युद्ध रणनीति की तीखी आलोचना कर चुके हैं. इसके बावजूद यूक्रेन ने यह कदम उठाया है. दरअसल रूस के साथ युद्ध में मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क ने यूक्रेन की काफी मदद की है. शुरुआत से ही स्टारलिंक यूक्रेन के नागरिकों और सेना के लिए संचार का एक प्रमुख माध्यम रहा है. इस नेटवर्क ने रूसी सेना के एडवांस को धीमा करने में मदद की है. राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, ‘मस्क को यह सम्मान मानव जीवन की रक्षा और अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने के लिए दिया गया है’.
मस्क और जेलेंस्की के बीच आखिर क्यों हुआ था विवाद?
एलन मस्क ने साल 2022 में रूस के हमले के बाद यूक्रेन को स्टारलिंक टर्मिनल मुहैया कराए थे. शुरुआत में सब कुछ ठीक था. लेकिन जल्द ही मस्क और यूक्रेन की लीडरशिप के बीच खटपट शुरू हो गई. मस्क का मानना था कि स्टारलिंक का इस्तेमाल केवल संचार के लिए होना चाहिए. वह इसे लंबे दूरी के हमलों का जरिया नहीं बनाना चाहते थे. मस्क ने कहा था कि रूसी ठिकानों पर हमले के लिए स्टारलिंक का इस्तेमाल विश्व युद्ध भड़का सकता है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मस्क ने 2022 में क्रीमिया के पास कवरेज बंद करवा दिया था. इससे यूक्रेन का मिलिट्री ऑपरेशन बाधित हुआ था. मस्क ने कई बार यूक्रेन को रूस के साथ समझौता करने की सलाह भी दी थी. इसके अलावा मस्क ने जेलेंस्की पर सीधे निशाना साधा था और यूक्रेन में चुनाव कराने की मांग की थी.
स्टारलिंक नेटवर्क ने यूक्रेन की जंग में कैसे निभाई अहम भूमिका?
- इन सभी विवादों के बावजूद यूक्रेन के लिए स्टारलिंक एक जीवनरेखा बना हुआ है. पारंपरिक नेटवर्क तबाह होने के बाद स्टारलिंक ने सेना को आपस में जोड़े रखा है. सेना ड्रोन कंट्रोल करने के लिए इसका भारी इस्तेमाल कर रही है.
- फ्रंटलाइन पर रूसी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को चकमा देने में यह काफी कारगर रहा है. हालांकि इस साल की शुरुआत में रूसी सेना भी अवैध रूप से स्टारलिंक का इस्तेमाल करने लगी थी. इससे यूक्रेन की परेशानी बढ़ गई थी.
- फरवरी में यूक्रेन ने सीधे स्पेसएक्स से संपर्क किया था. इसके बाद मस्क और उनकी टीम ने रूस की पहुंच रोकने के लिए कई उपाय किए. अब केवल मंजूर किए गए टर्मिनल ही उस इलाके में काम कर सकते हैं. इस तकनीकी सहयोग ने युद्ध में एक बड़ा बदलाव ला दिया है.
क्या रूस के अंदर हमले के लिए यूक्रेन को मिलेगी मस्क की मदद?
यूक्रेन अब मस्क से स्टारलिंक के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने की मांग कर रहा है. यूक्रेनी सेना रूस के अंदर मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल लांचरों को निशाना बनाना चाहती है. इसके लिए उन्हें स्टारलिंक से लैस ड्रोन की सख्त जरूरत है. अगर मस्क इसकी मंजूरी दे देते हैं, तो यूक्रेन को काफी फायदा होगा. वह रूस के अहम ठिकानों को आसानी से तबाह कर सकेगा. लेकिन अभी तक मस्क ने इस मांग को खारिज कर दिया है.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि मस्क इस मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. उनका तर्क है कि इससे रूस और अमेरिका के बीच सीधा टकराव शुरू हो सकता है. हालांकि यूक्रेन के अधिकारी लगातार मस्क को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस अवॉर्ड के बाद मस्क का रुख बदलता है.
‘ऑर्डर ऑफ फ्रीडम’ सम्मान के पीछे क्या है यूक्रेन की कूटनीति?
कूटनीतिक नजरिए से देखा जाए तो यह अवॉर्ड यूक्रेन की एक बड़ी चाल है. अमेरिका में अब डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आ चुके हैं और वे भी शांति वार्ता का दबाव बना रहे हैं. मस्क और ट्रंप के रिश्ते काफी अच्छे माने जाते हैं. जेलेंस्की इस अवॉर्ड के जरिए मस्क के साथ अपने रिश्ते सुधारना चाहते हैं. यह सम्मान यूक्रेन और अमेरिका के बीच बेहतर संबंधों की दिशा में एक कदम है.
मस्क के प्रभाव को नजरअंदाज करना यूक्रेन के लिए एक बड़ी भूल हो सकती है. इसलिए तमाम कड़वाहट को भूलकर यूक्रेन ने मस्क को गले लगाया है. जेलेंस्की का यह कदम बताता है कि युद्ध के दौरान कूटनीति में कोई भी स्थायी दुश्मन नहीं होता है. यह तकनीक और युद्ध के बदलते स्वरूप का भी एक बड़ा उदाहरण है.
क्या स्पेसएक्स के बिना यूक्रेन का टिकना संभव है?
रूस और यूक्रेन युद्ध ने साबित कर दिया है कि आधुनिक जंग सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ी जाती है. इसमें सैटेलाइट और इंटरनेट संचार का रोल सबसे बड़ा हो गया है. यूक्रेन की पूरी सैन्य व्यवस्था स्टारलिंक पर बहुत ज्यादा निर्भर हो चुकी है. अगर मस्क किसी वजह से सपोर्ट वापस ले लेते हैं, तो यूक्रेन का कम्युनिकेशन सिस्टम ठप हो सकता है.
रूस इसी फिराक में रहता है कि कैसे यूक्रेन का नेटवर्क बर्बाद किया जाए. स्पेसएक्स के अलावा कोई दूसरी कंपनी इतनी जल्दी और इतने बड़े स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट नहीं दे सकती है. यही वजह है कि यूक्रेन हर हाल में मस्क को अपने पक्ष में रखना चाहता है. मस्क की कंपनी दुनिया भर में इस तकनीक में सबसे आगे है. उनकी इस ताकत ने उन्हें ग्लोबल पॉलिटिक्स का एक अहम खिलाड़ी बना दिया है.
प्राइवेट कंपनियों का युद्ध में दखल, क्या दुनिया के लिए है नया खतरा?
यूक्रेन युद्ध ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी के मालिक का युद्ध के मैदान पर इतना बड़ा प्रभाव देखा गया है. मस्क का एक फैसला किसी भी देश की जीत या हार तय कर सकता है. कई रक्षा विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. उनका मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में निजी कंपनियों पर इतनी निर्भरता खतरनाक हो सकती है. सरकारें चुनाव से बदलती हैं लेकिन प्राइवेट कंपनियों के हित अलग होते हैं.
मस्क का अपनी शर्तों पर स्टारलिंक चलाना और मनमाने तरीके से नियम तय करना एक चेतावनी है. दुनिया भर के देश अब खुद के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम बनाने पर जोर दे रहे हैं. वे नहीं चाहते कि भविष्य के किसी युद्ध में उन्हें एलन मस्क जैसे किसी व्यक्ति की दया पर निर्भर रहना पड़े. यह युद्ध तकनीक के मामले में दुनिया के लिए एक सबक है.




