वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ नया डिप्लोमैटिक एग्रीमेंट ईरान की टूट चुकी इकोनॉमी के लिए गेमचेंजर साबित होने वाला है. ट्रंप प्रशासन के पूर्व एनर्जी सेक्रेटरी डैन ब्रूइलेट ने CNN को दिए इंटरव्यू में यह दावा किया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते 14 पॉइंट के एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर साइन किए हैं. यह समझौता ईरान के लिए एक लाइफलाइन की तरह आया है. इससे ईरान को अपना ऑयल और फ्यूल बेचने की तुरंत इजाजत मिल जाएगी. डैन ब्रूइलेट का मानना है कि यह डील ईरान के लिए बेहद मददगार साबित होगी. अमेरिका ने पहले ईरान की जो आर्थिक नाकेबंदी की थी वह उसे समझौते की टेबल पर लाने में बहुत कामयाब रही थी. ईरान में इस समय इन्फ्लेशन 50 परसेंट से ऊपर जा चुका है और बेरोजगारी चरम पर है. बुनियादी चीजों की भारी किल्लत के बीच यह डील ईरान को संकट से उबार सकती है.
क्या ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर अचानक बहुत ज्यादा उदार हो गया है?
इस नए एग्रीमेंट को लेकर अमेरिका में दोनों पार्टियों के बीच भारी विरोध शुरू हो गया है. कई नेताओं का मानना है कि यह समझौता ईरान को बहुत ज्यादा सपोर्ट दे रही है.
- पूर्व वाइस प्रेसिडेंट माइक पेंस ने कहा है कि यह समझौता ‘घुटने टेकने जैसा’ है.
- रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी ने इसे ‘दशकों की सबसे बड़ी फॉरेन पॉलिसी की भूल’ करार दिया है.
- डैन ब्रूइलेट ने भी चिंता जताई है कि अमेरिका ईरान के प्रति कुछ ज्यादा ही दयालु हो गया है. ईरान को बिना किसी शर्त के तुरंत तेल बेचने का अधिकार दे दिया गया है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक तेल बेचने से ईरान को हर साल 60 अरब डॉलर की भारी कमाई हो सकती है. इतिहास गवाह है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल अमेरिका विरोधी संगठनों की फंडिंग के लिए करता रहा है. अगर ईरान दोबारा आतंकियों की मदद शुरू करता है तो यह दुनिया के लिए बड़ा खतरा होगा.
अमेरिका का ऑयल स्टॉक खत्म होने के पीछे का सच क्या है?
डैन ब्रूइलेट का शक है कि अमेरिका का घटता हुआ ऑयल रिजर्व इस डील की सबसे बड़ी वजह है. अमेरिका का इमरजेंसी और कमर्शियल पेट्रोल स्टॉक इस समय डेंजर जोन में पहुंच चुका है. ओक्लाहोमा के कुशिंग हब में तेल का स्टॉक न्यूनतम स्तर पर आ गया है. ट्रंप ने खुद चेतावनी दी है कि अगर युद्ध जारी रहता तो 1929 जैसी बड़ी आर्थिक मंदी आ जाती.
अमेरिका के पास सिर्फ चार हफ्तों का रिजर्व बचा हुआ था. तेल खत्म होने की स्थिति में पूरे देश में अराजकता फैल सकती थी. इसी प्रेशर पॉइंट की वजह से अमेरिकी अधिकारियों को जल्दबाजी में यह डील करनी पड़ी है. अब अमेरिकी सरकार को इस स्टॉक को वापस तेजी से भरने की जरूरत है. तेल की कमी ने सुपरपावर अमेरिका को झुकने पर मजबूर कर दिया है.
ईरान के पलट जाने पर जेडी वेंस ने क्या बैकअप प्लान बनाया है?
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि यह पूरा फ्रेमवर्क ईरान के बर्ताव पर निर्भर करता है. अगर ईरान बातचीत में सहयोग नहीं करेगा तो तेल बेचने की छूट तुरंत वापस ले ली जाएगी. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने सख्त लहजे में कहा है कि ईरान का व्यवहार जितना अच्छा होगा उसे उतनी ही आर्थिक राहत मिलेगी. अगर ईरान ने अपना रवैया बदला तो हम इस राहत को तुरंत बंद कर देंगे.
ब्रूइलेट का मानना है कि अमेरिका को ईरान के फंड रिलीज करने से पहले उसके काम को देखना चाहिए था. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वह इस समय सरकार से बाहर हैं और केवल बाहर से ही पूरे हालात को देख रहे हैं. अमेरिका अब पूरी तरह इस बात पर नजर रखेगा कि ईरान इस नए पैसे का इस्तेमाल कहां करता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिकी इंटेलिजेंस ने क्या खुलासा किया है?
अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने हाल ही में एक बेहद डरावनी रिपोर्ट दी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक ईरान जब चाहे तब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर सकता है. यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया की तेल सप्लाई के लिए सबसे खास माना जाता है. ब्रूइलेट ने उम्मीद जताई है कि ईरान इस रास्ते को बंद करने की कोशिश दोबारा नहीं करेगा.
हालांकि वह यह भी मानते हैं कि ईरान के पास ऐसा करने की पूरी ताकत है क्योंकि यह इलाका उसके अपने घर जैसा है. अगर ईरान दोबारा मिडिल ईस्ट में अशांति फैलाता है तो अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी. इस रूट के बंद होने से पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे. इसी डर से अमेरिका ने फिलहाल ईरान को खुश करने की नीति अपनाई है.




