उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद भी भारत की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि दोनों क्षेत्रों में मजबूती बनी हुई है और कारोबारी भरोसा भी सकारात्मक है।
आरबीआई के अनुसार, उपभोक्ताओं का खर्च, विशेषकर विवेकाधीन खर्च, अब तक मजबूत बना हुआ है। वहीं, बढ़ती लागत के बावजूद निवेश गतिविधियों में भी तेजी बनी हुई है। अप्रैल में भारत के माल निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ी हुई है।
आरबीआई ने चेतावनी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, जल संचयन, जलवायु अनुकूल खेती और कम अवधि वाली फसलों जैसी योजनाएं इस प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती हैं।




