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Benefits of poisonous onion: बाजार में वैसे तो कई औषधियां मौजूद हैं, लेकिन सीतामढ़ी में इन दिनों एक खास ‘जंगली प्याज’ चर्चा का विषय बनी हुई है. हाथी की सूंड जैसी दिखने वाली यह वनस्पति दिखने में जितनी अजीब है, आयुर्वेद में उतनी ही गुणकारी मानी जाती है. यह विशेष रूप से जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण है.
यह अनोखी प्याज सामान्य खेतों में नहीं, बल्कि नेपाल के दुर्गम पहाड़ी इलाकों और ऊंचे पत्थरों पर उगती है. चित्रकूट के रहने वाले विक्रेता राजे सिंह इसे कठिन रास्तों से खोजकर लाते हैं. इसकी दुर्लभता और औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसकी कीमत ₹800 प्रति किलो तक पहुंच जाती है.

राजे सिंह के अनुसार, इस प्याज को सीधे खाया नहीं जा सकता क्योंकि यह स्वभाव से जहरीली होती है. इसका उपयोग केवल तेल बनाने और बाहरी लेप के रूप में किया जाता है. स्थानीय लोग इसे पुराने से पुराने दर्द और सूजन को खत्म करने वाली एक जादुई औषधि मानते हैं.

इस रामबाण तेल को बनाने की प्रक्रिया भी बेहद खास है. जंगली प्याज को छोटे टुकड़ों में काटकर उसे सरसों के तेल में मेथी, लहसुन और कुछ अन्य गुप्त आयुर्वेदिक तत्वों के साथ मिलाकर तब तक उबाला जाता है जब तक कि प्याज का पूरा अर्क तेल में न मिल जाए. इस तेल का इस्तेमाल गठिया, मांसपेशियों में खिंचाव और पुराने जोड़ों के दर्द में किया जाता है.
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विक्रेता का दावा है कि अगर इस तेल से प्रभावित हिस्से पर रोजाना 10 मिनट मालिश की जाए, तो मात्र दो दिनों के भीतर रोगी को दर्द से बड़ी राहत मिलने लगती है. राजे सिंह बताते हैं कि यह तेल बनाना उनका खानदानी पेशा है और वे वर्षों से इसे लोगों तक पहुंचा रहे हैं. पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में सदियों से इस जंगली प्याज का इस्तेमाल लोक परंपरा का हिस्सा रहा है, जिसे अब आधुनिक दौर में भी सराहा जा रहा है.

यह औषधि प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करती है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के (बाहरी उपयोग पर) शरीर को राहत देती है. सीतामढ़ी में लोग इसे बड़े भरोसे के साथ खरीद रहे हैं, जिससे यह प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति और आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों का एक सेतु बन गई है.





