किम जोंग उन ने भले ही एक शब्द तक नहीं कहा हो, ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उनके साथ दोस्ती का ढिंढोरा पीट रहे हैं. आज एक बार फिर से उन्होंने एक ऐसा ही पोस्ट शेयर किया है. ट्रंप का कहना है कि उनकी ईरान के मुद्दे को लेकर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह से बात हुई है. पोस्ट में जो कुछ लिखा है, उससे जाहिर है कि किम जोंग उन ने ट्रंप की मुंह पर बेइज्जती कर दी है. ट्रंप ने अपनी इस बेइज्जती के पीछे लॉजिक देने की कोशिश भी की है. हालांकि, वो ये दर्द नहीं छुपा जाए कि ईरान के मुद्दे पर ‘सनकी तानाशाह’ ने उनकी मदद करने से साफ इनकार कर दिया है.
किम जोंग उन के लिए ट्रंप ने साउथ कोरिया को दिया धोखा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध रहे हैं. इसी वजह से उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि अमेरिका ने लंबे समय पहले दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास करने पर सहमति जताई थी. ट्रंप का मानना है कि इन सैन्य अभ्यासों पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है और इसका ज्यादातर खर्च हमेशा अमेरिका को ही उठाना पड़ता है.
ट्रंप ने कहा कि जब तक वो अमेरिका के राष्ट्रपति रहे, तब तक उत्तर कोरिया ने कभी कोई धमकी नहीं दी और हमेशा सम्मान दिखाया. ऐसे में दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिका का ये मिलिट्री ड्रिल उत्तर कोरिया को एक गलत और आक्रामक संदेश भेजता है.
ट्रंप ने बताया कि अब इस अभ्यास को पूरी तरह रद्द करने में तो काफी देर हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने अपने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को निर्देश दिया कि इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों के आकार और दायरे को काफी हद तक कम कर दिया जाए.
ट्रंप के इस कदम से जाहिर है कि वो किम जोंग उन को किसी भी हाल में नाराज नहीं करना चाहते. हालांकि, अमेरिका के रक्षा रणनीतिकारों के लिए ये फैसला काफी हैरान करने वाला है, क्योंकि दक्षिण कोरिया के साथ मिलिट्री एक्सरसाइज एशिया में अमेरिकी ताकत की सबसे मजबूत रीढ़ मानी जाती है.
ईरान पर पूछा सवाल, जवाब मिला- No Thanks!
साउथ कोरिया की तरफ उंगली करते हुए ट्रंप ने लॉजिक दिया है कि उसके साथ मिलिट्री ड्रिल करने की वजह से ही किम जोंग उन नाराज हैं और उन्होंने ईरान के मामले में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया गै.
ट्रंप ने इस पोस्ट में बताया कि जब उन्होंने नॉर्थ कोरिया के तानाशाह से पूछा कि क्या वो ईरान से न्यूक्लियर छीनने में अमेरिका का साथ देना चाहेंगे? इस सवाल पर दक्षिण कोरिया की तरफ से बेहद सपाट और ठंडा जवाब मिला. उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे कहा- ‘No thanks’ यानी ‘जी नहीं, शुक्रिया’.
इंटरनेशनल कूटनीति में ट्रंप को झटका
दक्षिण कोरिया का ये सीधा इनकार ट्रंप के लिए किसी कूटनीतिक झटके से कम नहीं है. किसी भी देश से इस तरह का दो टूक जवाब मिलना अमेरिकी लीडरशिप की साख पर सवाल खड़े करता है. ट्रंप ने खुद इस बात को माना है कि नॉर्थ कोरिया ने किस तरह उन्हें मुंह पर मना कर दिया.
कितनी गहरी है ईरान-नॉर्थ कोरिया की दोस्ती, चीन का खेल
ट्रंप भले ही साउथ कोरिया पर इल्जाम लगा रहे हैं लेकिन नॉर्थ कोरिया के लिए ईरान की अलग ही अहमियत है. उत्तर कोरिया और ईरान का साथ कोई आज का नहीं है, बल्कि दोनों देशों की पुरानी दोस्ती ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है’ के फॉर्मूले पर टिकी है. अमेरिका और पश्चिमी देशों के भारी प्रतिबंध झेल रहे ये दोनों देश एक-दूसरे को मिसाइल टेक्नोलॉजी, सैन्य तकनीक और कच्चे तेल के कारोबार में मदद करते आए हैं.
इस पूरी जुगलबंदी में सबसे बड़ा और साइलेंट खिलाड़ी चीन है. चीन इन दोनों ही देशों का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मददगार है. बीजिंग कभी भी खुले तौर पर इस त्रिकोण को कबूल नहीं करता, लेकिन वो पर्दे के पीछे से इन्हें सपोर्ट करता है, ताकि अमेरिका का पूरा ध्यान एशिया और मिडिल ईस्ट में उलझा रहे और वो चीन की घेराबंदी न कर सके. आसान शब्दों में कहें तो उत्तर कोरिया और ईरान अमेरिका के खिलाफ ढाल बने हुए हैं, और चीन इस पूरी बिसात का वो मास्टरमाइंड है, जो दोनों को बैकस्टेज से ताकत देता है ताकि ग्लोबल पॉलिटिक्स में उसका पलड़ा भारी रहे.




