टैक्सपेयर्स तुरंत करें ये 5 काम
1. सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज तैयार रखें
करदाताओं को अपने लेखा-जोखा, बिक्री और खरीद के रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, बिल, चालान और दूसरे जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए। अधूरी जानकारी या रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
2. GST और आयकर से जुड़े आंकड़ों का मिलान करें
कारोबारियों को जीएसटी टर्नओवर, कर विवरण और अन्य वित्तीय आंकड़ों का पुस्तकों से मिलान करना चाहिए। साथ ही फॉर्म 26एएस, एआईएस (Annual Information Statement) और टीआईएस (Taxpayer Information Summary) में दर्ज सूचनाओं की भी जांच करनी चाहिए, ताकि गलती या असंगति समय रहते दूर की जा सके।
3. बड़े लेनदेन और टैक्स ट्रीटमेंट की जांच करें
ऋण, स्थायी परिसंपत्तियों, संबंधित पक्षों, वैधानिक देनदारियों और बड़े खर्चों जैसे मामलों की विशेष जांच जरूरी है। ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले इन लेनदेन के टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर ऑडिटर से चर्चा करनी चाहिए।
4. ऑडिट रिपोर्ट और ITR के आंकड़े मिलाएं
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न में दर्ज आंकड़ों का आपस में मेल होना जरूरी है। टर्नओवर, खर्च, कटौतियां, टैक्स से जुड़े खुलासे और आगे ले जाए गए घाटे जैसे आंकड़ों में अंतर होने पर बाद में परेशानी हो सकती है।
5. रिपोर्ट अपलोड होने के बाद उसे स्वीकार करना न भूलें
सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट अपलोड होने के बाद करदाता को अपने आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करके उसे स्वीकार भी करना होता है। इसलिए इस प्रक्रिया के लिए भी पहले से पर्याप्त समय रखना जरूरी है।




