CIA Chief Moscow Visit: पिछली बार पुतिन ने नहीं मानी थी बात, तब क्या करने गए थे CIA चीफ? अब ट्रंप के दूत पर सस्पेंस


नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को में अमेरिकी खुफिया प्रमुख की अचानक मौजूदगी ने एक पुरानी कहानी फिर सुर्खियों में ला दिया है. दरअसल करीब पांच साल पहले CIA के तत्कालीन प्रमुख विलियम बर्न्स भी मॉस्को पहुंचे थे. तब उनके हाथ में चेतावनी थी. अमेरिका को खुफिया जानकारी मिली थी कि व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर रहे हैं. बर्न्स ने रूसी अधिकारियों से बात की और पुतिन से भी फोन पर बातचीत की. संदेश साफ था. हमला हुआ तो अमेरिका और उसके सहयोगी कड़ी प्रतिक्रिया देंगे. लेकिन पुतिन नहीं माने. 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. अब इतिहास के उसी पन्ने के बीच CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को पहुंचना सवाल खड़ा कर रहा है. आखिर इस बार वॉशिंगटन का संदेश क्या है?

जॉन रैटक्लिफ मंगलवार को अमेरिकी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचे और करीब चार घंटे वहां रहने के बाद लौट गए. यात्रा का मकसद सार्वजनिक नहीं किया गया है. यही गोपनीयता इस दौरे को और दिलचस्प बना रही है. डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ अमेरिका और रूस के बीच बातचीत के चैनल भी खुले हुए हैं. ऐसे में CIA प्रमुख का मॉस्को जाना सिर्फ सामान्य संपर्क है या इसके पीछे कोई बड़ा संदेश है, इस पर अटकलें तेज हैं. क्या रैटक्लिफ रूस को किसी नई अमेरिकी खुफिया जानकारी से अवगत कराने गए थे? क्या यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई सीधी बातचीत हुई? या फिर ईरान समेत किसी दूसरे रणनीतिक मुद्दे पर चर्चा हुई? फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब नहीं मिला है.

बर्न्स के मॉस्को दौरे में क्या हुआ था?

नवंबर 2021 में CIA निदेशक विलियम बर्न्स मॉस्को गए थे. उस समय जो बाइडन प्रशासन रूस को यूक्रेन पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहा था. बर्न्स ने रूस की सुरक्षा परिषद के तत्कालीन सचिव निकोलाई पेत्रुशेव समेत वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. उन्होंने पुतिन से फोन पर भी बात की थी. अमेरिका ने रूस को बताया था कि उसके पास ऐसी खुफिया जानकारी है, जिससे पता चलता है कि मॉस्को बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है. उस समय अमेरिकी संदेश सिर्फ कूटनीतिक अपील नहीं था. वॉशिंगटन ने साफ संकेत दिया था कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी जवाब देंगे. इसके बावजूद मॉस्को पीछे नहीं हटा.

चेतावनी के बावजूद पुतिन ने क्यों नहीं बदला फैसला?

  • 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने का सैन्य हमला शुरू कर दिया. बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि बर्न्स इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि पुतिन हमला करने के फैसले को लेकर तेजी से दृढ़ होते जा रहे थे. यानी अमेरिकी चेतावनी मॉस्को की रणनीति बदलने में कामयाब नहीं हुई.
  • यही वजह है कि रैटक्लिफ का मौजूदा मॉस्को दौरा खास बन गया है. पिछली बार CIA प्रमुख के दौरे का मकसद रूस को रोकने की कोशिश से जुड़ा था. इस बार परिस्थिति अलग है. ट्रंप प्रशासन युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत और दबाव, दोनों रास्तों पर आगे बढ़ रहा है.

