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व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लैविट ने हाल ही में अपना पद छोड़ा है. उन्होंने तो 28 की उम्र में सम्मानजनक तरीके से विदाई ली है लेकिन इस इस्तीफे ने 22 साल उस लड़की की कहानी याद दिला दी है, जिसे व्हाइट हाउस से बेइज्जत करके निकाला गया था. मोनिका लेविंस्की ने व्हाइट हाउस में 1955 में बतौर इंटर्न कदम रखा था. इसी दौरान उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के बीच अफेयर शुरू हुआ था. ये अफेयर ही उनकी जिंदगी का कलंक बन गया.
कैरोलिन लैविट के हाल ही में व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी पद से सम्मानजनक विदाई लेने की खबरों के बीच, अमेरिका के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय फिर चर्चा में आ गया है जब एक महिला को व्हाइट हाउस से बेइज्जत होकर निकलना पड़ा था. हम बात कर रहे हैं 90 के दशक के चर्चित क्लिंटन-लेविंस्की स्कैंडल की, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया था.
बात जुलाई 1995 की है, जब 22 साल की मोनिका लेविंस्की ने व्हाइट हाउस में एक बिना अनपेड इंटर्न के तौर पर काम करना शुरू किया था. वो एक आम लड़की की तरह अपने करियर की शुरुआत करने आई थीं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये जगह उनकी पूरी जिंदगी बदल देगी.
व्हाइट हाउस में कदम रखने के कुछ ही महीनों बाद, यानी नवंबर 1995 में मोनिका लेविंस्की और उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के बीच अफेयर शुरू हो गया. उस समय क्लिंटन 49 साल के थे और दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति थे, जबकि लेविंस्की एक 22 साल की युवा कर्मचारी थीं.
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व्हाइट हाउस के गलियारों में राष्ट्रपति और इंटर्न की नजदीकियों को लेकर अफवाहें उड़ने लगीं. सुरक्षा और विवाद से बचने के लिए अप्रैल 1996 में लेविंस्की का ट्रांसफर रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन में कर दिया गया. लेकिन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला रुका नहीं.
पेंटागन में लेविंस्की की मुलाकात ‘लिंडा ट्रिप’ नाम की महिला से हुई. लेविंस्की ने लिंडा को अपना राजदार माना और क्लिंटन के साथ अपने संबंधों की हर बात बताई. लेकिन लिंडा ट्रिप ने लेविंस्की को धोखा दिया और उनकी सारी टेलीफोनिक बातचीत चुपके से रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया.
जनवरी 1998 में लिंडा ट्रिप ने ये ऑडियो टेप्स जांच अधिकारियों को सौंप दिए और इंटरनेट पर ये खबर ब्रेक हो गई. रातों-रात पूरे अमेरिका और दुनिया के मीडिया में भूचाल आ गया. व्हाइट हाउस से लेकर आम जनता के बीच केवल इसी अफेयर की चर्चा होने लगी.
शुरुआत में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कैमरे के सामने खड़े होकर इस रिश्ते से साफ इनकार कर दिया लेकिन बाद में लेविंस्की की एक नीले रंग की ड्रेस सामने आई, जिस पर क्लिंटन का डीएनए मौजूद था. इस ठोस साइंटिफिक सबूत के बाद क्लिंटन को टीवी पर आकर अपना झूठ स्वीकारना पड़ा.
झूठी गवाही देने के आरोप में बिल क्लिंटन पर महाभियोग चलाया गया. हालांकि, वो अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान लेविंस्की का हुआ. उन्हें व्हाइट हाउस से बेइज्जत होकर निकलना पड़ा और रातों-रात वे पूरी दुनिया के सामने ट्रोलिंग और सार्वजनिक अपमान का शिकार बन गईं.
व्हाइट हाउस से बेइज्जत होकर निकाले जाने के बाद लेविंस्की को सालों तक नौकरी नहीं मिली और भारी डिप्रेशन से गुजरना पड़ा. बाद में वो पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चली गईं. आज सालों बाद, मोनिका लेविंस्की ने खुद को एक ‘एंटी-साइबरबुलिंग’ एक्टिविस्ट के रूप में स्थापित किया है और वो ऑनलाइन उत्पीड़न व ट्रोलिंग के खिलाफ दुनिया भर में आवाज उठाती हैं.




