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अमेरिका-कनाडा की ट्रेड वॉर अब रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच गई है. टॉयलेट पेपर और टिशू से लेकर व्हिस्की, चीज, लॉबस्टर और कार पार्ट्स पर टैरिफ की मार पड़ सकती है. कनाडा ने करीब 900 अमेरिकी सामानों पर 25 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी की है. दूसरी तरफ अमेरिका ने भी कनाडाई उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया है.
अमेरिका में टॉयलेट पेपर महंगा हुआ.
US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा की ट्रेड वॉर अब ऐसी चीजों तक पहुंच गई है, जिनके बिना रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल है. यानी मामला सिर्फ कार, स्टील या बड़े कारोबारी सौदों तक सीमित नहीं रहा. अब टॉयलेट पेपर, टिशू, व्हिस्की, चीज, लॉबस्टर और कार पार्ट्स तक पर टैरिफ की मार पड़ सकती है. टॉयलेट पेपर और टिशू ऐसी चीजें हैं, जिनके बिना कोई आम जिंदगी नहीं चल पाती. रोने के बाद आंख पोछने में, खाने के बाद हाथ पोछने में ये इस्तेमाल होता है. लेकिन अब इन पर टैरिफ की मार पड़ी है. ट्रेड वार से दोनों देशों के आम लोगों की जेब पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है. दरअसल, दोनों देशों के बीच ट्रेड टूटने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ का जवाब देने का ऐलान किया है. कनाडा ने करीब 900 अमेरिकी सामानों की सूची तैयार की है, जिन पर 8 सितंबर से 25 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है.
टॉयलेट पेपर पर भी टैक्स की मार
इस ट्रेड वॉर का सबसे दिलचस्प असर पेपर प्रोडक्ट्स पर पड़ सकता है. कनाडा ने टॉयलेट पेपर और फेस टिशू जैसे सामान पर 25 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी की है. मामला इसलिए दिलचस्प है क्योंकि अमेरिका में टॉयलेट पेपर का बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर बनता है, लेकिन इसके लिए जरूरी कच्चे माल के लिए अमेरिकी कंपनियां कनाडा के लकड़ी संसाधनों पर काफी निर्भर हैं. 2024 में अमेरिका ने कनाडा से करीब 32.8 करोड़ डॉलर का टॉयलेट पेपर आयात किया था. कनाडा इस मामले में अमेरिका का सबसे बड़ा विदेशी सप्लायर रहा. यानी ट्रेड वॉर अगर लंबी चली तो बाथरूम की जरूरत भी जेब पर असर डाल सकती है.
अमेरिका में टिशू की खपत भी कम नहीं
अमेरिका दुनिया की करीब 4 फीसदी आबादी रखता है, लेकिन दुनिया में होने वाली टिशू खपत में उसकी हिस्सेदारी 20 फीसदी से ज्यादा है. औसतन एक अमेरिकी साल में करीब 141 रोल टॉयलेट पेपर इस्तेमाल करता है. इस मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है. जर्मनी में यह औसत करीब 134 रोल है.
व्हिस्की से लेकर लॉबस्टर तक जंग
टैरिफ की मार सिर्फ टॉयलेट पेपर तक सीमित नहीं है. कनाडा की लोकप्रिय व्हिस्की क्राउन रॉयल और कनेडियन क्लब पर अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लगाया हुआ है. दूसरी तरफ कनाडा के कई प्रांतों ने अमेरिकी शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है. कनाडाई प्रधानमंत्री ने प्रांतों से अमेरिकी शराब को फिर दुकानों में रखने पर विचार करने को कहा है. लेकिन नोवा स्कोटिया के प्रीमियर टिम ह्यूस्टन ने सवाल उठाया कि बोतलें वापस शेल्फ पर आ भी गईं, तो क्या कनाडाई उन्हें खरीदेंगे?
अमेरिकी चीज और लॉबस्टर भी निशाने पर
अमेरिका ने लगभग सभी कनाडाई डेयरी उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. कनाडा ने भी अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर 50 फीसदी और अमेरिकी चीज पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है. कनाडा ने अमेरिकी मछली और सीफूड पर भी 25 फीसदी टैरिफ लगाया है. इसमें फ्रोजन लॉबस्टर भी शामिल है. अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स, जिनके मेन राज्य की अर्थव्यवस्था में लॉबस्टर कारोबार अहम है, ने ट्रंप के इस कदम को ‘गलती’ बताया है.
कार भी महंगी होने का खतरा
ट्रेड वॉर का असर ऑटो इंडस्ट्री पर भी पड़ सकता है. कनाडाई कारों और ऑटो पार्ट्स पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. अमेरिकी ऑटो कंपनियां कनाडा से आने वाले पार्ट्स पर काफी निर्भर हैं. ऐसे में टैरिफ का असर उत्पादन लागत पर पड़ सकता है और आगे चलकर इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर 1 जनवरी 2027 तक कोई समझौता नहीं होता, तो यह टैरिफ बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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