वहीं, समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी उन सभी ठिकानों पर लागू होती है जो विदेशी सैन्य कर्मियों को पनाह देते हैं, और अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहती हैं तो यह चेतावनी तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने पूरे क्षेत्र में नागरिक स्थलों पर अपनी मौजूदगी बना ली है। इनमें बेरूत के पुराने एयरपोर्ट के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस, और दमिश्क के ‘रिपब्लिक पैलेस’, ‘फोर सीजन्स’ और ‘शेरेटन’ होटलों में चलाई जा रहीं सलाहकार गतिविधियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते अमेरिकी मरीन सैनिकों को इस्तांबुल और सोफिया के रास्ते जिबूती अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भेजा गया है।