रैटक्लिफ के दौरे का मकसद अब भी रहस्य

रैटक्लिफ के मॉस्को दौरे को लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया कि वह किससे मिले और किन मुद्दों पर चर्चा हुई. यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मुलाकात राष्ट्रपति पुतिन से हुई या नहीं. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कहा था कि उन्हें अमेरिकी विमान के मॉस्को पहुंचने की जानकारी नहीं थी और उस सप्ताह क्रेमलिन तथा ट्रंप प्रशासन के प्रतिनिधियों के बीच किसी बैठक की योजना की जानकारी उनके पास नहीं थी. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रैटक्लिफ पुतिन के लिए कोई खास चेतावनी लेकर पहुंचे थे. हालांकि अमेरिकी खुफिया समुदाय से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों ने इस संभावना को खारिज नहीं किया है.

क्या यूक्रेन को लेकर फिर कोई चेतावनी है?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिका ने ऐसी खुफिया जानकारी जुटाई है, जिसमें रूस की संभावित सैन्य लामबंदी और यूक्रेन से जुड़े कदमों की शुरुआती तैयारियों के संकेत बताए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इसका एक उद्देश्य नाटो की प्रतिक्रिया को परखना भी हो सकता है. पूर्व अमेरिकी डिप्टी डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस बेथ सैनर ने भी संभावना जताई कि रैटक्लिफ मॉस्को को यह संदेश देने गए हो सकते हैं कि वॉशिंगटन रूस की गतिविधियों से अनजान नहीं है. हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान भी हो सकता है बातचीत का हिस्सा

रैटक्लिफ की संभावित बातचीत का दायरा केवल यूक्रेन तक सीमित होने की संभावना भी नहीं है. अमेरिका और रूस के बीच ईरान को लेकर भी मतभेद और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं. सैनर के मुताबिक, CIA प्रमुख ईरान से जुड़े मुद्दों और रूस के तेहरान के साथ संबंधों पर भी चर्चा कर सकते हैं. रैटक्लिफ पहले ही रूस की विदेशी खुफिया सेवा के प्रमुख सर्गेई नारिश्किन के संपर्क में रहे हैं. मार्च 2025 में दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई थी और आपसी हितों के मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी थी. इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी और रूसी खुफिया तंत्र के बीच संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है.

ट्रंप के दूत या खुफिया चैनल का बड़ा इस्तेमाल?

रैटक्लिफ को सीधे तौर पर ट्रंप का विशेष दूत कहना फिलहाल सही नहीं होगा. वह CIA निदेशक हैं. लेकिन उनका मॉस्को जाना अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि खुफिया प्रमुखों के बीच संवाद कई बार उन मुद्दों पर भी होता है जिन्हें सार्वजनिक कूटनीति के जरिए संभालना मुश्किल होता है. ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध के समाधान की कोशिश कर रहा है. ऐसे में रैटक्लिफ का दौरा बैक-चैनल बातचीत, खुफिया जानकारी साझा करने या किसी संवेदनशील संदेश के आदान-प्रदान का हिस्सा हो सकता है. लेकिन जब तक अमेरिका या रूस की तरफ से स्पष्ट जानकारी नहीं आती, इन संभावनाओं को सिर्फ अटकल ही माना जाएगा.

इस बार पुतिन सुनेंगे या कहानी फिर दोहराएगी?

2021 और 2026 के हालात में बड़ा फर्क है. पिछली बार अमेरिका रूस को युद्ध शुरू करने से रोकना चाहता था. इस बार युद्ध पहले से जारी है और ट्रंप इसे खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए रैटक्लिफ का संदेश अगर कोई चेतावनी है भी, तो उसका संदर्भ अलग होगा.

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CIA चीफ मॉस्को से क्या संदेश लेकर आए और क्या लेकर लौटे. क्या उन्होंने पुतिन या उनके करीबी अधिकारियों से मुलाकात की? क्या यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई नई अमेरिकी खुफिया जानकारी साझा हुई? या फिर ईरान और रूस के रिश्तों पर बातचीत हुई? इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं. इतना जरूर है कि पांच साल पहले बर्न्स की यात्रा और आज रैटक्लिफ के दौरे के बीच समानता ने मॉस्को की इस चार घंटे की यात्रा को असाधारण रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है.



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