Hormuz Crisis | Hormuz blockade | LPG Shortage | होर्मुज पर बढ़ गई आफत, अमेरिका ने कस दी नकेल, 89 जहाज का बदल दिया रूट, उधर ट्रंप ने की सीक्रेट मीटिंग


Agency:एजेंसियां

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Hormuz Crisis US Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात और गंभीर हो गए हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को और सख्त कर दिया है. इसके साथ ही उसने 89 कमर्शियल जहाजों का रूट जबरन बदल दिया है. उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को कुछ समय के लिए टालने की घोषणा करने के तुरंत बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की.

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होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को और सख्त कर दिया है.

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने भारत सहित तमाम देशों को तेल-गैस के संकट में धकेल दिया है. पूरी दुनिया जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और हालात वापस से सामान्य होने की उम्मीद लगाए बैठी है. हालांकि इसके उलट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात और गंभीर हो गए हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को और सख्त कर दिया है. इसके साथ ही उसने 89 कमर्शियल जहाजों का रूट जबरन बदल दिया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले व्यापारिक यातायात को पूरी तरह रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है. CENTCOM ने अपने बयान में कहा, ‘अमेरिकी नाकाबंदी को पूरी तरह लागू किया जा रहा है. ईरानी बंदरगाहों से होने वाले व्यापारिक आवागमन को रोका जा रहा है. अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 89 वाणिज्यिक जहाजों को दूसरे रास्तों पर भेजा गया है.’ अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि चार जहाजों को निष्क्रिय भी किया गया है.

होर्मुज की नाकेबंदी ने बढ़ाई टेंशन

अमेरिका की इस कार्रवाई का असर दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर साफ दिखाई देने लगा है. यह समुद्री रास्ता खाड़ी देशों को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का तेल एवं गैस कारोबार इसी मार्ग से गुजरता है. ऐसे में जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

दरअसल 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ हमला शुरू किया था. इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों पर जवाबी हमले किए. ईरान ने फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर ही नाकेबंदी लगा दी. ईरान के इस कदम से दुनियाभर में तेल-गैस का संकट गहरा गया, क्योंकि वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रूट से होकर गुजरता है.

हालांकि पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन स्थायी समझौता नहीं हो सका. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, लेकिन ईरान के खिलाफ अपनी दोहरी समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी, जो अब तक जारी है.

उधर टाला हमला, फिर करने लगे मीटिंग

इसी बीच अमेरिकी मीडिया वेबसाइट Axios की एक रिपोर्ट ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को कुछ समय के लिए टालने की घोषणा करने के तुरंत बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की.

Axios की रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सोमवार शाम ट्रंप ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की. इस मीटिंग में सैन्य रणनीतियों और हमले के विकल्पों को लेकर विस्तृत ब्रीफिंग भी दी गई.

ट्रंप प्रशासन की इस रणनीति को लेकर माना जा रहा है कि अमेरिका एक तरफ सीधे बड़े युद्ध से बचने का संदेश देना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर कार्रवाई जारी रखे हुए है.

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. अगर समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित होती है तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

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Saad Omar

साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें



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