US Army Patriot system | Patriot air defense upgrades |अमेरिका की ‘पेट्रियट’ मिसाइल में क्या गड़बड़ हो गई? ₹5854200500 में लॉकहीड मार्टिन को मिला ठेका


US Patriot Missile System Upgradation: अमेरिका ने अपने सबसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम पैट्रियट को और भी ज्यादा खूंखार बनाने की तैयारी कर ली है. लॉकहीड मार्टिन को अमेरिकी सेना की तरफ से 61 मिलियन डॉलर का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस डील के तहत पैट्रियट सिस्टम की सबसे बड़ी और पुरानी कमजोरी – 360 डिग्री रडार कवरेज की कमी को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा. अब नई RIG-360 तकनीक की मदद से पैट्रियट किसी भी दिशा से आ रही मिसाइल को हवा में ही भस्म कर देगा. इसके अलावा, एक ऐसा ‘कंटेनर आधारित लॉन्चर’ भी तैयार किया जा रहा है, जिसे कहीं भी आसानी से छिपाकर तेजी से तैनात किया जा सकेगा.

अमेरिका ने अपने सबसे भरोसेमंद और घातक वायु रक्षा प्रणाली पैट्रियट को एक अजेय हथियार में बदलने का काम शुरू कर दिया है. लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिकी सेना के साथ 61 मिलियन डॉलर का एक बेहद अहम कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है. इस भारी-भरकम समझौते का मुख्य उद्देश्य पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की दो सबसे बड़ी और पुरानी सीमाओं को हमेशा के लिए दूर करना है.

अमेरिका ने ब्लाइंड स्पॉट दूर करने के लिए लॉकहीड मार्टिन को ₹5854200500 का ठेका दिया है.

इस अपग्रेड प्रोजेक्ट के तहत दो मुख्य तकनीकी बदलाव किए जाएंगे – पहला, एक ‘कंटेनरीकृत मिसाइल लॉन्चर’ का विकास और दूसरा, एक ऐसा ‘हेमिस्फेरिकल गाइडेंस डिवाइस’ (RIG-360) जो पैट्रियट की सबसे बड़ी सामरिक कमजोरी को पूरी तरह से खत्म कर देगा. अब तक पैट्रियट सिस्टम किसी एक निश्चित दिशा में ही दुश्मनों को इंटरसेप्ट कर पाता था, लेकिन अब यह 360 डिग्री कवरेज के साथ हर दिशा से आ रहे खतरों को नेस्तनाबूद करेगा.

कब तक पूरा होगा यह महा-प्रोजेक्ट

अलबामा के रेडस्टोन आर्सेनल में आर्मी कॉन्ट्रैक्टिंग कमांड ने लॉकहीड मार्टिन मिसाइल एंड फायर कंट्रोल के साथ यह समझौता किया है. इसके तहत ‘मिसाइल सेगमेंट एन्हांसमेंट कंटेनरीकृत लॉन्चर’ और ‘रिमोट इंटरसेप्टर गाइडेंस 360 डिग्री (RIG-360) कंटेनरीकृत सिस्टम’ का विकास और परीक्षण किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के 31 मई, 2027 तक पूरी तरह से तैयार हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है.

दशकों से अमेरिका का ‘ब्रह्मास्त्र’

पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्माण लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन मिलकर करते हैं. 1980 के दशक से यह अमेरिकी सेना और दुनिया भर के दर्जनों मित्र देशों की वायु रक्षा की रीढ़ बना हुआ है. खाड़ी युद्ध से लेकर ऑपरेशन इराकी फ्रीडम और हाल ही में चल रहे यूक्रेन युद्ध में इसने अपनी अभूतपूर्व ताकत दिखाई है. यूक्रेन में इस सिस्टम ने रूसी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को जिस सटीकता से हवा में नष्ट किया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. यह PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइल फायर करता है, जो हिट-टू-किल (Hit-to-kill) तकनीक पर काम करती है – यानी यह दुश्मन की मिसाइल के करीब जाकर फटने के बजाय, सीधे उससे टकराकर उसे राख कर देती है.

यूक्रेन में तैनात पैट्रियट को रूसी क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के हमलों का सामना करना पड़ा था

खत्म होगी पैट्रियट की सबसे बड़ी कमजोरी

पैट्रियट सिस्टम शुरू से ही एक स्ट्रक्चरल लिमिटेशन (संरचनात्मक कमी) से जूझता रहा है. इसका AN/MPQ-65 रडार एक ‘सेक्टर्ड सेंसर’ है, जो 360 डिग्री के बजाय केवल एक विशेष दिशा पर नजर रखता है. अगर दुश्मन की मिसाइल रडार के कवरेज एरिया से बाहर की दिशा से आती है, तो सिस्टम उसे मार गिराने में असमर्थ हो जाता था. इस वजह से सेना के कमांडरों को अपनी बैटरी उसी दिशा में लगानी पड़ती थी जिधर से हमले की सबसे ज्यादा आशंका हो.

