Last Updated:
Who is Judge Leo Sorokin: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में अपने ही फैसलों पर कोर्ट से मात खानी पड़ रही है. एक बार फिर उनके एच1 बी वीजा पर मॉनिटरी पेनल्टी के फैसले को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इससे ट्रंप प्रशासन को जहां झटका लगा है, वहीं टेक कंपनियां इससे खुश नजर आ रही हैं.
कौन हैं जज लियो सोरोकिन, जिसने दिया ट्रंप को झटका.
Donald Trump Another Shock by Court: अमेरिका के एक फेडरल जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके लगाए गए H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (लगभग 85 लाख रुपये) के नए शुल्क को रद्द कर दिया है. अदालत ने इसे असंवैधानिक टैक्स बताया और कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को ऐसा शुल्क लगाने का कोई अधिकार नहीं दिया है. यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने सोमवार को बोस्टन में यह फैसला सुनाया, जिसके बाद से वो सुर्खियों में आ गए. यह मुकदमा 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर किया गया था.
जज सोरोकिन ने इस मामले पर कहा कि इस शुल्क का स्वरूप और उसका इस्तेमाल साफ तौर पर दिखाता है कि यह टैक्स है, भले ही इसे कुछ और नाम दिया गया हो. उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप को इमीग्रेशन लॉ के तहत भी टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है. हालांकि इस पर ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह फीस नहीं, बल्कि विदेशी नागरिकों के प्रवेश को सीमित करने के लिए लगाया गया मॉनेटरी पेनल्टी है, पर जज ने इसे खारिज कर दिया.
कौन हैं जज लियो सोरोकिन?
- 64 साल के डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन कनेक्टिकट से आते हैं. वे यहूदी परिवार से हैं और रूसी मूल के हैं. न्यायपालिका में उनकी छवि एक प्रगतिशील और मानवीय न्यायमूर्ति की है, जो अक्सर सरकारी नीतियों की संवैधानिक वैधता की जांच करते हैं. वे अमेरिका में सम्मानित नाम हैं और मैसाच्युसेट्स की बोस्टन कोर्ट में कार्यरत हैं.
- लियो सोरोकिन ने 1983 में येल यूनिवर्सिटी से BA की डिग्री ली और इसके बाद 1991 में कोलंबिया लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने मैसाचुसेट्स अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल के रूप में काम किया. 1997 से 2005 तक वे फेडरल पब्लिक डिफेंडर रहे, जहां उन्होंने आपराधिक मामलों में गरीब आरोपियों का बचाव किया. वे बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में एडजंक्ट प्रोफेसर भी रह चुके हैं.
- 2005 में उन्हें यूएस मैजिस्ट्रेट जज नियुक्त किया गया और 2012-14 तक वे चीफ मैजिस्ट्रेट जज रहे. 2014 में राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने उन्हें यूएस डिस्ट्रिक्ट जज बनाया गया. सीनेट ने उन्हें सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी.
- जज लियो सोरोकिन हाल ही में सुर्खियों में आए जब उन्होंने ट्रंप प्रशासन के एक बड़े फैसले को रद्द कर दिया. उन्होंने H-1B वीजा फीस पर लगाए गए $100,000 के अतिरिक्त शुल्क को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा प्रक्रिया को सख्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें बेहतर वेतन और हाई स्किल वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव भी शामिल है. इस 1 लाख डॉलर फीस को लेकर पहले भी कई मुकदमे दायर किए जा चुके हैं. इसे ट्रंप प्रशासन एंट्री के लिए मॉनिटरी पेनल्टी नाम दे रहा है लेकिन जज लियो सोरोकिन ने इसे खारिज कर दिया है. यह फैसला टेक कंपनियों और हाई-स्किल्ड विदेशी कामगारों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक और कानूनी झटका है.
About the Author
News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें




