ऐपल के नए आईफोन 9 सितंबर को एंट्री करने के लिए तैयार हैं. नए आईफोन 18 सीरीज़ को लेकर काफी चर्चा चल रही है और इस बीच एक दिलचस्प बात भी सामने आई है. बात हो रही है कि कैसे Tim Cook के CEO बनने के बाद Apple की स्ट्रैटिजी में बदलाव हुआ. जी हां टिम कुक के समय में ऐपल ने आईफोन की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया. स्टीव जॉब्स के दौर में आईफोन हमेशा छोटे स्क्रीन वाला रहता था. जॉब्स का मानना था कि एक हाथ में आसानी से फिट होने वाला फोन ही सही है. लेकिन कुक के आने के बाद बाजार बदल चुका था.
एंड्रॉयड वाले कंपनियां बड़े स्क्रीन स्मार्टवाले फोन ला रही थीं और लोग उन्हें पसंद कर रहे थे. ऐपल को भी इस बदलाव के साथ चलना पड़ा.
पहले ऐपल ने छोटा सा बदलाव किया. आईफोन 5 में स्क्रीन का साइज 3.5 इंच से बढ़ाकर 4 इंच कर दिया गया. यह छोटा बदलाव लगता है, लेकिन ऐपल के लिए बड़ा कदम था. कई सालों तक स्क्रीन का साइज एक जैसा रखने के बाद पहली बार इसमें बदलाव हुआ.
उस समय एंड्रॉयड फोन पहले से ही बड़े डिस्प्ले के साथ आ रहे थे. लोग बड़े स्क्रीन पर फिल्में देखना, गेम खेलना और सोशल मीडिया इस्तेमाल करना पसंद कर रहे थे. ऐपल को लगा कि अब पुरानी सोच से काम नहीं चलेगा.
2014 में पहली बार हुआ ऐसा
असली बड़ा बदलाव 2014 में आया. आईफोन 6 और आईफोन 6 प्लस लॉन्च हुए. आईफोन 6 में 4.7 इंच की स्क्रीन थी और 6 प्लस में 5.5 इंच की. पहली बार ऐपल ने ग्राहकों को दो ऑप्शन दिए. पहले सिर्फ एक साइज का आईफोन आता था. अब लोग अपनी जरूरत के हिसाब से छोटा या बड़ा फोन चुन सकते थे. बड़े स्क्रीन वाले फोन की मांग बढ़ रही थी और ऐपल ने उसी मांग को पूरा किया.
इससे ऐपल एंड्रॉयड कंपनियों से सीधी टक्कर ले सका. लोग अब कहने लगे कि ऐपल भी बड़े स्क्रीन की जरूरत को समझ गया है. इसके बाद ऐपल ने स्क्रीन को और बेहतर बनाना शुरू किया. पहले एलसीडी स्क्रीन इस्तेमाल होती थी. बाद में प्रीमियम आईफोन में ओएलईडी स्क्रीन आ गई.
फिर आया FaceID
कलर ज्यादा चमकीले दिखने लगे और ब्लैक कलर गहरा लगने लगा. आईफोन एक्स के साथ फेस आईडी भी आया. अब फिंगरप्रिंट की जगह चेहरे से अनलॉक होने लगा.
ये बदलाव सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं रहे. पूरा डिजाइन और इस्तेमाल का तरीका बदल गया. स्क्रीन का साइज बढ़ाने का असर सिर्फ आईफोन तक नहीं रहा.
iPad Pro ने मारी एंट्री
2015 में ऐपल ने पहला आईपैड प्रो लाया. यह पहले के आईपैड से काफी बड़ा था. लोग काम, ड्राइंग और मनोरंजन के लिए बड़े टैबलेट चाहते थे. ऐपल ने उसी मांग को पूरा किया. अब कंपनी एक ही साइज पर अटकी नहीं रहती थी. अलग-अलग साइज और मॉडल लाने की सोच अपनाने लगी.
टिम कुक के समय में ऐपल की सोच साफ बदल गई. पहले कंपनी बहुत सीमित ऑप्शन रखती थी. एक साइज, एक डिजाइन और सबके लिए एक ही फोन. अब ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखा जाने लगा. कुछ लोग छोटे फोन पसंद करते हैं तो कुछ बड़े. कुछ लोग सिर्फ कॉल और मैसेज के लिए फोन रखते हैं तो कुछ लोग फिल्में देखने और गेम खेलने के लिए. ऐपल ने इन सभी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की.
बाजार में मुकाबला भी बहुत तेज हो गया था. सैमसंग, शाओमी और दूसरी कंपनियां लगातार बड़े और सस्ते फोन ला रही थीं. अगर ऐपल पुरानी रणनीति पर अड़ा रहता तो बहुत से ग्राहक दूसरे ब्रांड की तरफ चले जाते.
बड़े स्क्रीन वाले मॉडल लाकर ऐपल ने अपनी पकड़ मजबूत रखी. आज भी आईफोन के अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. छोटे साइज से लेकर प्रो मैक्स जैसे बड़े मॉडल तक सब मिलते हैं. यह बदलाव सिर्फ स्क्रीन का नहीं था. यह पूरी सोच का बदलाव था.
टिम कुक के नेतृत्व में कंपनी ने साबित कर दिया कि समय के साथ बदलना जरूरी है. छोटे स्क्रीन वाले आईफोन का जमाना खत्म हो चुका था. बड़े और बेहतर डिस्प्ले वाले फोन का नया दौर शुरू हो गया था. इसी वजह से आज आईफोन दुनिया भर में पॉपुलर बना हुआ है.