RIG-360 तकनीक इस पूरी पाबंदी को हमेशा के लिए तोड़ देगी. यह एक सॉफ्टवेयर-डिफाइंड डिवाइस है, जो किसी भी दिशा से आ रही मिसाइल को इंटरसेप्ट करने के लिए PAC-3 मिसाइल को अपलिंक कमांड देगा. यह डिवाइस ‘इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम’ (IBCS) से जुड़ा होगा. IBCS किसी भी दिशा में लगे सेंसर और रडार से डेटा लेगा और RIG-360 के जरिए मिसाइल को सही दिशा में गाइड कर देगा. यानी अब प्राथमिक रडार का मुंह मोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी और मिसाइल किसी भी दिशा से आ रहे खतरे को ट्रैक कर लेगी.

अपग्रेडेशन के बाद मिसाइल किसी भी दिशा से आ रहे खतरे को ट्रैक कर लेगी.

नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के IBCS का कमाल

इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम को नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन द्वारा विकसित किया गया है. यह अमेरिकी सेना के लिए एक ऐसा नेटवर्क है जो अलग-अलग रडार और हथियारों को एक साथ जोड़ता है. पहले अलग-अलग सिस्टम एक-दूसरे से रियल-टाइम डेटा शेयर नहीं कर पाते थे, लेकिन IBCS ने इस समस्या को सुलझा दिया है. RIG-360 विशेष रूप से इसी नेटवर्क का फायदा उठाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे पैट्रियट मिसाइलें किसी भी जुड़े हुए रडार से कमांड ले सकेंगी.

कंटेनर लॉन्चर कहीं भी ले जाना होगा बेहद आसान

इस कॉन्ट्रैक्ट का दूसरा बड़ा हिस्सा ‘कंटेनर आधारित मिसाइल लॉन्चर’ बनाना है. पुराने M901 पैट्रियट लॉन्चर काफी भारी और बड़े होते हैं, जिन्हें ले जाने और तैनात करने के लिए बड़े लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती है. लेकिन नए कंटेनरीकृत लॉन्चर को सामान्य इंटरमॉडल शिपिंग कंटेनर चेसिस पर आसानी से फिट किया जा सकेगा. इससे पैट्रियट मिसाइलों को तेजी से कहीं भी ले जाया जा सकेगा. इसे छिपाना आसान होगा और दुश्मनों की नजरों से बचाकर इसे किसी भी जगह तैनात किया जा सकेगा.

यूक्रेन युद्ध से बदली रणनीति

यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने इन दोनों अपग्रेड्स की अहमियत को और बढ़ा दिया है. यूक्रेन में तैनात पैट्रियट को रूस द्वारा एक साथ कई दिशाओं से लॉन्च की गई क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के हमलों का सामना करना पड़ा है. यूक्रेन के सैन्य ऑपरेटर अब दुनिया के सबसे अनुभवी पैट्रियट क्रू बन चुके हैं और उनके अनुभव से ही यह साफ हो गया कि 360-डिग्री एंगेजमेंट क्षमता का होना कितना आवश्यक है. अमेरिकी सेना द्वारा 61 मिलियन डॉलर का यह भारी निवेश युद्ध के मैदान से मिले इन्हीं सामरिक सबकों का सीधा नतीजा है.

पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए लॉकहीड मार्टिन को कितने डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है?
लॉकहीड मार्टिन को अमेरिकी सेना की तरफ से पैट्रियट सिस्टम के अपग्रेडेशन के लिए 61 मिलियन डॉलर (लगभग 500 करोड़ रुपये) का अहम कॉन्ट्रैक्ट मिला है.

पैट्रियट सिस्टम की 360 डिग्री कवरेज वाली कमी को किस नई तकनीक से दूर किया जा रहा है?
पैट्रियट सिस्टम की इस सबसे बड़ी कमी को दूर करने के लिए ‘RIG-360’ (रिमोट इंटरसेप्टर गाइडेंस 360 डिग्री) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह डिवाइस इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम (IBCS) से जुड़कर किसी भी दिशा से आ रहे खतरे को मार गिराने में मदद करेगा.

कंटेनरीकृत लॉन्चर (Containerized Launcher) के क्या फायदे होंगे?
नए कंटेनरीकृत लॉन्चर को एक सामान्य शिपिंग कंटेनर चेसिस पर रखा जा सकेगा, जिससे भारी-भरकम पैट्रियट सिस्टम को तेजी से कहीं भी ले जाना, छिपाना और दुश्मनों की नजरों से बचाकर तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा.



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