Last Updated:
नासा के परसीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह से एक ऐतिहासिक घटना को अपने कैमरे में कैद किया है. रोवर ने पहली बार पृथ्वी को मंगल के चांद फोबोस के पीछे गायब होते हुए रिकॉर्ड किया है. यह नजारा 2 जुलाई 2026 को रोवर के मास्टकैम-जेड कैमरे ने लिया है. फोबोस ने सिर्फ 40 सेकंड में हमारी पूरी पृथ्वी को अंतरिक्ष के अंधेरे में छिपा दिया.
पृथ्वी – ऊपर बाईं ओर से नीचे दाईं ओर जाती हुई एक छोटी सी चमकदार बिंदी – मंगल के चंद्रमा फोबोस के पीछे से गुजर रही है. (Photo Credit: NASA/JPL-Caltech/ASU/MSSS/SSI)
नई दिल्ली: नासा के परसीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह से एक अद्भुत नजारा कैमरे में कैद किया है. इस वीडियो में हमारी पृथ्वी मंगल के चांद फोबोस के पीछे पूरी तरह से गायब होती दिख रही है. यह एक ऐसा नजारा है जिसे हम अपनी पृथ्वी से कभी नहीं देख सकते. परसीवरेंस रोवर ने इस ऐतिहासिक पल को 2 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड किया. यह रोवर के मिशन का 1907वां दिन था. इस घटना ने दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. रोवर के जूम कैमरे मास्टकैम-जेड ने इस पूरी घटना की शानदार तस्वीरें ली हैं. इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कैसे एक छोटा सा चांद हमारी विशाल पृथ्वी को अपने पीछे छिपा लेता है.
इस घटना का रहस्य मंगल के चांद फोबोस की कक्षा में छिपा है. फोबोस मंगल की सतह के बहुत करीब से परिक्रमा करता है. इसी वजह से वह पृथ्वी को हमारी नजरों से पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है. मास्टकैम-जेड कैमरे ने जो तस्वीरें ली हैं उनमें पृथ्वी फ्रेम के ऊपरी बाएं हिस्से से निचले दाएं हिस्से की तरफ बढ़ती दिख रही है. उसी समय फोबोस निचले बाएं हिस्से से ऊपरी दाएं हिस्से की तरफ आता है.
परसीवरेंस रोवर 2021 में मंगल पर लैंड करने के बाद से ही जेजेरो क्रेटर के रिम की खोज कर रहा है. वहीं से उसने यह नजारा देखा.
दोनों ऑब्जेक्ट्स एक दूसरे का रास्ता काटते हैं. यह पूरी घटना सिर्फ 40 सेकंड की है जिसे पांच फ्रेम में कैद किया गया. तीसरे फ्रेम में दोनों एक दूसरे से मिलते हैं. इसके बाद हमारी पृथ्वी फोबोस के अंधेरे वाले किनारे के पीछे झपकते ही गायब हो जाती है.
यह नजारा शाम के लगभग 7 बजे रिकॉर्ड किया गया. उस समय मंगल पर सूर्यास्त हुए करीब 40 मिनट बीत चुके थे. यह अंतरिक्ष की एक ऐसी घटना है जिसे रिकॉर्ड करना आसान नहीं था.
आखिर कैसे एक छोटे से चांद फोबोस ने छिपा ली हमारी विशाल पृथ्वी?
- फोबोस आकार में आलू की तरह ऊबड़-खाबड़ है. इसकी चौड़ाई सिर्फ 27 किलोमीटर यानी 17 मील है. यह किसी भी चांद के हिसाब से बहुत छोटा है. अगर इसकी तुलना हमारे अपने चांद से करें तो वह करीब 3475 किलोमीटर चौड़ा है.
- हमारा चांद फोबोस से सौ गुना से भी ज्यादा बड़ा है. लेकिन फोबोस की एक खासियत उसे इस घटना का हीरो बनाती है. वह अपने ग्रह मंगल के बेहद करीब है और उसे कसकर पकड़े हुए है.
- फोबोस मंगल से सिर्फ 7800 किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा करता है. यह दूरी हमारे चांद और पृथ्वी के बीच की दूरी का पचासवां हिस्सा है. इसी नजदीकी के कारण परसीवरेंस की तस्वीरों में यह छोटा चांद इतना बड़ा और प्रभावी दिख रहा है.
