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Lassi Vs Milkshake In Summer : चिलचिलाती गर्मी में पेट को ठंडक देने के लिए लस्सी बेस्ट है या मैंगो-बनाना मिल्क शेक? नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) और आयुर्वेद के नियमों के साथ जानिए इन दोनों समर ड्रिंक्स के फायदे, नुकसान और आपके डाइजेशन के लिए असली विनर कौन है!
Lassi Vs Milkshake : मई-जून की इस झुलसाने वाली गर्मी में जब पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा हो, तो बाहर से घर लौटते ही दिल बस कुछ ठंडा और रिफ्रेशिंग ढूंढता है. ऐसे में या तो हम मलाईदार ठंडी लस्सी पीना पसंद करते हैं या मैंगो या बनाना मिल्क शेक. दोनों ही ड्रिंक्स देखने में जितने लाजवाब लगते हैं, स्वाद में भी उतने ही मजेदार होते हैं, लेकिन जब बात चिलचिलाती धूप में पेट को आराम देने की हो, तो अक्सर यह बहस छिड़ जाती है कि इन दोनों में से ज्यादा फायदेमंद कौन सा है.

मेडिकल काउंसिल की न्यूट्रिशन गाइडलाइंस के अनुसार, गर्मियों के दिनों में हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र (Digestive System) सर्दियों के मुकाबले थोड़ा धीमा हो जाता है. इसलिए, इस मौसम में हम जो कुछ भी पीते या खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे लिवर और पेट की सेहत पर पड़ता है, जिसे ध्यान में रखकर ही हमें सही समर ड्रिंक का चुनाव करना चाहिए.

‘जर्नल ऑफ प्रोबायोटिक्स एंड हेल्थ’ की एक रिसर्च के मुताबिक, दही में भरपूर मात्रा में लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जैसे लाइव बैक्टीरिया होते हैं, जो हमारे पेट के फ्लोरा को संतुलित रखते हैं. न्यूट्रिशनिस्ट्स का मानना है कि धूप के कारण होने वाले डायरिया, ब्लोटिंग, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से बचाने में लस्सी एक अचूक दवा की तरह काम करती है.
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इसके अलावा, प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद के अनुसार, मट्ठे या दही से बनी लस्सी की तासीर प्राकृतिक रूप से बेहद ठंडी (Cooling Nature) होती है. झुलसती हुई धूप और लू की चपेट से आने के बाद जब आप एक गिलास ठंडी लस्सी पीते हैं, तो यह शरीर के बढ़े हुए तापमान और ‘पित्त दोष’ को तुरंत शांत करती है. सबसे अच्छी बात यह है कि दूध के मुकाबले दही को पचाना शरीर के लिए बहुत आसान होता है, क्योंकि फर्मेंटेशन के दौरान इसका लैक्टोज पहले ही टूट चुका होता है.

अब बात करते हैं गर्मियों के ‘किंग’ कहे जाने वाले मिल्क शेक की, जिसे दूध, चीनी और मैंगो या बनाना जैसे स्वादिष्ट मौसमी फलों को मिलाकर हैवी ब्लेंड किया जाता है. क्लीनिकल डायटिशियंस की गाइडलाइंस के अनुसार, मिल्क शेक पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन ‘मील रिप्लेसमेंट’ (यानी पूरे एक समय के भोजन के बराबर) है. इसमें दूध के कारण कैल्शियम और प्रोटीन तो मिलता ही है, साथ ही ताजे आम या केले से भरपूर मात्रा में विटामिन-A, विटामिन-C और जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स भी शरीर को मिल जाते हैं.

मिल्क शेक उन बच्चों और एथलीट्स के लिए ऊर्जा का बहुत बड़ा स्रोत है, जिन्हें इंस्टेंट कैलोरी और एनर्जी बूस्ट की जरूरत होती है. हालांकि, मॉडर्न न्यूट्रिशन साइंस और आयुर्वेद दोनों ही मिल्क शेक के नियमित और अत्यधिक सेवन को लेकर एक चेतावनी भी देते हैं. आयुर्वेद के प्रसिद्ध ‘विरुद्ध आहार’ सिद्धांत के अनुसार, दूध के साथ खट्टे, आंशिक रूप से पके या अत्यधिक मीठे फलों का मिश्रण एक गलत फूड कॉम्बिनेशन है, जो पेट में जाकर भारीपन पैदा करता है.

चूंकि मिल्क शेक पचाने में काफी भारी होता है, इसलिए गर्मियों में कमजोर पड़ चुकी पाचन अग्नि इसे आसानी से प्रोसेस नहीं कर पाती. इसके परिणामस्वरूप कई लोगों को मिल्क शेक पीने के बाद पेट फूलने (Bloating), सुस्ती आने और यहाँ तक कि स्किन एलर्जी की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद फ्रुक्टोज (फलों की शुगर) और ऊपर से मिलाई गई एक्स्ट्रा चीनी मिलकर कैलोरी काउंट को बहुत ज्यादा बढ़ा देती है, जो वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है.

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अगर आपका मुख्य उद्देश्य गर्मियों में पेट को तुरंत ठंडक देना, खुद को हाइड्रेट रखना और डाइजेशन को दुरुस्त बनाना है, तो लस्सी या छाछ, मिल्क शेक से कहीं ज्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प है. लस्सी पेट पर हल्की होती है और गर्मी के मौसम में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाए रखने में मदद करती है.

आपके लिए एक स्मार्ट समर गाइड यही होगी कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही ड्रिंक चुनें. अगर आप लस्सी पी रहे हैं, तो उसमें सफेद चीनी की जगह धागे वाली मिश्री या भुने जीरे और काले नमक का इस्तेमाल करें, जो इसे और ज्यादा फायदेमंद बना देगा. वहीं, अगर आप मैंगो शेक के शौकीन हैं, तो ध्यान रखें कि आम पूरी तरह मीठा और पका हुआ हो, और इसे रात के बजाय सुबह वर्कआउट या ब्रेकफास्ट के समय ही पियें ताकि शरीर इसे आसानी से पचा सके.





