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Reasons Behind Salt Cravings: कई लोगों को बार-बार नमक या नमकीन चीजें खाने का मन करता है. अक्सर लोग इसे स्वाद के साथ जोड़ देते हैं, लेकिन नमक खाने की इच्छा शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत भी हो सकता है. यह डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लंबे समय तक रहने वाले तनाव या एडिसन्स डिजीज जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है. कुछ मामलों में माइग्रेन या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी कंडीशन भी नमकीन खाने की इच्छा बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट या शरीर में सोडियम की कमी भी इसकी वजह बन सकती है.
नमक हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी तत्व है, लेकिन इसकी मात्रा का संतुलन बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है. आज के समय में जहां प्रोसेस्ड फूड में पहले से ही अधिक नमक मौजूद होता है, वहीं कई लोगों को बार-बार नमकीन खाने की इच्छा भी होती है. विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ स्वाद की पसंद नहीं, बल्कि शरीर में हो रहे किसी बदलाव या स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है. अगर आपको बार-बार नमक खाने का मन करता है, तो इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी है.

हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार नमक खाने की इच्छा का सबसे कॉमन कारण डिहाइड्रेशन है. जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तब इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है. ऐसे में शरीर नमक की मांग करने लगता है. इसके साथ चक्कर आना, ज्यादा प्यास लगना, थकान, सिरदर्द और पेशाब कम आना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है.

नमक की क्रेविंग होना एडिसंस डिजीज का लक्षण हो सकता है. इस बीमारी में एड्रिनल ग्लैंड्स पर्याप्त हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल और एल्डोस्टेरोन नहीं बना पाते, जिससे शरीर में सोडियम की कमी होने लगती है. इस स्थिति में व्यक्ति को नमक की तीव्र इच्छा होती है. साथ ही कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, वजन घटना और चक्कर आने जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं.
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क्रोनिक स्ट्रेस यानी लंबे समय तक रहने वाला तनाव साल्ट क्रेविंग की वजह बन सकता है. रिसर्च के अनुसार जब हम तनाव में होते हैं, तो दिमाग फील गुड हार्मोन जैसे डोपामाइन रिलीज करता है, जो नमकीन चीजें खाने की इच्छा बढ़ा सकता है. यह माना जाता है कि स्ट्रेस और खाने की क्रेविंग का गहरा संबंध होता है. हालांकि इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.

बार्टर सिंड्रोम नामक रेयर किडनी डिजीज के कारण भी लोगों का नमकीन खाने का मन करता है. इस बीमारी में शरीर सोडियम को सही तरीके से रीएब्जॉर्ब नहीं कर पाता और वह यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है. इससे शरीर में सोडियम की कमी बनी रहती है और व्यक्ति को बार-बार नमक खाने की इच्छा होती है. बच्चों में यह समस्या जन्म से या बचपन में दिखाई दे सकती है.

सिस्टिक फाइब्रोसिस नामक जेनेटिक डिजीज के कारण भी शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है और लोगों को साल्ट की क्रेविंग होने लगती है. इस बीमारी में शरीर पसीने के जरिए ज्यादा नमक खो देता है, जिससे सोडियम का स्तर कम हो जाता है. ऐसे लोगों की त्वचा भी नमकीन महसूस हो सकती है और उन्हें अधिक नमकीन चीजें खाने की इच्छा हो सकती है.

साल्ट क्रेविंग के पीछे माइग्रेन भी हो सकता है. माइग्रेन से पीड़ित लोगों को सिरदर्द के दौरान या उससे पहले नमकीन या मीठा खाने की इच्छा हो सकती है. कुछ मामलों में नमकीन चीजें खाने से दर्द में हल्की राहत भी मिलती है. हालांकि यह हर व्यक्ति पर निर्भर करता है.

कुछ दवाइयां भी शरीर में नमक की क्रेविंग बढ़ा सकती हैं. कुछ दवाएं एड्रिनल ग्लैंड्स को प्रभावित करती हैं, जिससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है और नमक की क्रेविंग बढ़ सकती है. अगर आप कोई दवा ले रहे हैं और अचानक नमक खाने की इच्छा बढ़ गई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. (All Images- AI)





