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Koli Dhek Lake Lohaghat Champawat Must Visit: उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र अपनी अनगिनत और खूबसूरत झीलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. अक्सर जब लोग उत्तराखंड में झील देखने का प्लान बनाते हैं, तो उनके दिमाग में सिर्फ नैनीताल या भीमताल का नाम आता है. लेकिन चंपावत जिले के लोहाघाट में एक ऐसी भी जादुई झील है, जो खूबसूरती के मामले में कश्मीर को टक्कर देती है. देवदार के ऊंचे-ऊंचे जंगलों के बीच बसी इस मानव-निर्मित झील का नाम है ‘कोली ढेक झील’. अगर आप भी इस बार गर्मियों की छुट्टियों में या वीकेंड पर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां शांति हो, ठंडी हवाएं हों और कुदरत का सबसे सुंदर रूप देखने को मिले, तो कोली ढेक झील आपके लिए सबसे परफेक्ट डेस्टिनेशन है.
उत्तराखंड के लोहाघाट नगर से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित कोली ढेक झील अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. देवदार के घने जंगलों से घिरी यह मानव-निर्मित झील हर मौसम में अलग-अलग रूप दिखाती है. लगभग 1650 मीटर लंबी और करीब 20 मीटर गहरी इस झील का स्वच्छ नीला पानी दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. झील के बीचों-बीच आधे डूबे देवदार के पेड़ इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं. सुबह के समय झील के ऊपर तैरती हल्की धुंध और पक्षियों की मधुर आवाजें यहां का वातावरण बेहद शांत बना देती हैं. प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और परिवार के साथ घूमने आने वालों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता है.

कोली ढेक झील को देखने आने वाले पर्यटक अक्सर इसकी तुलना कश्मीर की खूबसूरत झीलों से करते हैं. झील के चारों ओर फैले देवदार और चीड़ के जंगल, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण यहां आने वालों को मानसिक सुकून का अनुभव कराते हैं. शहरों की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर यह स्थान प्रकृति के बीच कुछ पल बिताने का बेहतरीन अवसर देता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय झील का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक दिखाई देता है, जब पानी में पहाड़ों और पेड़ों का प्रतिबिंब बेहद मनमोहक लगता है. सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. कई लोग घंटों झील किनारे बैठकर प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं, और अपने सफर को यादगार बनाते हैं.

वहां के स्थानीय निवासी राजेश कुमार बताते हैं कि कोली ढेक झील में बोटिंग पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में शामिल है. शांत पानी में नौका विहार करते हुए आसपास के देवदार के जंगलों का दृश्य बेहद रोमांचक लगता है. झील के किनारे बैठकर पिकनिक मनाने, फोटोग्राफी करने और प्रकृति का आनंद लेने के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है. स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग लगातार इस क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं. झील के आसपास साफ-सफाई और पर्यटकों की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण को बिना नुकसान पहुंचाए घूमने का आनंद लेते हैं. पिछले कुछ वर्षों में कोली ढेक झील उत्तराखंड के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में तेजी से शामिल होती जा रही है.
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कोली ढेक झील की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हर मौसम में इसका स्वरूप बदल जाता है. गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, और मैदानी इलाकों की गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. मानसून के दौरान आसपास की हरियाली और अधिक घनी हो जाती है, जिससे झील का दृश्य और भी आकर्षक दिखाई देता है. सर्दियों में जब आसपास की पहाड़ियों पर बर्फ गिरती है, तब यह पूरा क्षेत्र किसी चित्र जैसा सुंदर नजर आता है. सुबह और शाम के समय हल्की धुंध झील की सुंदरता को और बढ़ा देती है. मौसम के अनुसार बदलते प्राकृतिक रंग पर्यटकों को हर बार नया अनुभव प्रदान करते हैं.

कोली ढेक झील केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि स्थानीय जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. झील के आसपास देवदार, चीड़ और अन्य पर्वतीय वनस्पतियां बड़ी संख्या में पाई जाती हैं. यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट पर्यावरण को जीवंत बना देती है. प्रकृति प्रेमी और पक्षी प्रेमियों के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण रखता है. पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जाता है. स्थानीय लोग और प्रशासन पर्यटकों से अपील करते हैं कि झील परिसर में प्लास्टिक या अन्य कचरा न फैलाएं, ताकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता लंबे समय तक सुरक्षित रह सके. स्वच्छ वातावरण और हरियाली ही इस झील की सबसे बड़ी पहचान है.

कोली ढेक झील के विकसित होने से आसपास के लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिले हैं. स्थानीय युवक बोटिंग, गाइड सेवा, पार्किंग और छोटे खाद्य स्टॉल के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं. पर्यटन बढ़ने से स्थानीय हस्तशिल्प और पहाड़ी उत्पादों की बिक्री को भी बढ़ावा मिला है. आसपास के होटल, होमस्टे और छोटे व्यवसायों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है. स्थानीय लोग पर्यटकों का स्वागत पारंपरिक पहाड़ी आतिथ्य के साथ करते हैं, जिससे यहां आने वालों का अनुभव और भी बेहतर बन जाता है. यदि पर्यटन इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए और अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

कोली ढेक झील घूमने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान मौसम साफ रहता है, झील का पूरा सौंदर्य देखने को मिलता है. सर्दियों में भी यहां का नजारा बेहद खूबसूरत होता है, लेकिन ठंड अधिक रहती है, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है. मानसून में हरियाली तो बढ़ जाती है, लेकिन फिसलन और बारिश के कारण सावधानी बरतनी चाहिए. पर्यटकों को झील के किनारे सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए, और बोटिंग करते समय लाइफ जैकेट अवश्य पहननी चाहिए. प्रकृति संरक्षण के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करें और परिसर को स्वच्छ बनाए रखें.

कोली ढेक झील उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट नगर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. टनकपुर निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जो झील से लगभग 85–90 किलोमीटर दूर है. यहां से टैक्सी और बस की सुविधा उपलब्ध रहती है. निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा लोहाघाट पहुंचा जा सकता है. लोहाघाट बाजार से निजी वाहन, टैक्सी या पैदल भी झील तक पहुंचा जा सकता है. चंपावत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हल्द्वानी से नियमित बस सेवाएं लोहाघाट तक उपलब्ध रहती हैं. शांत वातावरण, देवदार के जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए यह स्थान परिवार, दोस्तों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक शानदार पर्यटन स्थल माना जाता है.




