वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शरण लेने पर लगा ब्लैंकेट बैन हटा दिया है, लेकिन 39 देशों के लिए पाबंदी बरकरार है. भारत के पड़ोसियों में अफगानिस्तान और म्यांमार इस हाई-रिस्क लिस्ट में शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका में एंट्री नहीं मिलेगी. पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अन्य पड़ोसी इस प्रतिबंध से फिलहाल बाहर हैं. सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार अब उन अधिकांश देशों के नागरिक फिर से शरण के लिए आवेदन कर सकेंगे जो आधिकारिक ट्रैवल बैन की सूची में शामिल नहीं हैं. गौरतलब है कि नवंबर 2025 में वाशिंगटन डीसी में दो नेशनल गार्ड सदस्यों की हत्या के बाद इस प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी. इस हमले का आरोपी रहमनुल्लाह लकानवाल एक अफगान शरणार्थी था जिसे 2021 में काबुल से निकाला गया था. प्रशासन ने अब साफ किया है कि अफगानिस्तान, ईरान और सीरिया समेत 39 हाई-रिस्क देशों के नागरिकों के लिए यह पाबंदी फिलहाल जारी रहेगी.
सुरक्षा और राजनीति का संतुलन
प्रशासन का यह कदम अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है. USCIS (U.S. Citizenship and Immigration Services) से संचालित स्वैच्छिक शरण प्रक्रिया को फिर से शुरू करना यह दर्शाता है कि सरकार सभी देशों को एक ही चश्मे से नहीं देख रही है.
मुख्य प्वाइंट
· सुरक्षा प्रोटोकॉल: केवल उन्हीं देशों को राहत दी गई है जिन्हें अमेरिका कम जोखिम वाला मानता है. 39 प्रतिबंधित देशों की सूची यह संकेत देती है कि ट्रंप प्रशासन अभी भी उन क्षेत्रों को लेकर बेहद सतर्क है जहां आतंकी गतिविधियों या राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है.
· राजनीतिक दबाव: नेशनल गार्ड के जवानों की हत्या के बाद उपजा जन-आक्रोश शांत करने के लिए ब्लैंकेट बैन लगाया गया था लेकिन वैश्विक दबाव और कानूनी पेचीदगियों के कारण अब इसे टारगेटेड बैन में बदल दिया गया है.
· इमिग्रेशन कोर्ट पर असर: USCIS की रोक हटने से अब इमिग्रेशन अदालतों पर बोझ कम होगा, क्योंकि अब मामले वापस सामान्य प्रशासनिक चैनलों (Asylum Officers) के पास जा सकेंगे.
| अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित 39 ‘हाई-रिस्क’ देशों की सूची | ||
|---|---|---|
| क्षेत्र | देशों के नाम | |
| एशिया और मध्य पूर्व | अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया, यमन, बर्मा (म्यांमार), लाओस, फिलिस्तीनी प्राधिकरण यात्रा दस्तावेज. | |
| अफ्रीका (मुख्य) | लीबिया, सोमालिया, सूडान, दक्षिण सूडान, चाड, इरिट्रिया, माली, नाइजर, बुर्किना फासो, सिएरा लियोन, कांगो गणराज्य. | |
| अफ्रीका (अतिरिक्त) | अंगोला, बेनिन, बुरुंडी, कोटे डी आइवर, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंजानिया, टोगो, जाम्बिया, जिम्बाब्वे. | |
| अमेरिका और कैरिबियन | वेनेजुएला, क्यूबा, हैती, डोमिनिका, एंटीगुआ और बारबुडा. | |
| ओशिनिया | टोंगा, इक्वेटोरियल गिनी. | |
सवाल-जवाब
क्या यह फैसला उन लोगों पर लागू होगा जो पहले से अमेरिका में हैं?
हां, यह फैसला मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो स्वेच्छा से USCIS के पास शरण की अर्जी लगाते हैं. जो लोग निर्वासन (Deportation) से बचने के लिए कोर्ट में केस लड़ रहे हैं, उनके लिए प्रक्रिया अलग (Defensive) बनी रहेगी.
‘हाई-रिस्क’ देशों की सूची में कौन-कौन से प्रमुख नाम शामिल हैं?
इस सूची में अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया, यमन, लीबिया, सोमालिया, हैती और वेनेजुएला जैसे 39 देश शामिल हैं. इन देशों के नागरिकों की फाइलों पर फिलहाल कोई काम (Adjudication) नहीं होगा.





