बेसेंट ने यह भी दावा किया कि हाल की घटनाओं के बाद ईरानी नेतृत्व कमजोर पड़ा है और उसके अंदर तालमेल की कमी दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार, चुनी हुई सरकार, आईआरजीसी और धार्मिक नेता इन तीन हिस्सों में बंटी हुई है। और इनके बीच ठीक से बातचीत नहीं हो पा रही।
हालांकि उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका दबाव और बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा शांति समझौता पसंद करते हैं। लेकिन हमारे धैर्य की भी एक सीमा है। अगर राष्ट्रपति ट्रंप को लगा कि शांति समझौता संभव नहीं है, तो फिर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।
प्रशासन की ये टिप्पणियां उसकी व्यापक रणनीति को दिखाती हैं, जिसमें वह ईरान नीति को ‘दबाव और बातचीत’ के मिश्रण के रूप में पेश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य कदमों ने अमेरिका की बातचीत की स्थिति को कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत किया है।