- जब ये तस्वीरें ली गईं तब पृथ्वी मंगल से करीब 314 मिलियन किलोमीटर दूर थी. यह दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी के दोगुने से भी अधिक है. इतनी ज्यादा दूरी के कारण पूरी पृथ्वी सिर्फ एक पिक्सेल के रूप में चमकती हुई दिख रही थी.
2 जुलाई, 2026 को परसीवरेंस के मास्टकैम-Z से ली गई नौ तस्वीरों को मिलाकर बनाई गई इस तस्वीर में पृथ्वी – ऊपर बाईं ओर से नीचे दाईं ओर जाती हुई एक छोटी सी चमकदार बिंदी – मंगल के चंद्रमा फोबोस के पीछे से गुजरती हुई दिखाई दे रही है. इनसेट में दिखाई गई तस्वीरें आसमान के उसी आयताकार हिस्से से ली गई हैं जिसे काले रंग से घेरा गया है. (Photo Credit: NASA/JPL-Caltech/ASU/MSSS/SSI)
नासा के साइंटिस्ट इस ऐतिहासिक और डरावनी घटना को लेकर क्या कहते हैं?
- सदर्न कैलिफोर्निया में नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के एक बड़े वैज्ञानिक ने इस पर अपनी बात रखी है. मास्टकैम-जेड के डिप्टी प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर जस्टिन माकी ने कहा, ‘यह कंपोजिट इमेज एक यूनीक अर्थ सेल्फ-पोर्ट्रेट बनाती है जिसे किसी दूसरे ग्रह की सतह से लिया गया है और इसमें एक फोबोस फोटोबॉम्ब भी शामिल है.’ मास्टकैम-जेड कैमरा एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा ऑपरेट किया जाता है.
- बोल्डर कोलोराडो में स्पेस साइंस इंस्टीट्यूट के को-इन्वेस्टिगेटर मार्क लेमन ने इस ऑब्जर्वेशन की प्लानिंग की थी. इस ऐतिहासिक घटना को रिकॉर्ड करने में सही टाइमिंग और थोड़ी किस्मत का भी हाथ रहा है.
- मार्क लेमन ने कहा, ‘फोबोस दिन में तीन बार मंगल के आसमान से गुजरता है और पृथ्वी महीनों तक दिखाई देती है. लेकिन एक को दूसरे के ठीक पीछे पकड़ने के लिए अच्छी प्लानिंग और थोड़ी किस्मत की जरूरत होती है.’ यह कोई आम मुलाकात नहीं थी बल्कि एक दूर के प्रकाश बिंदु के सामने से गुजरने वाली चट्टान थी.
एस्ट्रोनोमर्स ऐसी घटनाओं के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा ऑब्जेक्ट बड़ा दिख रहा है और कौन सामने से गुजर रहा है. परसीवरेंस ने जो रिकॉर्ड किया है उसे अंतरिक्ष विज्ञान में ऑकल्टेशन कहा जाता है. इसमें एक बॉडी जो देखने वाले की पोजीशन से बड़ी दिखती है वह दूसरी बॉडी को पूरी तरह ब्लॉक कर देती है. एक सोलर एक्लिप्स तब होता है जब चांद सूरज को पूरी तरह ढक लेता है.
एक ग्रहण या एक्लिप्स अलग तरह से काम करता है. यह तब होता है जब कोई ऑब्जेक्ट दूसरे की परछाई में चला जाता है. ट्रांजिट तब होता है जब छोटा दिखने वाला ऑब्जेक्ट बड़े दिखने वाले ऑब्जेक्ट के सामने से गुजरता है. रोवर ने मंगल के आसमान से ऐसे ट्रांजिट भी रिकॉर्ड किए हैं. कभी-कभी लोग इन्हें मंगल का सूर्य ग्रहण भी कह देते हैं. अभी तक किसी ने अगली ऑकल्टेशन की तारीख तय नहीं की है. भविष्य के मार्स मिशन शायद इसे फिर से कैमरे में कैद कर पाएंगे.
About the Author

दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
और पढ़ें




