डीपफेक से जासूसी तक! चीन के ‘साइलेंस ऑपरेशन’ पर अमेरिकी संसद में बवाल, ड्रैगन की गुप्त साजिशों का पर्दाफाश


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चीन के ‘साइलेंस ऑपरेशन’ पर US संसद में बवाल, ड्रैगन की गुप्त साजिश का पर्दाफाश

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सांसद क्रिस स्मिथ ने डरावना बयान दिया है. सीसीपी दुनिया भर में अपना नेटवर्क चला रही है. चीन में आलोचकों के परिवार वालों को हिरासत में लिया जाता है. लोगों की पर्सनल इनफॉर्मेशन लीक की जाती है. स्पाइवेयर और डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल हो रहा है. अमेरिका में चीन के अवैध पुलिस स्टेशन चलने का भी राज खुला है.

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अमेरिका और चीन में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. अमेरिकी कांग्रेस में चीन सरकार की उन कोशिशों पर फिर से सवाल उठाए गए, जिनके जरिए वह अपनी सीमाओं के बाहर भी आलोचकों की आवाज दबाने की कोशिश करती है. गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस में हुई एक सुनवाई में सांसदों, राज्य अधिकारियों और लोकतंत्र कार्यकर्ताओं ने बताया कि चीन अब सिर्फ अपने देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में डराने-धमकाने, निगरानी और दबाव बनाने की बढ़ती हुई मुहिम चला रहा है.

यह सुनवाई कांग्रेसनल एग्जीक्यूटिव कमीशन ऑन चाइना (सीईसीसी) में हुई, जो तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की 37वीं बरसी के दिन आयोजित की गई थी. इसमें सांसदों ने कहा कि चीन के तरीके अब घरेलू दमन से आगे बढ़कर ‘ट्रांसनेशनल र‍िप्रेशन’ यानी सीमाओं के बाहर जाकर दमन करने की वैश्विक रणनीति बन गए हैं.

सुनवाई की शुरुआत में सह-अध्यक्ष सांसद क्रिस स्मिथ ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) कई तरह के तरीके इस्तेमाल कर रही है. इनमें चीन में परिवार के सदस्यों को हिरासत में लेना, लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक करना (डॉक्सिंग), स्पाइवेयर का इस्तेमाल, डीपफेक वीडियो, हांगकांग से जुड़े इनाम (बाउंटी) और अमेरिका में भी अवैध पुलिस स्टेशन चलाना शामिल है.

सह-अध्यक्ष सांसद जिम मैकगवर्न ने कहा कि चीन दुनिया में ट्रांसनेशनल दमन करने वाला सबसे बड़ा देश है. उन्होंने फ्रीडम हाउस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014 से अब तक 319 ऐसे मामले सामने आए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन पॉलिसी एक्ट’ पास करना चाहिए, जिससे इस मुद्दे की कानूनी परिभाषा तय हो सके और सरकार की प्रतिक्रिया मजबूत हो. सुनवाई में सबसे ध्यान खींचने वाली गवाही आर्थर लियू की थी, जो पहले चीन में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता थे और 1989 के तियानमेन आंदोलन के बाद चीन छोड़कर अमेरिका के कैलिफोर्निया में बस गए थे.

लियू ने बताया कि उन्हें लगा था कि अमेरिका आने के बाद राजनीतिक उत्पीड़न खत्म हो गया है, लेकिन 2021 में सब बदल गया, जब एफबीआई ने उन्हें बताया कि एक चीनी एजेंट उनके बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहा है और उनकी बेटी, ओलंपिक फिगर स्केटर एलिसा लियू, के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश हो रही है, ताकि 2022 बीजिंग विंटर ओलंपिक्स से पहले दबाव बनाया जा सके. लियू ने कहा, “एफबीआई ने मुझसे सावधान और सतर्क रहने को कहा.”

उन्होंने बताया कि एजेंटों ने उन्हें यह भी बताया कि संदिग्ध जासूस उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकता है, उनकी गाड़ी में जीपीएस ट्रैकर लगा सकता है और उनके पासपोर्ट की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है. लियू ने कहा, “मुझे अपनी बेटी एलिसा की सुरक्षा को लेकर बहुत डर लग रहा था, जब वह अमेरिका की तरफ से चीन में प्रतियोगिता में भाग लेने जा रही थी.” यह सुनवाई ऐसे समय हुई, जब सांसदों ने एक बार फिर इस तरह के मामलों से निपटने के लिए संघीय, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नए कानून पारित करने की मांग की.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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