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Iran War: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता टूट गई है. अमेरिका ने कहा कि ईरान उसकी बातों को मानने के लिए तैयार नहीं है. वहीं, तेहरान ने कहा कि अमेरिका की तरफ से उसपर अनावश्यक बातें थोपी जा रही हैं. इन सबके बीच एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने अमेरिका की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन अब ईरान का खुलकर साथ देने पर विचार कर रहा है. (फाइल फोटो/Reuters)
Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता बीच में ही टूट गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लामाबाद में तेहरान के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत सफल नहीं रही है. उन्होंने कहा कि ईरान ने उनकी बातों को मानने से इनकार कर दिया है. इसके बाद ईरान जंग के और भी ज्यादा भयावह होने की आशंका गहरा गई है. वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि बातचीत का टूटना ईरान के लिए ज्यादा बुरा है. इन सब घटनाक्रमों के बीच एक और ज्यादा टेंशन वाली बात सामने आई है. खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अब चीन ईरान का खुले तौर पर साथ देने पर विचार कर रहा है. यह रिपोर्ट अमेरिका और इजरायल के लिए कतई शुभ समाचार नहीं है.
अमेरिकी मीडिया में दिए गए USA के खुफिया आकलन से पता चलता है कि चीन ईरान के संघर्ष में ज्यादा एक्टिव भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है. भले ही चीन एक बड़े युद्ध से बचना चाहता हो, लेकिन वह ईरान अमेरिका संघर्ष में अपनी सक्रियता बढ़ाना चाह रहा है. ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसियों ने ईरान को चीन के संभावित समर्थन की ओर इशारा करते हुए जानकारी इकट्ठा की है. हालांकि, अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह इंटेलिजेंस पक्की नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लड़ाई के दौरान अमेरिकी या इजरायली सेना के खिलाफ चीनी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है. इससे नतीजों के बारे में अनिश्चितता पर जोर दिया गया.
क्या कहती है रिपोर्ट
फिर भी अमेरिकी अधिकारी बड़े जियोपॉलिटिकल दाव को देखते हुए चीन के शामिल होने की संभावना को भी अहम मानते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, चीन फिलहाल बहुत सावधानी बरत रहा है. चीन के अधिकारी दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष हैं और किसी का पक्ष नहीं ले रहे. लेकिन असल में उनके बीच ईरान की मदद करने को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिससे उनकी स्थिति काफी उलझी हुई नजर आती है. रिपोर्ट में कुछ पूर्व अधिकारियों ने कहा कि ईरान मिसाइलों और ड्रोन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पार्ट्स के लिए चीन पर निर्भर है. हालांकि, बीजिंग यह तर्क दे सकता है कि ऐसे पार्ट्स का सिविलियन इस्तेमाल होता है.
होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही के सामान्य होने की उम्मीद काफी कम है. (फाइल फोटो/Reuters)
चीन का ईरान से गहरा संबंध
रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि चीन ने कुछ इंटेलिजेंस सपोर्ट भी दिया है, हालांकि इसकी जानकारी अभी कम है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरानी अधिकारी हफ्तों की लड़ाई के बाद एक नाजुक सीजफायर को स्थिर करने के लिए इस्लामाबाद में सीधी बातचीत कर रहे हैं. अमेरिकी अधिकारी इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि क्या कोई बाहरी सपोर्ट बातचीत पर असर डाल सकता है या जमीनी स्तर पर संतुलन बदल सकता है. विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग का तरीका सोच-समझकर किया गया कैलकुलेशन दिखाता है. चीन के ईरान के साथ गहरे आर्थिक संबंध हैं और वह उसका सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है, लेकिन उसके पास वैश्विक व्यापार में रुकावट डालने वाली बातों से बचने के लिए मजबूत फायदे भी हैं.
इमेज बचाने की कोशिश
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसाइल भेजने को लेकर चीन के अंदर चल रही बहस इन हितों के बीच तनाव को दिखाती है. साथ ही बीजिंग के पब्लिक रवैये ने संयम पर जोर दिया है. चीनी अधिकारियों ने एक न्यूट्रल प्लेयर के तौर पर अपनी इमेज बचाने की कोशिश की है, खासकर जब वे मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक और आर्थिक जुड़ाव बढ़ा रहे हैं.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





