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World TB Day 2026: हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड टीबी डे मनाया जाता है. टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसका सही इलाज करने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकती है. सामान्य टीबी का इलाज लगभग 6 महीने में पूरा होता है, जबकि गंभीर मामलों में ज्यादा समय लग सकता है. DOTS जैसी पद्धति और नियमित दवा लेने से इस बीमारी पर प्रभावी कंट्रोल पाया जा सकता है.
टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है.
Tuberculosis Treatment: हमारे देश में आज भी टीबी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है. टीबी शरीर के हर अंग में हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करती है. टीबी का बैक्टीरिया कई लोगों के शरीर में हो सकता है, लेकिन बीमारी तब होती है, जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. यह कमजोरी खराब पोषण, अस्वच्छ जीवनशैली या किसी अन्य बीमारी की वजह से हो सकती है. टीबी होने पर लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना और कभी-कभी खून की खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं. फेफड़ों के अलावा टीबी लिम्फ नोड्स, दिमाग, किडनी, हड्डियां और आंखों को भी प्रभावित कर सकती है.
ग्रेटर नोएडा के ओमेगा 1 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सर्विंदर सिंह ने बताया कि भारत में टीबी का बोझ बहुत ज्यादा है और दुनिया के करीब 25% टीबी मरीज भारत में हैं. हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं. हालांकि कुल मामलों में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन दवाओं से न ठीक होने वाली टीबी चिंता का विषय बनी हुई है. टीबी को कंट्रोल करने के लिए समय पर जांच, पूरा इलाज, अच्छा पोषण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है. टीबी से बचाव और इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जागरुकता और सही समय पर कदम उठाना जरूरी है.
डॉक्टर ने बताया कि आमतौर पर टीबी का इलाज 6 महीने तक चलता है. इसमें मरीज को नियमित रूप से दवाएं लेनी होती हैं. पहले 2 महीने के इलाज को इंटेंसिव फेज कहा जाता है और उसके बाद 4 महीने के ट्रीटमेंट को कंटीनुएशन फेज कहा जाता है. अगर मरीज समय पर दवा लेता है और इलाज बीच में नहीं छोड़ता, तो ज्यादातर मामलों में टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है. हालांकि अगर टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (MDR-TB) हो जाए और उस पर दवाएं बेअसर होने लगें, तो इलाज 9 से 24 महीने तक भी चल सकता है. टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है.
भारत में सरकार की डायरेक्टली ऑब्जर्ब्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स (DOTS) पद्धति सबसे प्रभावी मानी जाती है. इस उपचार में स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में मरीज को नियमित दवा दी जाती है, जिससे इलाज अधूरा न छूटे. सरकार के निक्षय कार्यक्रम के तहत टीबी की जांच और दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं. यह कार्यक्रम मरीजों को आर्थिक और पोषण संबंधी सहायता भी प्रदान करता है. टीबी का इलाज तभी सफल होता है जब मरीज कुछ जरूरी बातों का पालन करे. दवाएं रोजाना और समय पर लें, बीच में न छोड़ें. पौष्टिक आहार लें, जैसे दाल, फल, हरी सब्जियां. पर्याप्त आराम करें और शरीर को मजबूत बनाएं. खांसते समय मुंह ढकें और मास्क का उपयोग करें और नियमित जांच कराते रहें. इलाज बीच में छोड़ने से बीमारी दोबारा हो सकती है और दवाओं का असर कम हो सकता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें





