बिना वजह उदासी और चिंता? थायरॉइड हो सकता है कारण, जानें डिप्रेशन-एंग्जायटी का कनेक्शन


Last Updated:

Thyroid Problem and Mental Health: अगर लंबे समय तक थकान, उदासी या चिंता बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें. ये लक्षण थायरॉइड में गड़बड़ी से संबंधित हो सकते हैं. थायरॉइड हार्मोन दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं, ऐसे में इसमें गड़बड़ी सेडनेस और डिप्रेशन के रूप में समाने आ सकती हैं

ख़बरें फटाफट

Zoom

Thyroid Problem and Mental Health: थायरॉइड की समस्या सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग और भावनाओं पर भी असर डालती है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग थकान, मूड स्विंग या चिंता को आम बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कई बार इसके पीछे हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी होती है.

थायरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने होती है. यह शरीर में ऐसे हार्मोन बनाती है, जो मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर का तापमान और ऊर्जा को कंट्रोल करते हैं. ये हार्मोन दिमाग के काम करने और हमारे मूड को भी प्रभावित करते हैं. थायरॉइड की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा आम हैं. इसलिए महिलाओं में चिड़चिड़ापन आमतौर पर ज्यादा देखा जाता है. हालांकि ये बीमारी गंभीर परिणाम दे सकती है, लेकिन अच्छी बात ये है कि इसे लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में यदि आप मेंटल डिस्ट्रेस से गुजर रहे हैं, तो इसे इग्नोर न करें, और थायराइड चेक करवाएं.

थायरॉइड का दिमाग पर असर (Thyroid Mental Health Connection)
जब थायरॉइड सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखने लगता है. अगर थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते हैं, तो व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी और डिप्रेशन महसूस हो सकता है. ऐसे में काम करने का मन नहीं करता, सोचने की क्षमता धीमी हो जाती है और याददाश्त भी कमजोर पड़ सकती है.

डॉक्टरों के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं. ये केमिकल्स हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं. जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो बिना किसी स्पष्ट कारण के चिंता और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

थायरॉइड होने के कारण
थायरॉइड की समस्या के कई कारण हो सकते हैं. इसमें ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज प्रमुख हैं. इसके अलावा आयोडीन की कमी या अधिकता, ज्यादा तनाव, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद शरीर में होने वाले बदलाव भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है.

About the Author

authorimg

शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img