आजकल स्मार्टफोन, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर IP67, IP68 और IP69 जैसी रेटिंग्स लिखी होती हैं. बहुत से लोग इन्हें देखकर समझ नहीं पाते कि इनका असली मतलब क्या है. अगर आप नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन IP रेटिंग्स को समझना काफी जरूरी है.
IP का पूरा नाम Ingress Protection है. यह एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसे International Electrotechnical Commission (IEC) ने तय किया है. यह बताता है कि कोई डिवाइस धूल और पानी से कितनी अच्छी तरह सुरक्षित है.
IP रेटिंग में आमतौर पर दो अंक होते हैं. पहला अंक धूल से सुरक्षा को दिखाता है, जो 0 से 6 तक होता है. अगर किसी डिवाइस की रेटिंग 6 है, तो इसका मतलब है कि वह पूरी तरह डस्ट-टाइट यानी धूल से सुरक्षित है.
दूसरा अंक पानी से सुरक्षा को दिखाता है, जो 0 से 9 तक होता है. जितना बड़ा अंक होगा, उतनी बेहतर पानी से सुरक्षा मिलेगी.
अब बात करें IP67, IP68 और IP69 की.
IP67 का मतलब है कि डिवाइस पूरी तरह धूल से सुरक्षित है और लगभग 1 मीटर गहरे पानी में कुछ समय तक सुरक्षित रह सकता है.
IP68 आजकल प्रीमियम स्मार्टफोन्स में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. इसमें भी पूरी डस्ट प्रोटेक्शन मिलती है, लेकिन पानी से सुरक्षा और बेहतर होती है. यह फोन लगभग 1.5 मीटर गहरे पानी में करीब 30 मिनट तक सुरक्षित रह सकता है.
IP69 सबसे मजबूत रेटिंग मानी जाती है. यह सिर्फ पानी में डूबने से ही नहीं, बल्कि तेज दबाव और गर्म पानी की धार को भी सह सकता है. यह रेटिंग अक्सर रग्ड डिवाइसेज और इंडस्ट्रियल मशीनों में देखने को मिलती है.
लेकिन एक जरूरी बात यह है कि IP रेटिंग होने का मतलब यह नहीं कि आपका फोन पूरी तरह वॉटरप्रूफ है. ये टेस्ट लैब में साफ पानी के साथ किए जाते हैं. नमक वाला पानी, साबुन, चाय, कॉफी या बार-बार पानी में जाने से फोन खराब भी हो सकता है.
इसलिए IP रेटिंग को पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं, बल्कि एक सुरक्षा गाइड की तरह समझना चाहिए. नया स्मार्टफोन खरीदते समय कैमरा और बैटरी के साथ IP रेटिंग पर भी जरूर ध्यान दें.





