Agency:एजेंसियां
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सुप्रीम कोर्ट से हालिया झटका मिलने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की कोशिश फिर शुरू कर दी है. दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए उन्होंने गैर नागरिकों के बच्चों की नागरिकता पर नई शर्तें लगाई हैं और बर्थ टूरिज्म पर भी रोक लगाने की तैयारी की है. यह कदम अमेरिका के 150 साल पुराने कानून को चुनौती देने वाला माना जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थ टूरिज्म रोकने को लेकर एक नए एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया है.
वॉशिंगटन: अमेरिका में जन्म से नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर एक बार फिर सियासी और संवैधानिक टकराव तेज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट से हाल ही में झटका पाने के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने अब दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन कर उसी नीति को दूसरे रास्ते से सीमित करने की कोशिश शुरू कर दी है. ट्रंप ने गुरुवार को ओवल ऑफिस से ऐलान करते हुए कहा कि यह कदम ‘काफी पहले उठ जाना चाहिए था’, लेकिन अब उनकी सरकार इसे लागू कर रही है. उनका यह कदम सीधे तौर पर उस फैसले के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जून में जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की उनकी पिछली कोशिश को खारिज कर दिया था.
नया आदेश क्या है?
पहले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत उन गैर-नागरिकों की परिभाषा को और सख्त किया गया है, जिनके बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने के बावजूद स्वतः नागरिकता नहीं मिलेगी. इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया है जहां माता-पिता में से कोई विदेशी सरकार से जुड़ा हो, आतंकी संगठनों से संबंध रखता हो या फर्जी तरीके से नागरिकता पाने की कोशिश कर रहा हो. दूसरा आदेश सीधे उस प्रैक्टिस पर वार करता है जिसे ‘बर्थ टूरिज्म’ कहा जाता है. यानी गर्भवती महिलाओं का सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका आना और यहां जन्म देना. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह सिस्टम का दुरुपयोग है.
डोनाल्ड ट्रंप किस बात पर भड़के है?
व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन मिलर ने साफ कहा कि कई लोग ‘टूरिस्ट बनकर अमेरिका आते हैं, लेकिन असली मकसद बच्चा पैदा कर उसे नागरिकता दिलाना होता है.’ उनके मुताबिक, बाद में यही बच्चे अमेरिकी नागरिक होने के नाते तमाम अधिकार और सुविधाएं हासिल करते हैं.
आंकड़ों पर भी विवाद
ट्रंप ने दावा किया कि ‘सैकड़ों हजार’ बच्चे इस तरह पैदा हो चुके हैं. लेकिन एक स्वतंत्र रिसर्च संस्था माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के मुताबिक, हर साल ऐसे मामलों की संख्या करीब 22,000 से 26,000 के बीच है. 2024 में तो सिर्फ 9,600 जन्म ही ऐसे दर्ज हुए जिनमें मां का पता अमेरिका के बाहर था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संख्या कुल जन्मों के मुकाबले बेहद कम है. कैलफोर्निया यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर गेब्रियल चिन ने इसे ‘बाल्टी में एक बूंद’ तक बताया है.
संवैधानिक टकराव और गहरा सकता है
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार 14वें संशोधन के तहत करीब 150 साल से लागू है. यानी अगर कोई बच्चा अमेरिका में पैदा होता है तो उसे तुरंत अमेरिकी नागरिक मिल जाती है. ट्रंप की कोशिश इसी मूल अधिकार को सीमित करने की है, जिससे एक बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति कुछ हद तक लोगों के अमेरिका आने पर रोक लगा सकते हैं, लेकिन एक बार बच्चा अमेरिका में जन्म ले ले तो उसकी नागरिकता छीनना आसान नहीं है. ट्रंप के इन नए आदेशों पर भी कानूनी चुनौती लगभग तय मानी जा रही है. यानी यह मामला एक बार फिर अदालतों तक पहुंचेगा.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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