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अमेरिका में नौकरी करने और पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ी और बेहद जरूरी खबर आ रही है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अमेरिकी वीजा नियमों में कई बड़े और कड़े बदलाव करने की तैयारी में है. इसका सबसे बड़ा असर आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और बड़ी कंपनियों पर पड़ने वाला है.
डोनाल्ड ट्रंप .
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन रोजगार और स्टूडेंट वीजा से जुड़े कई बड़े नियम बदलने की तैयारी कर रहा है. इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और बड़ी कंपनियों पर पड़ने वाला है. इसकी वजह है कि इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय ही करते हैं.
H-1B वीजा वालों को लग सकता है झटका
सबसे बड़ा झटका H-1B वीजा नियमों को लेकर लग सकता है, जो कि अगस्त में आने वाले है. नए नियमों के तहत अगर कोई कंपनी अपने H-1B कर्मचारी को किसी तीसरी कंपनी पर काम के लिए भेजती है, तो उसके नियम बहुत सख्त कर दिए जाएंगे. कंपनियों को अब यह साबित करने के लिए सबूत और दस्तावेज देने होंगे कि कर्मचारी और कंपनी के बीच असली मालिक-कामगार का रिश्ता है. वह वहां कोई खास काम ही कर रहा है. इसके अलावा जिन कंपनियों ने पहले नियमों को नहीं माना, उनके वीजा आवेदनों की बहुत बारीकी से जांच होगी.
वीजा रिन्यू कराना होगा और भी महंगा
जुलाई में आने वाले एक और नियम से भारतीय आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की जेब ढीली होने वाली है. अभी तक जिन कंपनियों में आधे से ज्यादा कर्मचारी H-1B या L-1 वीजा वाले होते हैं, उन्हें सिर्फ नया कर्मचारी रखने पर ही अलग फीस देनी पड़ती थी. लेकिन नए प्रस्ताव में तय है कि अब मौजूदा कर्मचारियों का वीजा बढ़ाने पर भी यह भारी फीस देनी होगी. इसके साथ ही अब कंपनियों को एंट्री-लेवल के विदेशी कर्मचारियों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सैलरी देनी होगी. इससे अमेरिका में विदेशी वर्कर को नौकरी पर रखना बहुत महंगा हो जाएगा.
ग्रीन कार्ड और नौकरी की शर्तों में बदलाव
ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए होने वाले लेबर सर्टिफिकेशन के नियमों को भी बदला जा रहा है. साल 2004 के बाद पहली बार इस सिस्टम को पूरी तरह अपडेट किया जा रहा है. इसके तहत अगर कोई कंपनी विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर कर रही है, तो उससे पहले कंपनी में छंटनी को लेकर कड़े नियम लागू होंगे. इससे अमेरिकी नागरिकों के साथ कोई भेदभाव न हो.
भारतीय छात्रों को लगेगा झटका
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए भी नियम बदलने वाले हैं. अभी तक छात्र जब तक पढ़ाई करते थे, तब तक उन्हें अमेरिका में रहने की अनुमति मिल जाती थी. लेकिन अब छात्र वीजा एक तय समय के लिए ही जारी होगा जो अधिकतम 4 साल होगा. अगर पढ़ाई लंबी खिंचती है, तो छात्रों को अमेरिकी अथॉरिटी से अलग से समय बढ़वाना होगा. अमेरिका में करीब 3.60 लाख भारतीय छात्र पढ़ते हैं, जो वहां के कुल विदेशी छात्रों का 31 फीसदी हैं. इसके साथ ही पढ़ाई के बाद मिलने वाली वर्क ट्रेनिंग की समीक्षा भी फरवरी 2027 में की जाएगी. इससे आगे चलकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
वर्क परमिट खत्म होते ही रुक जाएगा काम
एक और बड़ा झटका H-1B वीजा धारकों के स्पॉस को लगने वाला है. उनके लिए जो H-4 वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं. इस महीने आने वाले नियम के बाद, वर्क परमिट के रिन्यूअल आवेदन पेंडिंग होने के दौरान मिलने वाला ‘ऑटोमैटिक एक्सटेंशन’ खत्म हो जाएगा. इसका मतलब है कि जैसे ही मौजूदा वर्क परमिट की तारीख खत्म होगी, कर्मचारी को काम रोकना पड़ेगा. नया परमिट कार्ड आने तक इंतजार करना होगा. चूंकि अमेरिकी एजेंसी (USCIS) कार्ड अप्रूव करने में काफी समय लगाती है, इसलिए कई लोगों की नौकरी के बीच में लंबा गैप आ सकता है.
इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि इन नियमों को पूरी तरह लागू होने में अभी कुछ महीनों का समय लगेगा. लेकिन कंपनियों और छात्रों को अभी से अपनी आगे की प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए. ट्रंप प्रशासन का इरादा बिल्कुल साफ है.
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