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महाराष्ट्र का नाणेघाट रिवर्स वॉटरफॉल मानसून के दौरान हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां झरने का पानी नीचे गिरने की बजाय ऊपर उड़ता हुआ दिखाई देता है. हालांकि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि प्रकृति और मौसम से जुड़ी एक दिलचस्प वैज्ञानिक घटना है.
रिवर्स वॉटरफॉल का दृश्य पूरे साल नहीं दिखाई देता.
भारत में कई ऐसी प्राकृतिक जगहें हैं, जो अपनी अनोखी खूबसूरती और रहस्यमयी नजारों के लिए मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र का नाणेघाट (Naneghat), जो पश्चिमी घाट (Western Ghats) की पहाड़ियों में स्थित एक ऐतिहासिक दर्रा है. यह जगह ट्रैकिंग, हरियाली और मानसून के शानदार नजारों के लिए जानी जाती है. लेकिन बारिश के मौसम में यहां एक ऐसा दृश्य देखने को मिलता है, जिसे देखकर पहली बार आने वाले लोग हैरान रह जाते हैं. यहां झरने का पानी नीचे गिरने की बजाय ऊपर की ओर उड़ता हुआ दिखाई देता है. यही वजह है कि इसे रिवर्स वॉटरफॉल (Reverse Waterfall) कहा जाता है. सोशल मीडिया पर इसके वीडियो हर साल वायरल होते हैं और लोग इसे किसी चमत्कार से जोड़ने लगते हैं, जबकि इसके पीछे पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण हैं.
नाणेघाट महाराष्ट्र के पुणे और ठाणे जिले के बीच स्थित एक प्राचीन पहाड़ी दर्रा है, जिसका इतिहास लगभग 2,000 साल पुराना माना जाता है. सातवाहन काल में यह व्यापारिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. आज यह जगह मानसून ट्रैकिंग और प्राकृतिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है. बारिश के दौरान यहां बनने वाला रिवर्स वॉटरफॉल पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन जाता है. दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि झरने का पानी नीचे बहने की बजाय आसमान की ओर उड़ रहा है.
आखिर पानी ऊपर क्यों उड़ता दिखाई देता है?
इसका कारण गुरुत्वाकर्षण में कोई बदलाव नहीं, बल्कि तेज हवा का दबाव है. मानसून के दौरान नाणेघाट की ऊंची पहाड़ियों पर कई बार हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी अधिक हो सकती है. जब झरने का पानी ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो वह छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाता है. तेज हवा इन हल्की बूंदों को नीचे गिरने से पहले ही ऊपर और पीछे की ओर धकेल देती है. इससे ऐसा भ्रम पैदा होता है कि पूरा झरना उल्टी दिशा में बह रहा है. वास्तव में पानी नीचे ही गिरता है, लेकिन उसकी महीन बूंदें हवा के प्रभाव से ऊपर उड़ती हुई दिखाई देती हैं.
मानसून में ही क्यों दिखाई देता है यह नजारा?
रिवर्स वॉटरफॉल का दृश्य पूरे साल नहीं दिखाई देता. यह मुख्य रूप से जून से सितंबर के बीच, यानी मानसून के दौरान देखने को मिलता है. इसी समय झरनों में पर्याप्त पानी होता है और पश्चिमी घाट में तेज हवाएं चलती हैं. यदि हवा की गति कम हो जाए या बारिश न हो, तो झरना सामान्य तरीके से नीचे गिरता हुआ दिखाई देता है. इसलिए इस प्राकृतिक घटना को देखने के लिए सही मौसम का होना बेहद जरूरी है.
पर्यटकों के बीच क्यों है इतना लोकप्रिय?
हर साल मानसून के मौसम में हजारों पर्यटक और ट्रैकिंग के शौकीन नाणेघाट पहुंचते हैं. यहां से दिखाई देने वाली हरी-भरी घाटियां, बादलों से ढकी पहाड़ियां और रिवर्स वॉटरफॉल का दृश्य फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए भी बेहद खास माना जाता है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें




