Donald Trump Pakistan : America India Relations | US Vs China | ट्रंप पाकिस्तान | अमेरिका भारत | अमेरिका चीन


वॉशिंगटन: अमेरिका और पाकिस्तान का टॉक्सिक रिलेशनशिप ट्रंप के राज में नेक्स्ट लेवल पर पहुंच चुका है. बार-बार धोखा देने वाले पाकिस्तान को अब अमेरिका और भी ज्यादा स्ट्रॉन्ग बननाने पर उतर आया है. हाल ही में अमेरिकी डिप्लोमैट नताली बेकर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के इरादे बयां करती दिखाई दे रही हैं. उनका कहना है कि ‘शक्तिशाली पाकिस्तान अमेरिका के लिए अच्छा है और एक शक्तिशाली अमेरिका पाकिस्तान के लिए अच्छा है’. ट्रंप की इस चालाक नीति के पीछे चीन और भारत के खिलाफ छुपी एक गहरी साजिश है.

अमेरिका-पाकिस्तान का टॉक्सिक रिश्ता

पाकिस्तान ने हाल ही में जब ईरान के फाइटर जेट छुपाए थे तो ट्रंप को अपने ही देश में बुरा-भला सुनाया गया था. अमेरिकी कांग्रेस ने साफ कह दिया था कि ट्रंप ने जिसे मीडिएटर बनाया है, वो पाकिस्तान भरोसे लायक नहीं है. इसके बावजूद भी वो नहीं जागे हैं. पाकिस्तान में तैनात अमेरिकी डिप्लोमैट नताली बेकर ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सोच का हवाला देकर कहा है कि पाकिस्तान की मजबूती में ही अमेरिका का हित छिपा है.

क्यों पाकिस्तान की धोखेबाजियों को अनदेखा कर रहे ट्रंप?

पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान कितना बड़ा धोखेबाज है तो भला ये बात डोनाल्ड ट्रंप से कैसे छिप सकती है लेकिन इसके बावजूद वो पाकिस्तान का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. वजह बहुत साफ है, एशिया के इस हिस्से में अमेरिका को एक ऐसा कठपुतली देश चाहिए, जिसका इस्तेमाल वो जब चाहे अपने फायदे के लिए कर सके.

असल में, भारत और चीन इस समय एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें बन चुके हैं और इन दोनों महाशक्तियों पर अमेरिका का कोई बस नहीं चलता. इसलिए अमेरिका एक सोची-समझी रणनीति के तहत पाकिस्तान के रास्ते इन दोनों देशों को समय-समय पर उकसाने और परेशान करने का खेल खेलता रहता है. इसी गेम प्लान को पूरा करने के लिए अमेरिका वहां के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

चीन पर लगाम कसने की रणनीति: अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान इस वक्त पूरी तरह चीन के ‘सीपेक’ (CPEC) और भारी कर्ज के जाल में फंसा हुआ है. अगर पाकिस्तान को इसी तरह अकेला छोड़ दिया गया तो वो पूरी तरह बीजिंग की कॉलोनी बन जाएगा, जो अमेरिका के वैश्विक दबदबे के लिए ठीक नहीं है.

आतंकवाद और अफगानिस्तान का रिमोट कंट्रोल: भले ही अमेरिकी सेनाएं अफगानिस्तान से जा चुकी हैं, लेकिन तालिबान और क्षेत्र में सक्रिय अल-कायदा या आईएसआईएस-के जैसे संगठनों पर नजर रखने के लिए अमेरिका को आज भी पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया मदद की जरूरत है.

एशिया पर कंट्रोल करने की मानसिकता : भारत के साथ अमेरिका के मजबूत आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते हैं, लेकिन वाशिंगटन कभी नहीं चाहेगा कि वो दक्षिण एशिया में सिर्फ एक ही बड़ी महाशक्ति पर पूरी तरह निर्भर रहे. वो हमेशा एक कंट्रोल माइंडसेट बनाकर चलता है, जिसके पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है.

मुनीर हैं ट्रंप की असली कठपुतली

नताली बेकर ने अपने बयान एक बार फिर से मुनीर का नाम लिया है. जिसके बाद ये साफ है कि पाकिस्तान में अमेरिका की असली कठपुतली असल में ट्रंप के फेवरेट फील्ड मार्शल हैं. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान में असली सत्ता वहां की चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि रावलपिंडी में बैठी ‘पाकिस्तानी सेना’ चलाती है. अमेरिका को पता है कि अगर पाकिस्तान में कोई अमेरिका की शर्तों को पूरा करवा सकता है, तो वो वहां की फौज ही है.

भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए ठीक नहीं ये मानसिकता

एक तरफ तो अमेरिका ‘क्वाड’ (QUAD) गुट में बैठकर भारत के साथ गहरी दोस्ती की कसमें खाता है, लेकिन दूसरी तरफ अपने निजी फायदों के लिए पाकिस्तान को भी पुचकारने से बाज नहीं आ रहा. अब सोचने वाली बात ये है कि जो पाकिस्तान हर वक्त भारत में अशांति फैलाने और कश्मीर को हड़पने के सपने देखता रहता है, अगर अमेरिका उसी देश को मजबूत बनाने की प्लानिंग करेगा, तो ये बात भारत को कभी हजम नहीं होगी. अमेरिका की यह दोहरी चाल आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच के अच्छे-भले रिश्तों में खटास पैदा कर सकती है.



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