बिना बिजली के AC जैसी ठंडक! 12.9 डिग्री तक ठंडा करेगा, घर को शिमला बना देगा यह जादुई नैनोमटेरियल


नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनिंग का खर्च हर किसी का बजट बिगाड़ देता है. लेकिन अब स्पेन के रिसर्चर्स ने इस बड़ी समस्या का एक बहुत ही शानदार समाधान निकाल लिया है. स्पेन के इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रो एंड नैनोटेक्नोलॉजी के साइंटिस्ट्स ने एक ऐसा खास नैनोमटेरियल तैयार किया है जो धूप में रखी सतहों को बिना किसी बिजली के ठंडा कर सकता है. इस नई तकनीक के इस्तेमाल से सतह का तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है. यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कूलिंग में खर्च होता है. इस नए नैनोमटेरियल से भविष्य में इमारतों से लेकर वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तक में एसी की निर्भरता कम की जा सकती है. यह नैनोमटेरियल सीधे अंतरिक्ष में गर्मी को वापस भेजकर काम करता है.

कैसे काम करता है बिना बिजली के कूलिंग देने वाला यह नया नैनोमटेरियल?

यह नई तकनीक पूरी तरह से पैसिव रेडिएटिव कूलिंग पर आधारित है. इसे फाइंडर ग्रुप के रिसर्चर्स ने तैयार किया है और नैनोफोटोनिक्स जर्नल में पब्लिश किया है. यह हमारे वायुमंडल की एक खास खूबी का फायदा उठाती है. इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम में 8 से 13 माइक्रोमीटर के बीच एक ऐसा बैंड होता है जहां से गर्मी सीधे अंतरिक्ष में निकल जाती है. यह गर्मी हमारे वायुमंडल में बिल्कुल भी नहीं फंसती है. यह खास मटेरियल इस विंडो में बहुत अच्छी तरह से काम करता है. यह सोलर रेडिएशन को वापस रिफ्लेक्ट कर देता है. इसके कारण बिना किसी प्लग या कंप्रेसर के ही सतह आसपास की हवा से ज्यादा ठंडी हो जाती है.

इस खास नैनोमटेरियल को बनाने में किस खास पॉलीमर का इस्तेमाल किया गया है?

साइंटिस्ट्स ने इस काम के लिए पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड (पीवीडीएफ) नामक पॉलीमर को चुना है. इस पॉलीमर को पहले से ही इंफ्रारेड रूप में गर्मी को बाहर निकालने के लिए जाना जाता है. कूलिंग प्रोजेक्ट की लीडर क्रिस्टीना विसेंट ने कहा, ‘यह मटेरियल कई खास प्रॉपर्टीज का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन अपने साथ लेकर आता है’.

यह मटेरियल गर्मी को बहुत ही शानदार तरीके से बाहर निकालता है. इसके साथ ही यह अल्ट्रावायलेट रेडिएशन को भी सह सकता है और पानी को दूर रखता है. इससे इसमें एक तरह का सेल्फ-क्लीनिंग इफेक्ट पैदा होता है जो खराब मौसम में भी इसे सुरक्षित रखता है.

कैसे नैनोस्केल पर डिजाइन कंट्रोल ने इस कूलिंग तकनीक को इतना पावरफुल बनाया है?

इस पूरी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इस मटेरियल का खास आकार है.

  • रिसर्च टीम ने पॉलीमर को एनोडाइज्ड एल्युमिनियम ऑक्साइड के नैनोपोरस टेम्प्लेट में इंजेक्ट किया था. इससे थ्री-डायमेंशनल स्ट्रक्चर तैयार हुए. साइंटिस्ट्स इसके अंदर की ज्योमेट्री को बहुत ही सटीकता के साथ कंट्रोल कर सकते हैं.
  • नैनोमीटर स्केल पर डिजाइनिंग करना ही इस पूरी तकनीक की सबसे अहम कड़ी है. इस खास डिजाइन के कारण ही इन कूलर्स की ऑप्टिकल परफॉरमेंस इतनी बेहतरीन हो पाई है.
  • इस ऑप्टिमाइज्ड मटेरियल को पॉलीमर इनफिल्ट्रेशन के बाद अल्ट्राफास्ट कूलिंग से ट्रीट किया जाता है. इसके बाद यह औसतन 82.4 प्रतिशत सोलर रेडिएशन को रिफ्लेक्ट कर देता है.

मैड्रिड में हुए रियल लाइफ टेस्ट में इस नैनोमटेरियल ने कैसे सबको हैरान कर दिया?

इस थ्योरी को साबित करने के लिए पिछले साल मैड्रिड के ट्रेस कांटोस में सेंटर की छत पर टेस्ट किया गया. सबसे पहले इस मटेरियल को अल्ट्रावायलेट लाइट ट्रीटमेंट दिया गया ताकि इसकी सफेदी और रिफ्लेक्टेंस बढ़ सके. इसके बाद बहुत तेज धूप वाले और सूखे दिन में इसके चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. बिना कोटिंग वाले सैंपल के मुकाबले यह ट्रीटेड सतह 12.9 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा ठंडी रही.

रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक अभी भी विकास के दौर से गुजर रही है. लेकिन इस मटेरियल को बनाने का तरीका काफी सस्ता है और यह मौजूदा इंडस्ट्रियल प्रोसेस के साथ भी फिट बैठता है. इससे आने वाले समय में एसी पर हमारी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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