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Most Beautiful Village Evian: इस बार फ्रांस और स्विटजरलैंड के बॉर्डर पर आल्पस पहाड़ियों की गोद में बसा इवियन में अमीरों की महफिल सजी है. मौका है जी-7 देशों की बैठक का. इवियन फ्रांस का बेहद खूबसूरत गांव या कस्वा है. इसकी खूबसूरती देख आप चौंक जाएंगे. ऐसा लगेगा कि धरती पर जन्नत उतर आई हो. यह गांव दुनिया के सबसे खूबसूरत गांवों में से एक हैं. यहां वो सब कुछ है जो आपको जन्नत का अहसास कराएगी. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
दुनिया का सबसे खूबसूरत गांव-इवियन.
Evian France Tourism : जी 7 देशों की बैठक फ्रांस में शुरू हो चुकी है. फ्रांस ने इसके लिए अपने सबसे खूबसूरत गांव इवियन को चुना है. इवियन इतना सुंदर गांव है कि इसकी हर फिजां में जन्नत का अहसास घुलता है. इसका आधिकारिक नाम इवियन-ले-बैं है. यहां की आबादी 10 हजार से भी कम है. यह फ्रांस और स्विट्जरलैंड के बॉर्डर पर स्थित है. दोनों देशों के बीच में यूरोप की सबसे बड़ी झील जेनेवा है. झील के दक्षिणी किनारे पर बसा हाऊत-सवोई डिपार्टमेंट में स्थित यह एक छोटा सा कस्बा है. इसके ठीक सामने झील के दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड का लॉज़ेन शहर दिखाई देता है. यहां से जेनेवा एयरपोर्ट महज एक घंटे में पहुंचा जा सकता है. जी 7 देशों की बैठक के लिए इवियन को चुनने की खास वजह है. यहां की फिजाओं में एक अलग ही शान और लग्जरी है. सफेद बर्फ की चादर ओढ़े ऊंचे पहाड़, चारों तरफ फैली हरियाली और बादलों के बीच बसा वह सुकून, जिसे देखने के लिए दुनिया भर के अमीर और रईस दीवाने रहते हैं. अगर आप भी इस खूबसूरत वादियों का दीदार करना चाहते हैं तो हम इसका पूरा डिटेल यहां बता रहे हैं. जरूर आना चाहता है? आइए जानते हैं इस जन्नत के बारे में.
कैसे हुई इवियन की खोज
लेक जेनेवा के किनारे बसे फ्रांस के इस बेहद खूबसूरत गांव का इतिहास भी बेहद रोचक है. शुरुआत में यहां रोमन साम्राज्य का प्रभाव था. रोमन लोगों ने लेक जेनेवा के किनारे अपनी बस्तियां बसाई थीं. 14वीं शताब्दी के आसपास इस पूरे क्षेत्र पर शक्तिशाली सवोई राजवंश का नियंत्रण हो गया. उन्होंने यहां किला और दीवारें बनाईं. यह शानदार महल का निर्माण कराया गया. सवोई के ड्यूक यहां लंबे समय तक शासन करता रहा. 1860 में इस पहाड़ी गांव इवियन का फ्रांस में विलय हो गया. इसके बाद फ्रांस के सम्राट ने इस शहर के नाम में ले-बैं जोड़ दिया. इसका मतलब स्नान या थर्मल स्पा होता है. 1900 तक आते-आते इवियन यूरोप के राजा-महाराजाओं, अमीरों और मशहूर हस्तियों का पसंदीदा वेकेशन स्पॉट बन गया. यहां भव्य आलीशान होटल, कसीनो और शानदार पैलैस लुमिएरे जैसी महान इमारतों का निर्माण हुआ. 1907 में यहां पर्यटकों के लिए एक विशेष फ्यूनिकुलर यानी केबल ट्रेन शुरू की गई. द्वितीय विश्व युद्ध से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने यहां 32 देशों की एक बैठक बुलाई, जिसमें नाजी जर्मनी से भाग रहे यहूदी शरणार्थियों को पनाह देने पर ऐतिहासिक चर्चा हुई थी. इसी शहर में ऐतिहासिक इवियन समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसने फ्रांस और अल्जीरिया के बीच चल रहे खूनी युद्ध को समाप्त किया और अल्जीरिया को एक स्वतंत्र देश के रूप में पहचान मिली. इससे पहले 2008 में भी यह जी 8 सम्मेलन हुआ था.
