Iran Attack on Qatar Gas facility | Iran War | LPG | कतर में गैस फैसिलिटी पर ईरान के अटैक से अब गैस की कीमतों में लगेगी ‘आग’, भारत पर भी होगा असर?


Iran Attack on Qatar Gas LNG facility: ईरान जंग भारत से कोसों दूर हो रही है. मिडिल ईस्ट पूरी तरह से युद्ध का मैदान बना है. भले ही युद्ध सीधे तौर पर ईरान और इजरायल-अमेरिका लड़ रहे, पर इसका असर पूरी दुनिया पर हो रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. जिस तरह से गल्फ कंट्रीज यानी खाड़ी देशों में भी अटैक हो रहे हैं, उससे भारत की भी चिंता बढ़ती जा रही है. अब तक तो ईरान केवल खाड़ी देशों में अमेरिकी एयरबेस और मिलिट्री बेस को निशाना बना रहा था. अब ईरान एक कदम और आगे बढ़ गया है. वह अब पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में एनर्जी इन्फ्रास्ट्र्क्चर को टारगेट करने लगा है. पूरी दुनिया को जो डर सता रहा था, अब वह हकीकत बनने लगा है. ईरान ने न केवल कतर में एनर्जी ठिकानों पर अटैक की धमकी दी है, बल्कि इसकी शुरुआत भी कर दी है. कतर में गैस फैसिलिटी पर अटैक शुरू हो चुका है. इसका मतलब है कि अब गैस की कीमतों में आग लगने वाली है.

दरअसल, ईरान अब घायल शेर बन चुका है. वह अब इंतकाम की आग में जल रहा है. ईरान अब अपने गैस फील्ड पर हमले का बदला लेना शुरू कर चुका है. ईरान ने अपने ‘गैस फील्ड’ पर हमले के बाद धमकी दी है कि वह कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तेल और गैस के बुनियादी ढांचे पर हमला करेगा. अमेरिका-इजराइल के खिलाफ जारी युद्ध के दौरान ईरान पहले भी इस तरह की धमकियां दे चुका है. मगर अब ईरान ने अपनी धमकियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर चुका है. ईरान का यह फैसला उस घटना के बाद आई है, जिसमें फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे पर बुधवार को हमले हुए.

ईरान ने क्यों किया हमला

खाड़ी क्षेत्र में अहम एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिसाइल हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया है. ईरान बार-बार कतर के एनर्जी ठिकानों को निशाना बना रहा है. ईरान ने बुधवार की शाम को कतर के रास लफान इंजस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल से अटैक किया. इस हमले में कतर को काफी नुकसान हुआ है. खुद कतर एनर्जी ने इस बात की पुष्टि की है. इसका असर यह हुआ कि खाड़ी के देशों में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले के बाद गैस और तेल की कीमतें बढ़ गईं.

. ईरान ने अब कतर की सबसे बड़ी गैस फैसिलिटी पर सीधा अटैक कर दिया है.

कतर के गैस हब पर हमला
जी हां, कतर के गैस हब पर मिसाइल हमला हुआ है. कतर के अहम एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट में आग लग गई. रास लफान कॉम्प्लेक्स कतर की सबसे अहम गैस सुविधाओं में से एक है. रास लफान कॉम्प्लेक्स पर हुए मिसाइल हमले ने पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में हलचल मचा दी है. यह हमला ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में एक खतरनाक मोड़ का संकेत है. यह घटना तब हुई जब इजरायल ने ईरान के पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया था. इसके बाद तेहरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर को चेतावनी दी थी कि आने वाले कुछ घंटों में उनकी तेल और गैस सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा.

ईरान का कतर की गैस फैसिलिटी पर अटैक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के इस हमले से कतर के एक बड़े गैस प्लांट में आग लग गई और उसे ढांचागत नुकसान पहुंचा. इससे कतर एनर्जी ने तुरंत अपना पूरा LNG उत्पादन रोक दिया. इससे यह डर और बढ़ गया है कि अब यह युद्ध सिर्फ़ सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सीधे तौर पर दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन गया है. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यह पूरा क्षेत्र पहले से ही तनाव की स्थिति में है और पूरी दुनिया में गैस और तेल की किल्लत बढ़ती जा रही है. कतर की गैस फैसिलिटी पर अटैक का मतलब है कि गैस की कीमतों में आग लगेगी और भारत समेत पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ेगा.

भारत पर सबसे अधिक असर क्यों
अब इसका असर सबसे अधिक भारत पर पड़ेगा. कारण कि कतर भारत का सबसे बड़ा गैस सप्लायर है. भारत सबसे अधिक गैस कतर से ही लेता है. इसे यूं समझें कि करीब 47 फीसदी गैस का आयात कतर से होता है. भारत हर साल करीब 27 मिलियन टन एलएनजी आयात करता है. इसमें कतर से 47 फीसदी यानी करीब 12-13 मिलियन टन प्रति साल आता है. अब कतर में चूंकी गैस फैसिलिटी पर ही अटैक होने लगा है तो इसका असर पूरी तरह से भारत पर पड़ सकता है. वैसे भी होर्मुज बंद होने की वजह से भारत के गैस वाले कई जहाज अब भी समंदर में फंसे हैं. भारत लगातार ईरान से बातचीत कर बारी-बारी से अपने जहाज मंगा रहा है. हालांकि, यह बात भी सही है कि होर्मुज में भारत के पहले से कई गैस टैंकर फंसे हैं. ऐसे में वो वापस आते हैं तो फौरी तौर पर कोई बड़ा असर नहीं होगा.

कतर में गैस फैसिलिटी पर अटैक का असर भारत पर भी पड़ सकता है.

भारत अपना गैस कहां से आयात करता है?
भारत के एलएनजी आयात का लगभग आधा हिस्सा कतर से आता है.
इसे फीसदी में समझें तो कुल 47 फीसदी.
यूएई से करीब 24 फीसदी और अमेरिका से 11 फीसदी.
इसके बाद ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से भी आता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र पर भारत की भारी निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बढ़ता हुआ जोखिम बनती जा रही है.

भारत में कैसे पड़ेगा असर
इधर भारत में गैस की किल्लत देखी जा रही है. लोग सिलेंडर लेकर लाइन लगाते दिख रहे हैं. हालांकि, सरकार साफ तौर पर कह चुकी है कि देश में गैस की कोई किल्लत नहीं है. हालांकि, कतर पर अगर ईरान का अटैक बढ़ता है और गैस फैसिलिटी को नुकसान पहुंचता है तो शायद भविष्य में भारत पर भी इसका असर हो सकात है. भारत में एलपीजी यानी घरेलू रसोई गैस (LPG) का बड़ा हिस्सा LNG से जुड़ा है. कतर से आने वाली सस्ती गैस अगर महंगी हो गई तो सिलेंडर की कीमत भी बढ़ने का खतरा है. बहरहाल, यह सिर्फ शुरुआत है. ईरान ने कतर को और हमलों की धमकी दी है. अगर रास लाफान पूरी तरह ठप रहा तो भारत को दूसरी जगहों से महंगा एलएनजी खरीदना पड़ेगा.



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