3,558 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
दिनांक 30 सितंबर 2026, डोंगरगढ़/राजनांदगांव। किसानों की विभिन्न समस्याओं एवं लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को कृषि उपज मंडी, राजनांदगांव में किसानों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में किसान विष्णु लोधी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों की समस्याओं, धान के उचित मूल्य, लंबित अंतर राशि तथा राजीव गांधी किसान न्याय योजना की बकाया राशि सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में किसानों ने कहा कि खेती की बढ़ती लागत और कृषि से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों के बीच किसानों को उनकी उपज का उचित एवं सुनिश्चित मूल्य मिलना बेहद जरूरी है। किसानों के अधिकारों और उनकी लंबित मांगों को लेकर 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर के अंबेडकर चौक में दोपहर 2 बजे ‘दाम सत्याग्रह’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।
किसानों की पांच प्रमुख मांगें
- वर्ष 2026-27 में धान की खरीदी ₹3,358 प्रति क्विंटल की दर से की जाए। समर्थन मूल्य में वृद्धि की कुल राशि ₹258 प्रति क्विंटल (₹117 + ₹69 + ₹72) का लाभ किसानों को देते हुए धान का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए।
- वर्ष 2024-25 के धान की अंतर राशि ₹117 प्रति क्विंटल की दर से किसानों को तत्काल भुगतान की जाए।
- वर्ष 2025-26 के धान की लंबित अंतर राशि ₹186 प्रति क्विंटल (₹117 + ₹69) की दर से किसानों के खातों में तत्काल जमा की जाए।
- राजीव गांधी किसान न्याय योजना की बकाया चौथी किस्त की राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।
- किसानों को उनकी उपज का लाभकारी एवं सुनिश्चित मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाया जाए।
किसानों की मेहनत का पूरा दाम मिलना जरूरी — विष्णु लोधी
विष्णु लोधी ने कहा कि धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अर्थतंत्र की रीढ़ है। किसान पूरे वर्ष मेहनत कर अन्न पैदा करता है, लेकिन उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद यदि उसकी उपज का पूरा और सुनिश्चित दाम नहीं मिलता, तो इसका सीधा प्रभाव किसान के परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि किसानों की मांग किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के हित की मांग नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्नदाता के अधिकार, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, लंबित अंतर राशि और किसान न्याय योजना की बकाया राशि मिलना उनकी जायज मांग है। सरकार को किसानों की आवाज सुनते हुए इन मांगों पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए।
विष्णु लोधी ने कहा कि ‘दाम सत्याग्रह’ किसानों की मेहनत के सम्मान और उनकी उपज के उचित मूल्य की लड़ाई है। किसान केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मेहनत का उचित और सुनिश्चित प्रतिफल चाहता है। किसानों की इन मांगों को लेकर उनकी आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से मजबूती के साथ सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
किसान की मेहनत का पूरा दाम—किसान का अधिकार।
किसान का हक, किसान की आवाज—दाम सत्याग्रह।




