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US Election SIR Like Process Start: अमेरिका हमसे विकास के मामले में भले ही काफी आगे है, लेकिन भारतीय इलेक्शन सिस्टम ट्रांसपेरेंसी के मामले में अमेरिका से काफी आगे है. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की तस्दीक की है और उन्होंने इससे प्रेरणा लेकर चुनावी सुधार का काम भी शुरू करने का प्लान तैयार कर लिया है.
अमेरिका में भारत की तरह SIR चालू?
US Election SIR Election: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश के चुनावी सिस्टम में बदलाव चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण देते हुए अमेरिका में वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग तेज कर दी है. ट्रंप लगातार सेव अमेरिका एक्ट (SAVE America Act) के समर्थन में लगातार अभियान चला रहे हैं. उनके इस कानून का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी चुनावों में केवल योग्य नागरिकों के मतदान को सुनिश्चित करना और मतदाता पहचान की प्रक्रिया को मजबूत करना है. डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिका में साल 2020 में हुए चुनावों में धांधली के मुद्दे को उठाते रहे हैं और इसीलिए वे इसमें बदलाव लाना चाहते हैं.
भारत के इलेक्शन और वोटिंग सिस्टम से प्रभावित डोनाल्ड ट्रंप ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर भी काम करना शुरू कर दिया है. राजनीतिक बहस के बीच अब अमेरिका में भी वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता को लेकर बड़े स्तर पर जांच का संकेत अमेरिकी प्रेसिडेंट ने दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (Census Bureau) 2020 के चुनाव में दर्ज मतदाताओं के रिकॉर्ड का नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड से मिलान कर रहा है.
SIR से कितना मिलती-जुलती है प्रक्रिया
- हालांकि अमेरिका में चल रही यह प्रक्रिया भारत के SIR की हूबहू नकल नहीं है, लेकिन इसका उद्देश्य वोटर रिकॉर्ड में गैर-नागरिकों की पहचान करना और चुनावी पात्रता पर सवालों की जांच करना है.
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पहले 12.8 करोड़ मतदाता रिकॉर्ड की जांच में 24 हजार से ज्यादा ऐसे लोग मिले, जिन्हें उन्होंने गैर-अमेरिकी नागरिक बताते हुए अवैध मतदाता कहा.
- उन्होंने यह भी दावा किया कि अब अगले 3.2 करोड़ रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और संख्या और बढ़ सकती है. इसी आधार पर ट्रंप ने फिर से SAVE America Act को पारित करने की मांग दोहराई.
ट्रंप के मुताबिक यह जांच 2020 के चुनाव से जुड़े उनके पुराने दावों को मजबूत करती है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल भी है. सामने आए आंकड़ों को अपने आप में यह सबूत नहीं माना जा सकता कि 2020 का राष्ट्रपति चुनाव परिणाम गलत था. रिपोर्टों की मानें तो बताए गए 24 हजार रिकॉर्ड कुल 12.8 करोड़ रिकॉर्ड का बेहद छोटा हिस्सा हैं और यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन लोगों ने किस उम्मीदवार को वोट दिया था. 2020 में जो बाइडेन ने ट्रंप से 70 लाख से ज्यादा लोकप्रिय वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.
सेव अमेरिका एक्ट में क्या?
अमेरिका में इस मुद्दे पर नई राजनीतिक बहस चल रही है. ट्रंप समर्थक इसे चुनावी पारदर्शिता और नागरिकता की पुष्टि से जोड़ रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि रिकॉर्ड मिलान में डेटा की गलतियां भी हो सकती हैं और ऐसे कदम योग्य मतदाताओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. SAVE America Act के तहत संघीय चुनावों में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देने की व्यवस्था प्रस्तावित है. व्हाइट हाउस इसे चुनावी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है. इस तरह देखा जाए तो अमेरिका में भी अब वोटर रिकॉर्ड की छानबीन और नागरिकता की पुष्टि चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है. भारत के SIR से इसकी तुलना की जा सकती है, लेकिन दोनों प्रक्रियाओं के कानूनी ढांचे और तरीके अलग हैं. फिर भी दोनों जगह एक सवाल समान है- मतदाता सूची कितनी साफ और भरोसेमंद है और उसे जांचने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए?
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…
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