Iran Missile Power: 10 परसेंट बची है मिसाइल लॉन्च की ताकत, ड्रोन का भी निकला दम, ट्रंप से कब तक लड़ सकेगा ईरान?


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10 परसेंट बची है मिसाइल लॉन्च की ताकत, ड्रोन का भी निकला दम, कब तक लड़ेगा ईरान

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इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका-इजराइल हमलों से ईरान की सैन्य ताकत बुरी तरह कमजोर हो गई है. 75% मिसाइल सिस्टम नष्ट हो चुके हैं और ड्रोन व न्यूक्लियर ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान अब बड़े और लंबे हमले करने में सक्षम नहीं रह गया है.

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तेहरान: अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों ने ईरान की रणनीतिक सैन्य ताकत को लगभग खत्म कर दिया है. लगातार हवाई और मिसाइल हमलों से ईरान की मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और न्यूक्लियर ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास करीब 410 से 500 बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर थे. अब इनमें से करीब 75 प्रतिशत सिस्टम या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या काम करने लायक नहीं बचे. मौजूदा समय में सिर्फ 100 से 180 लॉन्चर ही सक्रिय माने जा रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले करना बेहद मुश्किल हो गया है.

मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता गिरी

मिसाइल भंडार की स्थिति भी तेजी से खराब हुई है. पहले ईरान के पास 2500 से 3000 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं. लेकिन संघर्ष के दौरान 500 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं और सैकड़ों जमीन पर ही नष्ट कर दी गईं. अब मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता शुरुआती दिनों के मुकाबले करीब 90 प्रतिशत तक गिर चुकी है. कुल मिलाकर ईरान की मिसाइल ताकत अब सिर्फ 8 से 10 प्रतिशत ही बची बताई जा रही है. ड्रोन क्षमता को भी बड़ा झटका लगा है. युद्ध से पहले हजारों की संख्या में ड्रोन मौजूद थे, लेकिन अब 2000 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल या नष्ट हो चुके हैं.

ड्रोन लॉन्च करने में ईरान को कितना नुकसान?

ड्रोन लॉन्च करने की दर 83 से 95 प्रतिशत तक गिर गई है. एयरबेस और कमांड सेंटर पर हमलों के कारण अब ईरान को छोटे और कम क्षमता वाले ड्रोन पर निर्भर होना पड़ रहा है. इस पूरे अभियान का अहम हिस्सा ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ रहा, जिसमें ईरान के सैन्य उत्पादन ढांचे को निशाना बनाया गया. मिसाइल और ड्रोन बनाने वाली फैक्ट्रियां, स्टोरेज डिपो और सप्लाई चेन को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया गया. इससे ईरान की नई हथियार बनाने की क्षमता को गहरा झटका लगा है. न्यूक्लियर ढांचे पर भी बड़े हमले हुए हैं. नतांज और फोर्डो जैसे ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां सेंट्रीफ्यूज और पावर सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इस्फहान और तालेघान में भी हमलों की खबर है, जिससे ईरान की परमाणु क्षमता लगभग ठप बताई जा रही है.



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