मैक्सिमम प्रेशर 2.0: ट्रंप की पुरानी रणनीति और ईरान का नया चक्रव्यूह, क्या इस बार दांव उल्टा पड़ेगा?


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ट्रंप की पुरानी रणनीति और ईरान का नया चक्रव्यूह, क्या अबकी दांव उल्टा पड़ेगा?

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Trump’s Hormuz Blockade: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह नाकेबंदी (Blockade) कर दी है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि आर्थिक दबाव से ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल और बढ़ती वैश्विक तेल कीमतें इस बार इस रणनीति को अमेरिका के लिए ही भारी बना सकती हैं.

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वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo : Reuters)

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जो पुरानी जरूर है, लेकिन इस बार इसके नतीजे काफी अप्रत्याशित हो सकते हैं. केवल सैन्य ताकत के इस्तेमाल के बजाय अब फोकस आर्थिक घेरेबंदी पर है. इसमें ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकना और व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण कसना शामिल है. ट्रंप प्रशासन का यह ‘प्लेबुक’ चीन के साथ हुए ट्रेड वॉर की याद दिलाता है. वहां भी दबाव बनाकर और बड़ी मांगें रखकर ताकत के दम पर बातचीत की गई थी. लेकिन ईरान का मामला व्यापार विवाद से कहीं आगे निकल चुका है. यह एक सक्रिय युद्ध जैसी स्थिति है जहां हर कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. तेल की सप्लाई में थोड़ी सी भी बाधा वैश्विक स्तर पर महंगाई का ऐसा तूफान ला सकती है जिसे संभालना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा.

क्या आर्थिक दबाव से ईरान को झुकाना मुमकिन है?

ईरान की प्रतिक्रिया वैसी नहीं रही है जैसी शायद अमेरिका ने सोची थी. दबाव में झुकने के बजाय तेहरान अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठा रहा है. ईरान के पास ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसा एक ऐसा ब्रह्मास्त्र है जो दुनिया के तेल बाजार की धड़कनें कंट्रोल करता है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ईरान ने इस रास्ते को बंद करने या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने जैसी धमकियां दी हैं.

ईरान का मानना है कि वह इस दबाव को झेल सकता है. वह दांव लगा रहा है कि अमेरिका की नाकेबंदी से होने वाला नुकसान सिर्फ उसे नहीं बल्कि पूरी दुनिया को होगा. जब दुनिया भर में तेल की कमी होगी और कीमतें आसमान छुएंगी, तो दबाव ईरान पर नहीं बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों पर बढ़ेगा. ईरान इसी इंतजार में है कि कब यह आर्थिक चोट खुद अमेरिका के लिए राजनीतिक मुसीबत बन जाए.

तेल की नाकेबंदी और महंगाई का डबल अटैक?

ऊपर से देखने पर लगता है कि तेल की नाकेबंदी सिर्फ ईरान की कमाई रोकने के लिए है. लेकिन यह खेल एकतरफा नहीं है. वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में ईरान की सप्लाई अहम भूमिका निभाती है.

जैसे ही मार्केट में सप्लाई कम होने की खबर आती है, कीमतें बढ़ने लगती हैं. इसके शुरुआती संकेत दिखने भी लगे हैं और कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं.

जब ईंधन महंगा होता है तो उसका असर हर चीज पर पड़ता है. ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ती है जिससे फल, सब्जी और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं. यह स्थिति आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती है.





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