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Hyderabad Retro Cafes: हैदराबाद में अब 90 के दशक की यादों को फिर से जीने का मौका मिल रहा है. शहर के कुछ खास रेट्रो थीम कैफे पुराने दौर की झलक पेश कर रहे हैं, जहां पुराने गाने, विंटेज डेकोर और क्लासिक मेन्यू आपको बचपन की यादों में ले जाते हैं. ये कैफे न सिर्फ खाने-पीने के लिए बल्कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें लेने के लिए भी बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं. यहां का माहौल आपको स्कूल-कॉलेज के दिनों की याद दिलाएगा और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का बेहतरीन विकल्प साबित होगा.
आज के डिजिटल शोर और इंस्टेंट कल्चर के बीच 90 के दशक की वो सादगी कहीं खो गई है. अगर आप भी उस दौर की कशिश, कैसेट टेप के संगीत और बिना किसी दिखावे वाली गपशप को फिर से जीना चाहते हैं तो हैदराबाद के ये पांच ठिकाने आपके लिए किसी टाइम मशीन से कम नहीं हैं.

डेक्कन हाउस कैफे जुबली हिल्सजुबली हिल्स की हलचल के बीच यह कैफे एक शांत टापू की तरह है. यहाँ की लकड़ी की सजावट पुराने ज़माने के गिंघम चेक वाले टेबल कवर और हल्की पीली रोशनी आपको 90 के दशक के किसी मध्यमवर्गीय घर के ड्राइंग रूम की याद दिलाएगी. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो किताब पढ़ते हुए या दोस्तों के साथ घंटों बिना किसी शोर के बैठना चाहते हैं. यहाँ की कड़क चाय के साथ मसाला मैगी और मिर्ची भज्जी का कॉम्बिनेशन आपको स्कूल की छुट्टियों वाले स्वाद की याद दिला देगा.

मज़ूरी कैफ़े बंजारा हिल्स 2026 के सबसे चर्चित कैफे में से एक मज़ूरी कैफ़े 80 और 90 के दशक के ईरानी कैफे कल्चर को आधुनिक टच के साथ पेश करता है. ग्रामोफ़ोन, दीवार पर लगे एंटीक लैंप और बिस्किट के पुराने कांच के जार यहां के माहौल को जादुई बनाते हैं. यहां की लकड़ी की खिड़कियां पुरानी हैदराबादी गलियों का अहसास कराती हैं. यहां के दिलपसंद, टूटी-फ्रूटी बिस्किट और लुखमी के साथ ईरानी चाय का लुत्फ़ उठाना न भूलें.
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रॉयज़ पिज़्ज़ेरिया सिकंदराबादयह जगह 90 के दशक के पॉप कल्चर का जश्न मनाती है. अगर आप मोंटाना या आर्केड गेम्स के शौकीन रहे हैं तो यहाँ के नियॉन साइनबोर्ड और कैसेट टेप की दीवारें आपको दीवाना बना देंगी. यहाँ एक डेडिकेटेड कराओके कॉर्नर भी है जहाँ आप 90 के दशक के इंडीपॉप गाने गा सकते हैं. यहाँ के पिज़्ज़ा का बेस काफी क्लासिक रखा गया है जिसे कोल्ड कॉफी या पुराने स्टाइल के मिल्कशेक के साथ ट्राई करें.

90’s ऑथेंटिक किचन कुकाटपल्ली यह रेस्टोरेंट नहीं बल्कि 90 के दशक के भारतीय बचपन का एक म्यूजियम है. यहाँ की दीवारों पर स्वाट कैट्स, डेक्सटर और शक्तिमान जैसे किरदारों के पोस्टर लगे हैं. यहाँ भोजन परोसने का तरीका पूरी तरह पारंपरिक है, जो आपको उस समय की याद दिलाएगा जब टिफिन खोलना दिन का सबसे बड़ा इवेंट होता था. इनका सिग्नेचर तमालपाकू पनीर यानी पान के पत्ते वाला पनीर और बचपन की याद ताज़ा करने वाला जीरा लेमन गोली सोडा.

ओल्ड टाउन 80s कैफे टारनाकायह स्थान उस दौर की सादगी को समर्पित है जब इंटरनेट नहीं था और लोग घंटों बिना किसी काम के बस साथ बैठे रहते थे. यहां कोई बनावटी सजावट नहीं है बस एक ऐसा माहौल है जहां आप घड़ी देखना भूल जाते हैं. यह कैफे अपने बजट-फ्रेंडली मेन्यू के कारण छात्रों और पुराने दोस्तों के ग्रुप के बीच काफी लोकप्रिय है हालांकि यह कॉन्टिनेंटल खाने के लिए जाना जाता है लेकिन इनके इनोवेटिव मॉकटेल और क्रिस्पी स्नैक्स बातचीत को और मजेदार बना देते हैं.





