भारत में निर्वासन और प्रत्यर्पण का मुद्दा
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद उनकी सरकार गिर गई थी और उन्हें ढाका छोड़ना पड़ा था। पिछले वर्ष नवंबर में ढाका की एक विशेष अदालत ने 2024 के छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश कई बार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है।
शेख हसीना ने कहा, “डर अब घरों, कार्यस्थलों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच गया है। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लोकतंत्र और न्याय की लड़ाई में बांग्लादेश के लोगों का साथ देने की अपील करती हूं। संगठित समूहों ने जन आंदोलनों को जानबूझकर हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया।”




