ईरान से लड़ना है तो महंगा तेल खरीदो, शिया मुल्क को झुकाने चले ट्रंप ने अमेरिकी जनता की जेब पर ही डाका डाल दिया


वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान से लड़ाई का असर आम अमेरिकियों की जेब पर पड़ेगा. ट्रंप ने देशवासियों से अपील की है. वे गैस के लिए थोड़ी ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार रहें. उनका मानना है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह आर्थिक बलिदान बहुत जरूरी है. न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में एक पॉलिटिकल रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान को एक बेहद बुरा देश बताया. उन्होंने कहा, ‘इस दुश्मन को रोकने के लिए अगर गैस के दाम बढ़ते हैं तो यह कोई बड़ा सौदा नहीं है’. ट्रंप ने ईरान को हराने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से अमेरिकी नियंत्रण की धमकी दी है. ट्रंप की इस बयानबाजी ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में टेंशन बढ़ा दी है. इस विवाद की वजह से टैंकर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

वहीं ईरान भी अपनी जिद्द पर अड़ा हुआ है. ईरान का कहना है कि यह जलमार्ग सिर्फ उसके अधिकार क्षेत्र में ही खुलेगा और बंद होगा. ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने शनिवार को वाशिंगटन को चेतावनी दी. गरीबाबादी ने कहा, ‘अमेरिका को अपनी हार की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए’. उन्होंने अमेरिका से अवास्तविक मांगे बंद करने को भी कहा है.

क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होगी?

फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों पर ब्रेक लग चुका है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ किया है कि वाशिंगटन के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है. अरागची ने ईरानी मीडिया आउटलेट शहरारा न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही शुरू होने से पहले अमेरिका को हमारी शर्तें माननी होंगी’.

इस बीच अमेरिका भी ईरान पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने न्यूमैक्स को बताया कि अगले हफ्ते ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की जाएगी. ट्रंप प्रशासन का यह रवैया साफ करता है कि ईरान पर चौतरफा दबाव बनाया जा रहा है.
ट्रंप बोले- ईरान से लड़ना है तो महंगा तेल खरीदो. (AP Photo)

ग्लोबल क्राइसिस के बीच गैस और कच्चे तेल की कीमत कहां पहुंची?

इस लंबे गतिरोध का असर अब अमेरिकी उपभोक्ताओं और फाइनेंशियल मार्केट पर दिखने लगा है. अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के मुताबिक शुक्रवार को अमेरिका में गैस की औसत कीमत 4.08 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा है.

कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है. शुक्रवार को कच्चे तेल का वायदा भाव करीब एक डॉलर प्रति बैरल बढ़ गया. ब्रेंट क्रूड में इस हफ्ते करीब छह प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 5.4 प्रतिशत की छलांग लगाने की राह पर है.

क्या अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था भी डूबने लगी है?

सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि ईरान भी इस टकराव का भारी आर्थिक नुकसान झेल रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने देश में बढ़ती महंगाई के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. पेजेशकियन ने कहा, ‘ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी और तेल निर्यात पर प्रतिबंधों ने हमारी कमर तोड़ दी है’.

बातचीत रुकी होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के केंद्र में होने के कारण स्थिति कभी भी बेकाबू हो सकती है. अगर यह विवाद और गहराता है तो गैस की कीमतों और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा.



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