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Jamun vs Bel Health Benefits: गर्मियों की चिलचिलाती धूप और लू से बचने के लिए सिजनल फ्रूट्स खाना अच्छा माना जाता है. इन्हीं मौसमी फलों में से एक है बेल और दूसरा है जामुन. इन दोनों फलों को ही आयुर्वेद में मेडिसीन की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है. तो सवाल उठता है कि दोनों ही फलों में बेहतर कौन है और किन लोगों के लिए ये अधिक फायदेमंद साबित होता है. चलिए जानते हैं यहां.
आयुर्वेदिक ग्रंथों (Charaka Samhita & Sushruta Samhita) की मानें तो आयुर्वेद में बेल (Bilva) को ‘संग्राही’ और ‘दीपन’ माना गया है, जिसका अर्थ है पाचन अग्नि को बढ़ाना और पेट के विकारों को दूर करना. वहीं जामुन को ‘प्रमेह’ (डायबिटीज) की चिकित्सा में मुख्य औषधि बताया गया है. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के शोध के अनुसार जामुन में ‘एंथोसायनिन’ और ‘जम्बोलिन’ नामक ग्लाइकोसाइड होते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सीधे तौर पर मददगार हैं.

तो अगर अगर हम पाचन (Digestion) की बात करें, तो यहाँ बेल का कोई मुकाबला नहीं है. बेल को आयुर्वेद में पेट का ‘डॉक्टर’ कहा गया है. इसमें फाइबर और लैक्सेटिव गुण भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पुरानी से पुरानी कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या को जड़ से खत्म करने की ताकत रखते हैं. बेल का शरबत गर्मियों में पेट की अंदरूनी गर्मी को शांत करता है और आंतों की सफाई करने में रामबाण माना जाता है. जिन लोगों का पेट अक्सर खराब रहता है, उनके लिए बेल किसी वरदान से कम नहीं है.

वहीं दूसरी ओर, जब बात शुगर (Diabetes) कंट्रोल करने की आती है, तो जामुन ‘सुपरफूड’ के रूप में उभरता है. जामुन की गुठली से लेकर उसके गूदे तक में ‘जम्बोलिन’ और ‘जम्बोसिन’ नामक तत्व पाए जाते हैं, जो खून में शुगर के लेवल को बढ़ने नहीं देते. यह स्टार्च को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे शुगर के मरीजों को अचानक होने वाले ‘शुगर स्पाइक’ से राहत मिलती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए जामुन एक प्राकृतिक दवा की तरह काम करता है.
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जामुन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह हीमोग्लोबिन और स्किन के लिए कमाल का है. इसमें विटामिन-C और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, जो खून साफ करने और चेहरे पर चमक लाने में मदद करता है. इसके एस्ट्रिंजेंट (Astringent) गुणों के कारण यह मुहासों को रोकने में भी सहायक है. अगर आप गर्मियों में एक फ्रेश और ग्लोइंग स्किन चाहते हैं, साथ ही अपना ब्लड काउंट बढ़ाना चाहते हैं, तो जामुन को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं.

बेल के फायदों की बात करें तो यह केवल पेट तक सीमित नहीं है. यह लू और डिहाइड्रेशन से बचने का सबसे बेहतरीन नेचुरल तरीका है. बेल में मौजूद विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते हैं और गर्मी के कारण होने वाली थकान को मिनटों में दूर कर देते हैं. बेल का शरबत पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है, जो बाजार में मिलने वाले किसी भी आर्टिफिशियल एनर्जी ड्रिंक से कई गुना बेहतर और सुरक्षित है.

अब सवाल यह है कि किसे क्या खाना चाहिए? अगर आप डायबिटीज या प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं, तो जामुन आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. जामुन उन लोगों के लिए भी बेस्ट है जो दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से जूझ रहे हैं. वहीं, अगर आप पाचन तंत्र की कमजोरी, अल्सर, या बार-बार होने वाली एसिडिटी से परेशान हैं, तो बेल आपके लिए अनिवार्य है. बेल का फल उन लोगों को भी जरूर लेना चाहिए जो धूप में ज्यादा काम करते हैं और डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं.

लेकिन यहाँ सावधानी भी जरूरी है. बेल का सेवन उन लोगों को सीमित मात्रा में करना चाहिए जिन्हें अक्सर लूज मोशन की शिकायत रहती है, क्योंकि इसके लैक्सेटिव गुण समस्या बढ़ा सकते हैं. वहीं जामुन को कभी भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसे खाने के तुरंत बाद दूध पीना चाहिए. सही तरीके से और सही समय पर खाया गया फल ही शरीर को पूरा पोषण देता है, वरना यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है.

कहा जा सकता है कि जामुन और बेल दोनों ही अपनी जगह ‘किंग’ हैं. यह आपकी शारीरिक जरूरत पर निर्भर करता है कि आपको क्या चुनना है. अगर शुगर कंट्रोल प्राथमिकता है तो जामुन उठाइए, और अगर पेट को राहत देनी है तो बेल का शरबत पीजिए. बेहतर होगा कि आप इस सीजन में दोनों ही फलों का बारी-बारी से आनंद लें और अपनी सेहत को कुदरती तरीके से फिट रखें. (यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सिद्धांतों पर आधारित है. किसी भी गंभीर बीमारी जैसे क्रोनिक डायबिटीज या किडनी की समस्या की स्थिति में फल को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.)





