कांग्रेस नेता के साथ मंच साझा करने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के पूर्व नेता जी सुधाकरन का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा कि उनकी मौजूदगी एलडीएफ के भीतर गहरी दरार का संकेत है।
सुधाकरन अंबलपुझा से यूडीएफ के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
गांधी ने कहा, “मंच पर एक वरिष्ठ वामपंथी नेता बैठे हैं। इसके पीछे कारण है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अचानक अपनी सोच बदल ली है। जो लोग वर्षों तक किसी राजनीतिक संगठन में रहते हैं, वे उसके मूल्यों को आत्मसात कर लेते हैं। वे अवसरवादिता के कारण यहां नहीं हैं, बल्कि इसलिए हैं क्योंकि एलडीएफ में मूल भावना बदल गई है।”
उन्होंने कहा, “एलडीएफ का मतलब है ‘वाम लोकतांत्रिक मोर्चा’, लेकिन अब साफ तौर पर उसमें कुछ भी ‘वामपंथी’ नहीं रह गया है। चुनाव के बाद स्थिति और भी बदतर हो जाएगाी।’’





