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Women health tips : कानपुर में सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव से उनका हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. लोकल 18 से कानपुर की चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी बताती हैं कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
कानपुर. कानपुर के GSVM Medical College और LLR अस्पताल में सामने आए मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. अस्पताल की ओपीडी और रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हाइपरएंड्रोजेनिज्म’ कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव में रहना महिलाओं के शरीर का हार्मोन बैलेंस बिगाड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. कई महिलाओं में चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उगना, बाल झड़ना, मुंहासे बढ़ना और पीरियड्स गड़बड़ होना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं.
आगे चलकर ये दिक्कत
कानपुर के एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जब ऐसे मामले पहुंचे तो डॉक्टर भी एक पल के लिए हैरान रह गए. जांच में महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन सामान्य से ज्यादा मिला. विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि पहले इस बीमारी को पीसीओएस कहा जाता था, लेकिन अब इसे पीएमओएस यानी “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम” के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे माहवारी अनियमित होने लगती है और आगे चलकर गर्भधारण में भी परेशानी आती है. कई मामलों में बांझपन जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ रही है.
मोटापा से कैंसर तक की दिक्कत
डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोन गड़बड़ी केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं रहती. शरीर में एस्ट्रोजन और इंसुलिन का स्तर बढ़ने से डायबिटीज, मोटापा, बच्चेदानी का कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार तनाव, प्रदूषण और केमिकल्सयुक्त खानपान इस बीमारी की बड़ी वजह बन चुके हैं. महिलाओं को नियमित व्यायाम करने, वजन नियंत्रित रखने, संतुलित भोजन अपनाने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी है.
दवाओं से ज्यादा जरूरी ये चीज
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवाओं से इस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता. समय पर सोना, रोजाना व्यायाम करना, जंक फूड से दूरी बनाना और मानसिक तनाव कम करना ही सबसे बड़ा बचाव है. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर समय रहते महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल सुधार लें तो इस बढ़ती समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें





