Shitkari Pranayama benefits : उत्तर भारत सहित पूरे देश में सूरज आग उगल रहा है. पारा 40°C से 45°C को पार कर चुका है और ऐसा लगता है मानो पूरा शहर भट्टी की तरह तप रहा है. इस जानलेवा गर्मी और लू (Heatwave) से बचने के लिए लोग चौबीसों घंटे एसी (AC) और कूलर के सामने बैठे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे योग विज्ञान में एक ऐसा ‘प्राकृतिक तरीका है, जो आपके शरीर को बिना किसी बिजली के बिल के अंदर से शिमला जैसी ठंडक दे सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं शीतकारी प्राणायाम (Shitkari Pranayama) की. अगर इस तपती दोपहर में आप भी खुद को हीट स्ट्रोक से बचाना चाहते हैं, तो जानिए इसके जबरदस्त फायदे और इसे करने का बिल्कुल सही तरीका.
क्या है शीतकारी प्राणायाम?
‘शीतकारी’ शब्द का अर्थ ही होता है ठंडक पैदा करने वाला या ‘शीतल’ करने वाला. जब हम इस प्राणायाम का अभ्यास करते हैं, तो मुंह से सी-सी (Sibilant sound) की आवाज निकलती है. गर्मियों के मौसम में यह प्राणायाम शरीर के तापमान को तुरंत नियंत्रित करने और भीतर की गर्मी या ‘पित्त’ को शांत करने का अचूक नुस्खा है:
फायदे जानकर रह जाएंगे दंग! (Amazing Benefits)-
अगर आप रोज सुबह सिर्फ 5 से 10 मिनट इसका अभ्यास करते हैं, तो आपको इसके हैरान कर देने वाले फायदे मिलेंगे:
बॉडी टेम्परेचर रहता है मेंटेन: यह प्राणायाम आपके नर्वस सिस्टम को ट्रिगर करता है, जिससे शरीर का तापमान तुरंत गिरता है. कड़कड़ाती धूप से आने के बाद यदि आप इसे करते हैं, तो यह शरीर को फौरन शांत करता है.
लू और हीट स्ट्रोक से बचाव: गर्मियों में चलने वाली गर्म हवाएं (लू) शरीर को बीमार कर देती हैं. शीतकारी प्राणायाम का नियमित अभ्यास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और आपको लू की चपेट में आने से बचाता है.
गुस्सा और मानसिक तनाव छू-मंतर: अत्यधिक गर्मी के कारण अक्सर लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं और मानसिक थकान महसूस करते हैं. यह प्राणायाम दिमाग को शीतलता देकर स्ट्रेस और एंग्जायटी को कम करता है.
भूख-प्यास पर नियंत्रण: यदि आप किसी ऐसी जगह फंसे हैं जहां तेज गर्मी है और पानी की कमी है, तो यह प्राणायाम आपकी अत्यधिक प्यास और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है.
त्वचा के लिए वरदान: गर्मी में होने वाले मुंहासे, घमौरियां और स्किन रैशेज का मुख्य कारण शरीर की आंतरिक गर्मी होती है. यह खून को साफ कर त्वचा में चमक लाता है.
शीतकारी प्राणायाम करने का सही तरीका (Step-by-Step Guide)-
-सबसे पहले किसी शांत और हवादार जगह पर सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं. अपनी रीढ़ की हड्डी (Spine) और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें.
-अपने ऊपर और नीचे के दांतों को आपस में मिला लें (भींच लें) और होठों को खोलकर दांतों को बाहर की तरफ दिखाएं.
-अब जीभ को दांतों के पीछे सटाते हुए, मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर खींचें. सांस खींचते समय ‘सी-सी’ की आवाज आएगी. इस ठंडी हवा को अपने तालू और गले में महसूस करें.
-मुंह बंद करें और अपनी क्षमता के अनुसार 3 से 5 सेकंड के लिए सांस को अंदर ही रोककर रखें.
-अब बिना मुंह खोले, दोनों नथुनों (Nose) से धीरे-धीरे सांस को पूरी तरह बाहर छोड़ दें.
-शुरुआती दिनों में इसे 5 से 7 बार दोहराएं. धीरे-धीरे आप इसे बढ़ाकर 15 से 20 बार तक कर सकते हैं.
सावधानी: ये लोग न करें! (Who should avoid?)
चूंकि यह प्राणायाम शरीर को बहुत ज्यादा ठंडा करता है, इसलिए जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर (Low BP), अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या कफ की शिकायत हो, वो इसे न करें. सर्दियों के मौसम में या बहुत ठंडी जगह पर इसका अभ्यास बिल्कुल नहीं करना चाहिए. जिनके दांतों में अत्यधिक सेंसिटिविटी (Sensitivity) या पायरिया की गंभीर समस्या है, उन्हें भी इससे बचना चाहिए.
इस भीषण गर्मी में सिर्फ बाहरी साधनों (AC/Cooler) पर निर्भर रहने के बजाय, अपनी जीवनशैली में शीतकारी प्राणायाम को शामिल करें. रोज सुबह इसका अभ्यास करें, खुद को हाइड्रेटेड रखें और इस समर सीजन को सेहतमंद तरीके से एन्जॉय करें!