दुनिया का सबसे महंगा पानी
इवियन में दुनिया का सबसे महंगा पानी मिलता है. इसके पीछे बेहद रोचक कहानी है. यहां एक प्राकृतिक झरना बहता है. जब इस जगह के बारे में पता चला तो लिवर और किडनी बीमारी से पीड़ित एक फ्रांसीसी रईस मार्क्विस डी लेसेर्ट यहां पहुंचे. दरअसल, उस समय फ्रांस की क्रांति चल रही थी और वह भागकर यहां पहुंचे थे. वे यहां के एक स्थानीय निवासी मिसियर काशा के बगीचे में रुके थे. यहीं पर झरना बह रहा था. मार्क्विस डी लेसेर्ट ने इस झरने का पानी पीना शुरू कर दिया. कुछ ही महीनों में वे आश्चर्यजनक रूप से ठीक हो गए. उन्होंने इस चमत्कार का श्रेय उस शुद्ध पानी को दिया. इसके बाद डॉक्टरों ने पानी की जांच की और इसे सेहत के लिए वरदान माना. बस यहीं से इस गुमनाम से कस्बे की किस्मत बदल गई. लोग इस पानी को बोतल में बंद कर इसे बेचने लगे. इस झरने का नाम सोर्स काशा पड़ गया. दुनिया का मशहूर मिनरल वाटर ब्रांड इवियन इसी झरने का पानी है जो दुनिया के सबसे महंगे पानी की बोतल में शुमार है. हालांकि आज यहां से आप पानी मुफ्त में ले जा सकते हैं.
जिंदगी में एक बार क्यों जाना जरूरी
इवियन-ले-बैं इस धरती पर उन चुनिंदा जगहों में से है जहां कुदरत और इतिहास का सबसे जादुई संगम देखने को मिलता है. यहां जिंदगी में कम से कम एक बार जरूर आना चाहिए. यहां की खूबसूरत वादियां और नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देगा. यह शहर आल्प्स की बर्फीली पहाड़ियों की गोद में और यूरोप की सबसे खूबसूरत झीलों में से एक. जहां पास में ही बर्फ की सफेद चादर देखने को मिलेगी. लेक जेनेवा के किनारे की खूबसूरती देखते ही बनती है. यहां से दिखने वाला नीले पानी और पहाड़ों का नजारा किसी पेंटिंग जैसा खूबसूरत लगता है.यहां का मौसम सालभर बेहद सुहावना और ताजगी से भरा रहता है. पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं और झील की लहरें मन को एक अलग ही सुकून और शांति देती हैं. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण सोर्स काशा है, जहां से दुनिया का सबसे शुद्ध और मशहूर इवियन मिनरल वाटर निकलता है. इसके अलावा, यहां की ऐतिहासिक फ्यूनिकुलर केबल कार और पैलैस लुमिएरे जैसी शाही इमारतें पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. इसके अलावा भी कई शानदार महल है. पैलैस लुमिएरे 1902 में बना था. यह शानदार महल पहले एक हाइड्रोथेरेपी संस्थान था, जिसे अब एक भव्य सांस्कृतिक और कांग्रेस सेंटर में बदल दिया गया है. यहां अब तक कई इंटरनेशल जलसे हो चुके हैं. 1907 से ही यहां केबल ट्रेन चलती है जो पर्यटकों को झील के किनारे से पहाड़ियों पर बने आलीशान होटलों तक बिल्कुल मुफ्त में ले जाती है. इवियन कसीनो भी यहां बहुत फेमस है. यह यूरोप के सबसे बड़े थीम-आधारित कसीनो में से एक है. यह जगह सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर मानसिक शांति और प्रकृति के सबसे शुद्ध रूप को महसूस करने के लिए एक आदर्श स्वर्ग है.
French President Emmanuel Macron and his wife, First Lady of France Brigitte Macron, welcome European Commission President Ursula von der Leyen and her husband, Heiko von der Leyen, during the G7 summit. Photo- Anna Moneymaker/Pool via REUTERS
मशहूर हस्तियों का पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट
1860 के बाद जब इवियन का विकास हुआ तब से यह यूरोप का राजा-महाराजाओं का पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया. इवियन ब्रिटेन के किंग एडवर्ड VII, किंग जॉर्ज V और लेखक मार्सेल का पसंदीदा हॉलिडे रिजॉर्ट हुआ करता था. यहां की इमारतें आज भी भव्य स्थापत्य कला की याद दिलाती हैं. यहां पर कई अंतरर्राष्ट्रीय सम्मेलन हो चुके हैं. 1938 में यहां इवियन सम्मेलन हुआ था जिसमें 32 देशों के राष्ट्राध्यक्ष आए थे. द्वितीय विश्व युद्ध से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के नेतृत्व में यहूदियों की शरणार्थी समस्या पर यहां चर्चा हुई थी. 1962 में यहां इवियन समझौता हुआ था जिसके बाद अल्जीरियाई युद्ध समाप्त हुआ और अल्जीरिया को स्वतंत्रता मिली थी. इस जी-7 बैठक से पहले 2003 में भी यहीं सम्मेलन हुआ था. तब जी-8 हुआ करता था. चूंकि यह शहर दोनों देशों के बॉर्डर पर है, इसलिए इस बार शिखर सम्मेलन की सुरक्षा की कमान फ्रांस के साथ-साथ स्विट्जरलैंड की सेना और प्रांतीय पुलिस भी संयुक्त रूप से संभाल रही है.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें




