नोकिया ने चीन को क्यों कहा टाटा बाय-बाय? 20 साल बाद बंद हो रहे ऑफिस, 1600 लोगों की जाएगी नौकरी


करीब 20 साल तक चीन में टेलीकॉम का बड़ा काम करने के बाद नोकिया अब वहां से लगभग पूरी तरह निकलने जा रहा है. कंपनी 2026 के आखिर तक अपने ज्यादातर दफ्तर और सेंटर बंद कर देगी. यह फैसला सिर्फ बिजनेस का नहीं, बल्कि बड़ी राजनीति और सुरक्षा की लड़ाई का नतीजा है.

नोकिया हैंग्जोउ में अपना बड़ा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर बंद कर रहा है. इससे करीब 1600 लोगों की नौकरी जाएगी. बीजिंग, चेंगदू, क़िंगदाओ और शंघाई के दफ्तर भी बंद होंगे. अब काम सिर्फ नोकिया शंघाई बेल के जरिए चलेगा, जिसे कंपनी ने 2025 के आखिर में पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया था. आगे सिर्फ पुराने ग्राहकों को सर्विस दी जाएगी, नया लोकल सामान बनाने का काम बंद हो जाएगा.

यह सब 2020-21 से शुरू हुआ. फिनलैंड और स्वीडन ने चीनी कंपनियों हुआवेई और जेडटीई को अपने 5G नेटवर्क से बाहर कर दिया. सुरक्षा का खतरा बताकर यह कदम उठाया गया. अमेरिका ने पहले ही ऐसा कर रखा था और यूरोप को भी यही सलाह दी थी. यूरोप में सब एक जैसे नहीं रहे. ब्रिटेन ने बाद में पूरा बैन लगा दिया, जर्मनी ने सख्त जांच शुरू की, लेकिन हंगरी ने चीन का साथ दिया.

चीन ने जवाब में नोकिया और एरिक्सन पर सख्ती बढ़ा दी. 2022 से यूरोपीय कंपनियों के ठेकों पर अजीब सुरक्षा जांच शुरू हो गई. नोकिया को पता ही नहीं चलता था कि जांच के क्या नियम हैं. नतीजा यह हुआ कि चीन से नोकिया की कमाई 2018 में 2.5 अरब डॉलर से घटकर पिछले साल सिर्फ 1.06 अरब डॉलर रह गई. कर्मचारियों की संख्या भी लगभग आधी हो गई. एरिक्सन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

1600 लोगों की जा सकती है नौकरी

चीन में कुछ लोग इस फैसले से परेशान हैं. एक रिपोर्ट में लिखा गया कि नोकिया के जाने से खुशी मनाने वाली बात नहीं है. 1600 परिवार प्रभावित होंगे. हुआवेई या जेडटीई इन लोगों को नौकरी दें, इसकी भी उम्मीद कम है क्योंकि वहां भी भर्ती सख्त हो गई है. कुछ का मानना है कि इससे चीन सिर्फ अपनी कंपनियों पर निर्भर हो जाएगा और दुनिया के टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड टूट सकते हैं.

चीनी सरकारी मीडिया ने नोकिया पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की राजनीति और नोकिया की अपनी कमजोरी दोनों वजह हैं. नोकिया के सीईओ ने यूरोप से कहा था कि चीनी कंपनियों को हाई-रिस्क मानकर बाहर रखो, जबकि चीन में नोकिया की मार्केट शेयर जानबूझकर 3 प्रतिशत से नीचे रखी गई.

नोकिया अब अपना फोकस पश्चिमी देशों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लगा रहा है. पिछले साल अमेरिकी कंपनी एनवीडिया ने नोकिया में 1 अरब डॉलर लगाकर 2.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली. दोनों मिलकर एआई-आरएएन टेक्नोलॉजी बना रहे हैं, जो 6G की रेस में आगे ले जा सकती है.

2026 में टी-मोबाइल के साथ इसका ट्रायल होना है. नोकिया ने भारत के चेन्नई लैब को बड़ा बनाया है और अमेरिका के पेन्सिलवेनिया में 30 मिलियन डॉलर लगाकर चिप्स बनाने का काम तेज किया है.

किसपर होगा असर?
इसका बड़ा असर यह हो सकता है कि दुनिया के टेलीकॉम स्टैंडर्ड टुकड़ों में बंट जाएं. अगर चीन नोकिया और एरिक्सन को अविश्वसनीय घोषित कर दे तो अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में भी मुश्किल हो सकती है, जहां हुआवेई पहले से मजबूत है. एरिक्सन अभी चीन में बना हुआ है, लेकिन नोकिया के इस फैसले से उस पर भी दबाव बढ़ गया है.

सीधे शब्दों में कहें तो नोकिया ने चीन को टाटा बाय-बाय इसलिए कहा क्योंकि दोनों तरफ सुरक्षा और राजनीति की दीवार खड़ी हो गई. कमाई गिर गई, कामकाज मुश्किल हो गया. अब कंपनी पश्चिम और एआई की तरफ अपना भविष्य देख रही है. 20 साल का रिश्ता खत्म होने जा रहा है, और इसका असर पूरी दुनिया के टेलीकॉम बाजार पर पड़ सकता है.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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