पृथ्वी से 560KM की ऊंचाई पर ऐसा क्या हुआ, एलन मस्क की स्टारलिंक ने उड़ाई दुनिया की नींद, नासा भी अलर्ट


Agency:एजेंसियां

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SpaceX Starlink Satellite: स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट ने दुनियाभर की धड़कन बढ़ा दी है. पृथ्वी से लगभग 560 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद स्टारलिंक सैटेलाइट 34343 में बड़ी खराबी दर्ज की गई. अब डर है कि यह सैटेलाइट क्षतिग्रस्त हो गया और इसका मलबा किसी भी वक्त धरती पर गिर सकता है.

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अंतरिक्ष में स्पेसएक्स के स्टारलिंक नेटवर्क को लेकर एक तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

दूर अंतरिक्ष में मौजूद स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट ने दुनियाभर की धड़कन बढ़ा दी है. कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके एक सैटेलाइट से संपर्क टूट गया है. स्टारलिंक के अनुसार, यह समस्या पृथ्वी से लगभग 560 किलोमीटर की ऊंचाई पर सामने आई, जब सैटेलाइट 34343 में ऑन-ऑर्बिट एनॉमली (तकनीकी खराबी) दर्ज की गई. इसके बाद कंपनी और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने तुरंत स्थिति की निगरानी शुरू कर दी.

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को जारी अपडेट में साफ किया कि इस घटना से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन, वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों या नासा के आर्टेमिस II मिशन को कोई खतरा नहीं है. यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल को लॉन्च होने वाला है, जो दशकों बाद चंद्रमा के लिए नासा का पहला मानवयुक्त मिशन होगा.

आर्टेमिस II मिशन के तहत रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन को चंद्रमा की परिक्रमा पर भेजा जाएगा. यह मिशन करीब 10 दिन का होगा और अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाकर वापस पृथ्वी पर लाएगा.

स्टारलिंक सैटेलाइट के मलबे पर नजर

कंपनी ने बताया कि प्रभावित सैटेलाइट पर नजर रखी जा रही है और उससे जुड़े किसी संभावित मलबे को भी ट्रैक किया जा रहा है. इसके लिए नासा और यूएस स्पेस फोर्स के साथ समन्वय किया जा रहा है.स्टारलिंक ने यह भी कहा कि वह स्पेसएक्स के साथ मिलकर इस गड़बड़ी के मूल कारण का पता लगाने में जुटी है और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएंगे.

इस बीच, कंपनी ने यह भी साफ किया कि इस घटना का असर दूसरे अंतरिक्ष अभियानों पर नहीं पड़ा है. सोमवार सुबह लॉन्च हुए फाल्कन-9 ट्रांसपोर्टर-16 मिशन पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा. यह मिशन स्टारलिंक सैटेलाइट्स के ऊपर और नीचे अलग-अलग ऊंचाइयों पर पेलोड तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया था.

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब स्पेसएक्स अपने संभावित आईपीओ की तैयारियों में जुटा है, जिसकी अनुमानित वैल्यू 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है. ऐसे में यह तकनीकी गड़बड़ी कंपनी के लिए संवेदनशील समय पर सामने आई है, हालांकि फिलहाल इसे बड़े खतरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें



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