‘बहिष्कार वाली सोच वाले आंदोलन का गहरा विरोध’
ममदानी ने आरएसएस के विचारों को लेकर अपनी असहमति भी खुलकर रखी। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो किसी भी देश के लिए ऐसे आंदोलन का उभरना बेहद चिंताजनक है, जिसकी सोच समाज के कुछ लोगों को अलग रखने या बाहर करने वाली दृष्टि पर आधारित हो। यही कारण है कि मैं इसका गहरा विरोध करता हूं।”
उन्होंने कहा कि उनका विरोध सिर्फ भारतीय-अमेरिकी होने के नाते नहीं है, बल्कि न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में भी है। ममदानी के मुताबिक, न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो हर व्यक्ति के समान रूप से यहां होने और अपनी जगह रखने के अधिकार में विश्वास करता है, “चाहे उसका रंग, विचारधारा, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो।”
मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। उनका यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इसमें करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर मोहन भागवत का पारंपरिक तिलक लगाकर स्वागत किया गया।




