दिनभर आटा चक्की पर काम, रात में की पढ़ाई, पहले अटेंप्ट में ही NEET में पास, एम्स से कर रहे हैं MBBS


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Jaiwardhan Singh NEET Story: आटा चक्की पर मजदूरी करने वाले जयवर्धन सिंह ने नीट परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है. तंगहाली और मुश्किलों के बीच एम्स नागपुर की एमबीबीएस सीट हासिल कर जयवर्धन सिंह ने सफलता के नए मायने स्थापित कर दिए.

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Jaiwardhan Singh NEET: जयवर्धन सिंह नीट पास कर एम्स नागपुर से एमबीबीएस कर रहे हैं

नई दिल्ली (Jaiwardhan Singh NEET Story). कहावत है कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती. जयवर्धन सिंह की कहानी इसी बात को नई ऊंचाई पर ले जाती है. मध्य प्रदेश के महूगांव निवासी जयवर्धन सिंह के हाथों में कभी किताबों से ज्यादा अनाज की बोरियां होती थीं. उसने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल नीट क्रैक करके इतिहास रच दिया. परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने की वजह से जयवर्धन सिंह दिन में आटा चक्की पर मजदूरी करते थे और देर रात पढ़ाई.

यह कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस की है जो अभावों के बीच भी जिंदा रहता है. जयवर्धन सिंह की आंखों में डॉक्टर बनने का सपना तब पला, जब उन्होंने अपने आस-पास स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और गरीबी की मार देखी. बिना किसी महंगी कोचिंग और लग्जरी लाइफ के उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों तो किस्मत को भी झुकना पड़ता है. इस पर भी उन्हें लोगों के ताने सुनने पड़ते थे कि नीट पास कर डॉक्टर बनना उनके बस की बात नहीं. पढ़िए सक्सेस स्टोरी.

संघर्ष की चक्की से एमबीबीएस की सीट तक का सफर

जयवर्धन सिंह का परिवार शुरू से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. उनके पिता आटा चक्की पर काम करके मुश्किल से घर का गुजारा करते थे. जयवर्धन ने अपनी आंखों से पिता का संघर्ष देखा और कम उम्र में ही समझ लिया था कि उनकी परिस्थिति को केवल शिक्षा ही बदल सकती है. घर में पढ़ाई के लिए अलग कमरा तो दूर, अक्सर बिजली और शांत माहौल की भी कमी रहती थी.

आटा चक्की पर मजदूरी और पढ़ाई का तालमेल

जयवर्धन सिंह ने केवल पढ़ाई नहीं की, बल्कि काम भी किया. वे खुद चक्की पर हाथ बंटाते थे, जिससे परिवार को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके. चक्की की खड़खड़ाहट के बीच वे अपने मन में फॉर्मूले दोहराते रहते थे. जब दूसरे बच्चे खेल रहे होते थे या आराम कर रहे होते थे, तब जयवर्धन सिंह अनाज की बोरियां ढोने के बाद बची हुई ऊर्जा से रात-रात भर पढ़ाई करते थे.

नीट की चुनौती और अटूट संकल्प

नीट जैसी परीक्षा के लिए लोग लाखों रुपये कोचिंग पर खर्च करते हैं. लेकिन जयवर्धन सिंह के पास संसाधन सीमित थे. उन्होंने अपनी कमजोरियों को ही अपनी ताकत बनाया. जयवर्धन ने पुराने नोट्स, एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों और अपनी मेहनत के दम पर नीट परीक्षा की तैयारी शुरू की. उनका फोकस केवल एक चीज पर था- डॉक्टर बनना, जिससे वे अपने जैसे हजारों परिवारों की सेवा कर सकें.

नीट में सफलता के साथ पूरा किया सपना

नीट की तैयारी के दौरान कई बार जयवर्धन सिंह दिनभर में सिर्फ 2 घंटे सोते थे. उन्होंने 10वीं में नीट के बारे में सुना था और तुरंत तैयारी में जुट गए थे. तब लोग कहते थे कि चक्कीवाले का बेटा कभी डॉक्टर नहीं बन सकता. लेकिन जयवर्धन सिंह ने हार नहीं मानी और मंजिल को लक्ष्य मानकर डटे रहे. आखिरकार नीट के पहले प्रयास में ही 1863 रैंक हासिल कर उन्होंने सबका मुंह बंद कर दिया.

नीट रिजल्ट में शानदार रैंक के दम पर जयवर्धन सिंह को एम्स नागपुर में एडमिशन मिल गया. वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 25 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें



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