व्हाइट हाउस में गलत लोग, ट्रंप 2.0 में कमजोर पड़े भारत-अमेरिका रिश्ते? रुबियो की यात्रा भी नहीं पाट सकी दूरी


वॉशिंगटन. अफ्रीकी-अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और भारत के रिश्ते कमजोर हुए हैं. उन्होंने इसका कारण व्हाइट हाउस के भीतर गलत सलाह को बताया और कहा कि नई दिल्ली के साथ भरोसा फिर से बनाने के लिए असली और ईमानदार कोशिश की जरूरत है. मिलबेन ने कहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल और अब के समय में बड़ा फर्क है. उनके मुताबिक पहले कार्यकाल के सलाहकार भारत को बेहतर समझते थे, लेकिन अब ‘गलत लोग’ भारत से जुड़े मामलों पर राष्ट्रपति को सलाह दे रहे हैं.

आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में बात करते हुए मिलबेन ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की हाल की भारत यात्रा निजी तौर पर उनके लिए अहम रही, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों में बड़े स्तर पर सुधार नहीं हुआ. उन्होंने कहा, “मैं साफ-साफ कहूं तो नहीं, मुझे नहीं लगता कि इस यात्रा से अमेरिका-भारत रिश्तों में कोई खास सुधार हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने इस दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है.”

उन्‍होंने रूबियो की यात्रा के दौरान भारत की मेहमाननवाजी और नेतृत्व की तारीफ की. मिलबेन अक्सर भारत-अमेरिका संबंधों और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में बोलती रही हैं. उन्होंने कहा, “रुबियो को भारत में देखना बहुत अच्छा लगा. यह शायद उनका भारत का पहला दौरा था.” उन्होंने यह भी कहा कि उनके और उनकी पत्नी के लिए यह जरूरी था कि वे ‘इस खूबसूरत देश, इसकी धरती और यहां के अच्छे लोगों’ को देखें और समझें.

मिलबेन ने भारत के नेताओं की भी तारीफ की जिन्होंने इस यात्रा के दौरान रुबियो की मेजबानी की. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री बहुत ही शालीन और विनम्र थे. भारत का नेतृत्व बहुत ही अच्छा है. यहां के लोग भी बहुत दयालु हैं.” रुबियो ने इस यात्रा में सिर्फ नई दिल्ली ही नहीं, बल्कि भारत के कई हिस्सों का दौरा किया, जैसे कोलकाता, जयपुर और आगरा. मिलबेन के मुताबिक इससे उन्हें भारत की संस्कृति और समाज को बेहतर समझने का मौका मिला.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े राजनीतिक रिश्ते की समस्याएं सिर्फ एक यात्रा से हल नहीं हो सकतीं. जब उनसे पूछा गया कि दोनों देशों के रिश्ते कैसे सुधर सकते हैं, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इसे सुधारने में अगला चुनाव चक्र लग जाएगा, अगर मैं ईमानदारी से कहूं.” मिलबेन ने कहा कि दुनिया भर के नेता अमेरिका की राजनीति में होने वाले बदलावों को अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले बहुत ध्यान से देख रहे हैं. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और दुनिया भर के नेता यह जरूर देख रहे हैं कि नवंबर में क्या होने वाला है.”

भारत को ‘हमारा सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक साझेदार’ बताते हुए मिल्बेन ने कहा कि नई दिल्ली के साथ भरोसा दोबारा बनाना ‘अमेरिकी नेताओं की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.’ उन्होंने अमेरिका में भारत के मौजूदा राजदूत सर्जियो गोर की भी तारीफ की और कहा, “मैं सर्जियो की सराहना करती हूं, जो अभी भारत में अमेरिका के राजदूत हैं, और मुझे लगता है कि जितनी जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, उसके हिसाब से वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं.”

मिलबेन ने ट्रंप की पहली सरकार और अभी की सरकार के बीच फर्क भी बताया. उन्होंने कहा कि पहले कार्यकाल में उनके सलाहकार भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के महत्व को बेहतर समझते थे. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति के पास उस समय सही लोग थे जो उन्हें सलाह दे रहे थे कि भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना कितना जरूरी है.” उन्होंने ट्रंप के पहले कार्यकाल में टेक्सास में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “यह प्रशासन 2.0, सच कहूं तो, इसमें सही लोग नहीं हैं.” भारत से जुड़े टैरिफ नीति पर उन्हें गलत सलाह दी गई थी.

मिलबेन ने अप्रवासियों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को लेकर इस्तेमाल की जा रही भाषा की भी आलोचना की. उन्होंने कहा, “मैं इस बात से बहुत निराश और परेशान हूं कि इस प्रशासन ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बारे में इतने नकारात्मक तरीके से बात की है.” उन्होंने कहा कि रिश्ते सुधारने के लिए वॉशिंगटन को ज्यादा सम्मानजनक भाषा अपनानी होगी. मिलबेन ने उम्मीद जताई कि आने वाले अमेरिकी नेता विविधता को अपनाएंगे और साथ ही सीमा सुरक्षा को भी बनाए रखेंगे.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img