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अमेरिका में 2026 के सीनेट चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी अपने ही फैसलों में उलझती दिख रही है. ये पार्टी कट्टर लेफ्टिस्ट चेहरों पर दांव लगा रही है, जो पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है. यही नहीं कैंडिडेट्स के बीच आपसी खींचतान भी सामने आ गई है. जानकारों का कहना है कि इन कट्टर लिबरल चेहरों को उतारकर डेमोक्रेट्स ने डोनाल्ड ट्रंप को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा थमा दिया है. ‘रेडिकल लेफ्ट’ के सख्त विरोधी ट्रंप अब अपनी रैलियों में इन पर हमला बोलकर वोटरों को अपनी तरफ खींचने की पूरी कोशिश करेंगे.
सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को दिया चारा
वॉशिंगटन: अमेरिकी राजनीति के मंच पर सीनेट चुनाव का बिगुल बज चुका है. इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी जहां अपनी आक्रामक रणनीतियों के साथ मैदान में डटी है, वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारती दिख रही है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट चुनाव के लिए कई ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है, जिनकी इमेज कट्टर वामपंथी वाली है. अमेरिकी राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेमोक्रेट्स ने अनजाने में ही सही लेकिन डोनाल्ड ट्रंप को थाली में सजाकर एक ऐसा राजनीतिक ‘चारा’ दे दिया है, जिसका इस्तेमाल ट्रंप अपनी चुनाव रैलियों में भूखे शेर की तरह करने वाले हैं.
ट्रंप के लिए परफेक्ट टारगेट बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार
डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ‘कट्टर वामपंथ’ और ‘सोशलिज्म’ के खिलाफ सबसे आक्रामक आवाज रहे हैं. वो अपनी हर रैली में चिल्ला-चिल्लाकर कहते हैं कि ‘वामपंथी अमेरिका को बर्बाद कर देंगे’. ऐसे में अगर डेमोक्रेट्स ने बीच का रास्ता अपनाने वाले नेताओं को छोड़कर सीधे कट्टर वामपंथियों को टिकट थमा दिया है तो ट्रंप के लिए उनकी धज्जियां उड़ाना बाएं हाथ का खेल बन गया है. इस चुनाव में कुछ ऐसे नाम हैं जो सीधे तौर पर ट्रंप की रडार पर आ चुके हैं.
- अब्दुल एल-सईद: ये मिशिगन से 2026 के यूएस सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी हैं. इन्हें बर्नी सैंडर्स और ‘अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज’ (AOC) का समर्थन मिला हुआ है. ये ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ और प्रोग्रेसिव नीतियों के समर्थक हैं.
- पेगी फ्लैनगन: मिनेसोटा की लेफ्टिनेंट गवर्नर पेगी फ्लैनगन 2026 के यूएस सीनेट चुनाव में दावेदार हैं और इन्हें सैंडर्स व वॉरेन जैसे नेताओं का खुला समर्थन प्राप्त है.
- करिश्मा मंजूर: न्यू हैम्पशायर से 2026 की सीनेट प्राइमरी में करिश्मा मंजूर एक प्रोग्रेसिव/वामपंथी विकल्प के तौर पर चुनाव मैदान में डटी हुई हैं.
- ट्रॉय जैक्सन: जून 2026 की प्राइमरी में ग्रेग प्लैटनर 72% वोट पाकर जीते थे लेकिन यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते 10 जुलाई 2026 को उन्होंने नाम वापस ले लिया. 25 जुलाई 2026 को डेमोक्रेटिक पार्टी ने स्पेशल कन्वेंशन करके पूर्व स्टेट सीनेट प्रेसिडेंट ट्रॉय जैक्सन को नया उम्मीदवार नॉमिनेट किया. रिपब्लिकन अभी भी इसे पार्टी के अंदरूनी बिखराव के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
ट्रंप कैसे बनाएंगे इसे चुनावी हथियार?
डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी रैलियों का स्टाइल किसी से छिपा नहीं है. वो जनता के बीच जाते हैं और सीधे तीखे जुमले उछालते हैं. डेमोक्रेट्स के इन धुर वामपंथी उम्मीदवारों के नाम सामने आते ही ट्रंप का प्रचार कैंपेन एक्टिव हो गया है.
- ‘रेडिकल लेफ्ट’ का डर: ट्रंप अब अमेरिका की आम जनता और स्विंग वोटर्स के मन में ये खौफ बिठाएंगे कि अगर ये नेता सीनेट में पहुंच गए तो वो अमेरिका को सोशलिस्ट देश बना देंगे.
- ‘वोक’ (Woke) कल्चर पर हमला: ट्रंप इन उम्मीदवारों की हद से ज्यादा ढीली-ढाली नीतियों को आड़े हाथों लेंगे. फिर चाहे वो जेंडर से जुड़े मुद्दे हों, अपराध पर नरमी हो या फिर बॉर्डर की सुरक्षा में ढिलाई, इन सब पर सवाल उठाकर उन्हें घेरना अब ट्रंप के लिए दाएं हाथ का खेल बन जाएगा.
- अर्थव्यवस्था और टैक्स का मुद्दा: वामपंथी उम्मीदवारों की कॉरपोरेट्स पर भारी टैक्स लगाने और फ्री-स्कीमों की नीतियों को ट्रंप यह कहकर भुनाएंगे कि इससे आम अमेरिकी का जेब खर्च बढ़ेगा और महंगाई आसमान छुएगी.
डेमोक्रेट्स की आंतरिक कलह का फायदा उठाने की ताक में रिपब्लिकन
डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी सब कुछ सही नहीं चल रहा है. पार्टी साफ तौर पर दो गुटों में बंट चुकी है, एक तरफ तो पुराने और ‘सेंट्रिस्ट’ (नरमपंथी) नेता हैं, तो दूसरी तरफ बर्नी सैंडर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज के समर्थक धुर लेफ्टिस्ट खड़े हैं. मिनेसोटा और मिशिगन जैसे अहम राज्यों के प्राइमरी चुनावों में जब प्रोग्रेसिव नेताओं ने बाजी मारी, तो पार्टी का ‘सेंट्रिस्ट’ धड़ा अंदर ही अंदर सुलग उठा. ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन टीम इसी दरार का फायदा उठाने की ताक में है. उनका गणित सीधा है, जब आम ‘सेंट्रिस्ट’ वोटर अपने ही धुर वामपंथी उम्मीदवार से असहज महसूस करेगा तो वो या तो वोट डालने ही नहीं जाएगा या फिर मजबूरी में रिपब्लिकन का बटन दबा देगा.
क्या भारी पड़ेगी डेमोक्रेट्स की ये गलती?
अमेरिकी सीनेट के चुनावों में जीत हमेशा उन उम्मीदवारों की होती है जो ‘स्विंग वोटर्स’ यानी निर्दलीय और ‘सेंट्रलिस्ट’ मतदाताओं को अपनी ओर खींच पाते हैं लेकिन जब कोई उम्मीदवार कट्टर लेफ्टिस्ट इमेज का होता है तो वो अपने कट्टर समर्थकों को तो खुश कर लेता है, लेकिन आम और सेंट्रलिस्ट वोटर उससे दूर छिटक जाता है.
डेमोक्रेट्स ने जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वो शायद लेफ्टिस्ट एजेंडे पर खरे उतरते हों, लेकिन चुनावी मैदान में वे ट्रंप के तीखे बाणों के लिए आसान निशाना बन गए हैं. अब देखना ये होगा कि ट्रंप रैलियों में इन ‘रेडिकल लेफ्ट’ चेहरों पर जो हमला बोलेंगे, डेमोक्रेट्स के पास उससे बचने की कोई ढाल है भी या नहीं!
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Introduction:
If world leaders are arguing, borders are shifting, or a geopolitical storm is brewing somewhere on the planet, chances are Utkarsha Srivastava is already reading and writing about it.
Exper…
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